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राजस्थान प्रशासनिक अधिकारी हाफिज सैयद मुकर्रम अली शाह अपने अधिकारी के कर्तव्यों को पूरा करते हुये रमजान माह मे तरावीह भी पढा रहे है।



              ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

               मूलतः राजस्थान के टोंक से तालूक रखने वाले वर्तमान मे जयपुर मे स्थाई निवास करने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सैयद मुकर्रम अली शाह ने नावा-कुचामन के उपखण्ड अधिकारी रहते हुये सरकारी सेवा का दायित्व पूरा करने के बाद दिन मे मिलने वाले अतिरिक्त समय का सदुपयोग करके पवित्र किताब कुरान-ए-पाक को कंठस्थ याद किया। उसके बाद से पीछले पांच साल से माह-ए-रमजान मे कुरान ए पाक को सुनाकर तारावीह की विशेष नमाज भी पढा रहे है।
       ईरादे नेक व अज्म पक्का हो तो हर काम आसान होते चले जाते है। सैयद मुकर्रम शाह ने भी यह सब कर दिखाया। ये जब मेरे शहर सीकर मे डीआईजी स्टाम्प के पद पर पदस्थापित थे। तब चिलचिलाती धूप व चालीस-पेंतालिस पार जाते तापमान के बावजूद माह रमजान के पूरे रोजे रखना। सुबह जयपुर मे अपने घर शहरी करके सीकर आना एवं दिनभर दफ्तर मे बैठकर सरकारी काम करके शाम को कभी रास्ते मे या फिर जयपुर घर पर इफ्तार करने का सीलसीला कायम था। रात को जयपुर मे कुरान ए पाक से तरावीह पढाना एवं समय निकाल कर कुरान ए पाक का रियाज भी करना होता था।
            कुलमिलाकर यह है कि वर्तमान मे राजस्थान मदरसा बोर्ड, जयपुर मे सचिव पद पर पदस्थापित सैयद मुकर्रम शाह RAS की ईमानदारी व मेहनत एवं किसी भी काम के प्रति चेष्टा के अलावा अपने आपको एक तरह से पाक परवरदिगार को सौपने के चलते उनकी प्रत्येक राह आसान होती चली गईं। उन्होंने अपनी सरकारी सेवा के दायित्व को अच्छे से निभाते हुये इस माह ए रमजान मे तरावीह पढाने का काम अंजाम दिया है।

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