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राजस्थान लोकसेवा आयोग के रिक्त चल रहे अध्यक्ष पद पर नियुक्ति करने की बजाय फिर एक जूनियर सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।

 



                   ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

                  प्रदेश मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक व संवैधानिक नियुक्तियो के करने को लेकर फिसड्डी मानकर चला जाने के साथ साथ उनको लेकर कहावत बन चुकी है कि वो कुछ देते यानि किसी को बनाते तो है लेकिन जब बनाते है तबतक काफी बासी हो चुका होता है। अनेक तरह की राजनीतिक नियुक्तियो की तरह राजस्थान लोकसेवा आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवेधानिक संस्था के तत्तकालीन अध्यक्ष भूपेंद्र यादव के रिटायर होने पर सीनियर सदस्य शिवसिंह राठोड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था। अब राठौड़ के रिटायर होने पर सरकार द्वारा नये अध्यक्ष की नियुक्ति करने की बजाय दो सीनियर सदस्यों को छोड़कर जूनियर सदस्य जसवंत राठी (मूलतः हरियाणा जाट) को कार्यवाहक अध्यक्ष का जीम्मा सोंपा गया है।
                     राजस्थान लोकसेवा आयोग के समय समय पर आवश्यकता अनुसार सदस्य व अध्यक्ष बनाने का राज्य सरकार को पूरा अधिकार होता है। लेकिन जब महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं के अध्यक्ष व सदस्यों के पद लम्बे समय तक रिक्त रखे जाते है तो प्रदेश की जनता मे संदेश सरकार व सरकार के मुखिया को लेकर ठीक नही जाता है। राजस्थान लोकसेवा आयोग मे वर्तमान गहलोत सरकार मे सदस्यों के पद लम्बे समय रिक्त चलने के बाद अक्टूबर-20 मे चार सदस्य जसवंत राठी, बाबूलाल, संगीता आर्य व मंजू सैनी को सदस्य बनाया गया था। उन चारो सदस्यों के अलावा वर्तमान समय मे भाजपा सरकार के समय बनाये गये सदस्यों मे से राजकुमारी गुर्जर व रामूराम रायका भी सदस्य है। जो जसवंत राठी से सीनियर है। सदस्य के रिटायर होने के लिये उम्र 62 या फिर छ साल के कार्यकाल मे से जो पहले तय होने की अनिवार्यता के तहत सदस्य राजकुमारी गुर्जर अपना छ साल का कार्यकाल पुरा करके इसी साल दिसम्बर-22 व रायका 62 की उम्र तय करके जुलाई-22 रिटायर हो जायेंगे। राजकुमारी गुर्जर पीछले दिनो रिश्वत के खेल के मामले मे अपने सेवानिवृत्त आईपीएस पति को लेकर चर्चा मे रही थी।
             जानकारी अनुसार बताते है कि सरकार के मुखिया अशोक गहलोत राजस्थान लोकसेवा आयोग का अध्यक्ष व सदस्यों के तौर पर अब उन लोगो को मनोनीत करना चाहते है जो या तो उनकी सरकार के कार्यकाल के पहले सेवानिवृत्त हो जाये ताकि उनकी जगह वो फिर से अन्यो को मनोनीत कर सके। या फिर उनको मनोनीत करना चाहते है जो अपने छ साल का कार्यकाल पुरा कर सके। ताकि अगर उनकी सरकार रिपीट भी ना हो तो वो अगली सरकार मे भी पद पर बने रहे।
                कुल मिलाकर यह है कि प्रदेश वासियो को रिक्त चल रहे पदो मे नये अध्यक्ष व एक सदस्य के मनोनीत होने की उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने मनोनीत ना करके जूनियर सदस्य राठी को ही कार्यवाहक अध्यक्ष बना कर एक दफा कुछ समय के लिये मनोनयन को टाल दिया लगता है। ठंडी पड़ चुकी मनोनयन की चर्चा बजट सत्र के बाद फिर जोर पकड़ती नजर आयेगी।

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