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राज्यसभा के चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत समर्थक विधायकों को साधे रखना चाहते है। - दो सदस्य कांग्रेस के आसानी से तीसरा मुख्यमंत्री गहलोत की जोड़तोड़ की रणनीति से जीताये जाने की उम्मीद।


             ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

              राजनीति के जादूगर व सियासी बिछात बिछाने के माहिर माने जाने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली मे तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट से चल रही सियासी कुश्ती के कारण अपने पैर ओर अधिक मजबूत करने के लिये दिसम्बर-18 मे सरकार गठित करने के आठ महीने बाद भाजपा के राज्यसभा सदस्य मदन लाल सैनी के निधन पर खाली हुई सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री व सोनिया गांधी के विश्वासपात्र डा. मनमोहन सिंह को राजस्थान से अगस्त-19 मे उपचुनाव मे राज्य सभा सदस्य बनाकर जो कदम उठाया वो कदम उन्हें आज भी मददगार साबित हो रहा है। डा.मनमोहन इस चुनाव मे निर्विरोध चुने गये थे।
             भाजपा के चार राज्यसभा सदस्यों के 4-जुलाई-22 को कार्यकाल पूरा होने पर अप्रैल-मई मे होने वाले चुनाव मे उम्मीदवार बनने के लिये नेताओं ने जयपुर-दिल्ली भागदौड़ शुरू कर दी है। वही मुख्यमंत्री गहलोत कांग्रेस व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय व अन्य दलो के विधायकों को साधे रखना चाहते है। ताकि कांग्रेस के तीन सदस्य चुनाव आसानी से जीत जाये।
                 भाजपा की तरफ से 2016 मे जीते चार राज्यसभा सदस्य ओम प्रकाश माथुर, जेके अल्फोस, रामकुमार वर्मा व हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर का कार्यकाल पूरा होने पर चार सदस्यों का चुनाव होगा। विधायकों की गणित के अनुसार कांग्रेस के तीन व भाजपा का एक सदस्य चुनाव जीत सकते है। वर्तमान मे कांग्रेस के पास 107 स्वयं के, दो माकपा, दो बीटीपी, एक लोकदल व तेराह निर्दलीयों विधायकों का समर्थन बताया जाता है। जबकि भाजपा के पास बहतर विधायक बताते है। व तीन विधायक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के विधायक है।इस हिसाब से कांग्रेस के दो सांसद आसानी से व तीसरा मामूली जोड़तोड़ से जीताये जा सकते है।
                 मुख्यमंत्री गहलोत को राजनीति मे जादूगर कहे जाने के पीछे अनेक कारण हो सकते है। वर्तमान मे भाजपा व रालोपा को छोड़कर बाकी सभी विधायकों को अपने पक्ष मे साधे रखना एवं दिल्ली हाईकमान को अपने पक्ष मे बनाये रखने के लिये पहले सोनिया गांधी के करीबी व विश्वासपात्र पूर्व प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह को व फिर गांधी परिवार के नजदीकी व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल को राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनाना प्रमुख कारण बताते है।
            लोकसभा सदस्यों के पांच साल के मुकाबले राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल छ साल का होता है। लोकसभा भंग होने या फिर चुनाव समय से पहले होने पर लोकसभा सदस्य का कार्यकाल कभी कभार कम भी हो सकता है। लेकिन राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल छ साल ही होता है। जबतक वो त्याग पत्र ना दे या फिर किसी सदस्य का निधन ना हो।
           भाजपा के 4-जुलाई-22 को रिटायर होने वाले चार राज्य सभा सदस्यों के अतिरिक्त वर्तमान मे अन्य छ सदस्यो मे से किरोड़ी लाल, डा.मनमोहन सिंह व भूपेन्द्र यादव का कार्यकाल 3-अप्रैल 24 को व नीरज डांगी, राजेन्द्र गहलोत व केसी वेणुगोपाल का कार्यकाल 21-जून-26 को पूरा होगा।इनमे मनमोहन सिंह, नीरज डांगी व केसी वेणुगोपाल कांग्रेस के व किरोड़ी लाल, भूपेन्द्र यादव व राजेन्द्र गहलोत भाजपा के सदस्य है।
               अगले कुछ महीनों बाद राजस्थान से होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिये कांग्रेस की तरफ से अनेक नेता उम्मीदवार बनने की कोशिश मे लगे हुये है। हाईकमान के सामने मुख्यमंत्री अपना पाया मजबूत रखने के लिये प्रभारी महामंत्री अजय माकन व राष्ट्रीय नेता प्रियंका गांधी मे से किसी एक को प्रदेश से राज्यसभा मे भेजने का पासा फैंक सकते है। वही हालही मे मंत्री पद से हटाये गये रघु शर्मा व हरीश चोधरी एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य दुर्रू मियां को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दूर्रु मियां के विरोधी उन्हें रोकने के लिये अनेक षड्यंत्र भी कर रहे है। उनके एक आडियो को पीछले दिनो काफी वायरल करके उनको बदनाम करने की कोशिश भी हुई थी। इनके अलावा राष्ट्रीय महामंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, वर्किंग कमेटी मेम्बर रघुवीर मीणा, रामेश्वर डूडी, सुभाष महरिया, गिरिजा व्यास, वैभव गहलोत व ज्योति मिर्धा का नाम भी कभी कभी उछाले मारते रहते है।

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