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मलमास खत्म होने के बाद अब कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक नियुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी।


             ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

           हालांकि पीछले तीन साल से राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर एक तरह से राजस्थान मे मलमास ही चल रहा था। लेकिन गहलोत सरकार के चोथे साल मे प्रवेश करने के बाद अब लगता है कि कांग्रेस नेताओं को जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियों से नवाजा जायेगा। जिसमे लोकसभा व विधानसभा मे हारे हुये उम्मीदवारों के अलावा मुख्यमंत्री के नजदीकी कुछ नेताओं के साथ साथ राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी मे प्रदेश से नेतृत्व करने वाले नेताओं की बल्ले बल्ले होने की सम्भावना जताई जा रही है। दुसरी तरफ मंत्री पद से हटाये गये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा किसी ना किसी रुप मे मंत्री दर्जा पाने की जुगाड़ मे लगे हुये है। वही रघु शर्मा व हरीश चोधरी राज्य सभा का सदस्य बनकर दिल्ली जाना चाहते बताते है।
                  प्रदेश मे संवेधानिक पदो पर एक एक करके मुख्यमंत्री गहलोत अपने चेहते अधीकांश ब्यूरोक्रेट्स को नियुक्ति देकर उन्हें एडजस्ट कर चुके है। वहीं अब होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों मे भी अधीकांश पदो पर मुख्यमंत्री गहलोत की एक तरफा चलने की सम्भावना बताते है। पायलट खेमे को किसी भी रुप मे तरजीह मिलने की सम्भावना कतई नही है। हां कुछ नियुक्तियों पर मां व बेटी-बेटा की पसंद का पूरा ख्याल रखा जायेगा। संगठन महामंत्री व राजस्थान से राज्य सभा सदस्य केसी वेणुगोपाल व प्रभारी महामंत्री अजय माकन की सहमति भी गहलोत की पसंद पर ही रहती बताते है। गहलोत प्रभारी महामंत्री माकन के सामने उन्हें प्रदेश से राज्य सभा सदस्य बनाने का पासा भी फैंक सकते है।
              राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत 17-जनवरी को वक्फ बोर्ड के नये अध्यक्ष के रुप मे मिलने से होती बताते है। विधायकों को नियमानुसार लाभ का पद नही मिलने की बाध्यता के चलते उन्हें संतुष्ट रखने के तरीके पर काम चल ही रहा है। वही लोकसभा व विधानसभा चुनाव मे हारे हुये व दिल्ली हाईकमान व मुख्यमंत्री के करीबी बडे नेताओं को राजनीतिक नियुक्ति देने का सीलसीला अब जारी होगा। अधीकांश पदो पर नियुक्ति देने के लिये नेताओं की फायनल सूची पर मुख्यमंत्री गहलोत ने हाईकमान से सहमति ले रखी है। बाकी बचे हुये कुछ पदों पर नियुक्ति के लिये सहमति भी जल्द मिलना तय है।

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