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कायमखानी बिरादरी को बडे भाई की तरह मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिये महत्ती भुमिका निभाने पर विचार करना चाहिए।


             ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

             हालांकि राजस्थान के अलग अलग हिस्सों मे मुस्लिम समुदाय की मेव-सिंधी व कायमखानी बिरादरी के संगठनों द्वारा खासतौर पर छात्रों के लिये जिला व तहसील मुख्यालयो पर हास्टलस कायम होने से शेक्षणिक फिल्ड मे परिणाम सकारात्मक आ रहे है। उक्त बिरदरियो के हास्टलों मे मुस्लिम समुदाय के छात्र रहकर विभिन्न तरह के कोर्सेज व स्कूल-कोलेज मे अध्ययन कर रहे है। लेकिन लड़कियों के लिये हास्टल की आवश्यकता के बावजूद मुस्लिम समुदाय द्वारा या फिर बिरादरी स्तर पर हास्टल कायम नही होने से लड़कियों की उच्च शिक्षा मे दिक्कत आना पाया जा रहा है। बिरादरी स्तर पर कायमखानी बिरादरी के अनेक जगह हास्टल उपलब्ध होने की वजह से उन पर बडे भाई की हैसियत से अधिक जिम्मेदारी आयत होती है कि वो इस तरफ कदम ओर अधिक तेजी से बढाये।
               सत्ता मे हिस्सेदारी के तौर पर मेव बिरादरी के पास मंत्री जाहिदा खान व मेवात विकास बोर्ड चैयरमैन जुबेर खान है। सिंधी मुस्लिम के पास केबिनेट मिनिस्टर शाले मोहम्मद तो कायमखानी के पास वक्फ बोर्ड चेयरमैन डा.खानू खान, अन्य पीछड़ा जाती आयोग के चैयरमैन जस्टिस भंवरु खान के अलावा वक्फ विकास परिषद चैयरमैन हाकम अली खान है। इन तीनो बिरदरियो के अलावा इनकी तरह देहाती परिवेश मे रहकर संघर्ष करके आगे आने को आतूर खेलदार व गद्दी बिरादरीया भी कंधे से कंधा मिलाकर खासतौर पर समुदाय के शैक्षणिक व आर्थिक तरक्की के लिये मंथन करके कार्ययोजना बनाकर काम शुरु करे तो कम समय मे अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते है। आर्मी व पुलिस के अलावा सरकारी सेवाओं मे कुछ ठीक प्रतिनिधित्व करने वाली कायमखानी बिरादरी को बडे भाई की भूमिका निभाते हुये जगह जगह छात्र छात्राओं के लिये अलग अलग हास्टल कायम करके समुदाय मे शैक्षणिक उत्थान के प्रयास करने चाहिये। ताकि मयारी तालिम पाकर युवा एक नया भारत बना सके। विश्वविद्यालय-कालेज व विभिन्न तरह के कोर्सेज मे शहरी परिवेश मे रहने वाले बच्चों के मुकाबले देहाती परिवेश से आने वालो की तादाद बहुत अधिक है। इस माहोल को शहरो तक ले जाना आवश्यक है।
                    कुल मिलाकर यह है कि वर्तमान समय मे सत्ता के हिस्सेदार बने उक्त लोगो के अलावा समुदाय मे एक बडी तादाद उन लोगो कि भी है जो बडे बडे ओहदो पर कार्यरत व सेवानिवृत्त है। उन सबको एक जाजम पर बैठा कर उत्थान के लिये कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल करने की जरुरत है। शैक्षणिक तौर पर मजबूत होते लोग प्रत्येक फिल्ड मे अपना लोहा मनवाने मे कामयाब होते है।





 

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