सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रधानमंत्री मोदी की तरह पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को झुकाना होगा -------- नियमतीकरण को लेकर राज्य भर मे तीन महीने से मदरसा पैराटीचर्स का आंदोलन जारी।

                               मुख्यमंत्री गहलोत अभी तक ठस से मस तक नही।
              ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

                  कृषि सम्बंधित तीन काले कानून को वापिस लेने की मांग को लेकर किसानो द्वारा दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक समय तक धरना देने के साथ साथ करीब सात सो किसानों का बलिदान होने पर प्रधानमंत्री मोदी को काले कानून वापिस लेने व माफी मांगने पर मजबूर होना पड़ा था। उसी तर्ज पर राजस्थान मे मुख्यमंत्री गहलोत को अपने चुनाव मेनिफेस्टो मे लगातार किये जा रहे नियमतीकरण के वादे को याद दिलाकर उसे पुरा करने की मांग को लेकर राजस्थान के मदरसा पैराटीचर्स पहले रुक रुक कर अब तीन महीने से जिला स्तर के अतिरिक्त जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना-प्रदर्शन व अनशन करके आंदोलनरत है। आंदोलनकारियों को याद रखना होगा कि 700 से अधिक आंदोलनरत किसानों की मौत होने के बाद मोदी को उन्होंने झुकाया था। इस आंदोलन मे तो अभी कोटा की  एक मात्र बहन नाजमीन नामक आंदोलनरत पैराटीचर्स का अभी तक बलिदान हुवा है।
              आंदोलनरत मदरसा पैराटीचर्स गहलोत सरकार को उनके द्वारा किये वादा याद दिलाकर उनकी जायज मांग मांगने को लेकर राज्य भर मे विधायकों के घर के सामने धरना देने के साथ साथ राजधानी जयपुर मे तीन महीने से शहीद स्मारक पर धरना दे रहे है। समय समय पर विभिन्न तरह के तरीके अपनाते हुये जिला व राजधानी मुख्यालय पर बडी बडी रैली-जुलूस निकाल कर सत्ताधारी नेताओं के सामने प्रदर्शन भी कर रहे है।
               आंदोलन को लेकर सरकार के कान पर जब जू तक नही रेंगी तो मदरसा पैराटीचर्स ने मुख्यमंत्री को जगाने के लिये आंदोलन मे नये नये प्रयोग करने शूरु किये। जिनमे सबसे उपयोगी बदलाव वर्तमान मे चल रहे रुप को माना जा रहा है। सरकार के तीन साल के पूरे होने पर प्रभारी मंत्रियों द्वारा प्रत्येक जिले मे जाकर सरकार द्वारा किये गये कामो की जनता को जानकारी देने पर उनका राज्य भर मे आंदोलनकारी मदरसा पैराटीचर्स द्वारा भारी विरोध करके उनके रंग मे भंग डालने का सरकार पर असरकारक साबित हो रहा है।
           आंदोलन के अपनाये जा रहे विभिन्न तरीकों के बाद मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र जोधपुर मे उनके पूत्र वैभव गहलोत का मदरसा पैराटीचर्स द्वारा भारी विरोध करने के अलावा शिक्षा मंत्री बी.डी कल्ला का उनके निर्वाचन क्षेत्र बीकानेर के अलावा प्रभारी मंत्री विजेंद्र ओला का चूरु सहित राज्य भर मे मंत्रियो व नेताओं का विरोध करके रंग मे भंग डालने से सरकार को कुछ अहसास हो रहा है। कल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा का उनके गृह जिला सीकर मे उनका व उनके साथ चल रही प्रभारी मंत्री शंकुतला रावत का मदरसा पैराटीचर्स द्वारा भारी विरोध करने के बाद जयपुर तक हलचल देखी जा रही है।
            शांतिपूर्वक आंदोलन से लोकतांत्र मे लम्बा संघर्ष करके बडे हठ वाली सरकारों को भी झुकाकर अपनी जायज मांगे मनवाने का भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास मे अनेको उदाहरण मोजूद है। हाल ही मे हुये ऐतिहासिक सफल किसान आंदोलन को सालो साल दुनिया मे याद किया जायेगा।जिन्होंने सेंकड़ो आंदोलनकारियो की कुर्बानी के बावजूद अपने वचन से ठस से मस नही हुये। सभी तरह के सरकारी हथकंडों को विफल करते हुये अपनी जायज मांग को मनवा कर ही आंदोलनरत किसान वापस अपने घरो की तरफ लोटे। आंदोलनरत मदरसा पैराटीचर्स को हाल ही मे हुये सफल किसान आंदोलन की तर्ज पर अपने आंदोलन को आगे बढाने पर विचार करना होगा। सरकारे झूकती नही झुकाई जाती है।



 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वक्फबोर्ड चैयरमैन डा.खानू की कोशिशों से अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये जमीन आवंटन का आदेश जारी।

         ।अशफाक कायमखानी। चूरु।राजस्थान।              राज्य सरकार द्वारा चूरु शहर स्थित अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये बजट आवंटित होने के बावजूद जमीन नही होने के कारण निर्माण का मामला काफी दिनो से अटके रहने के बाद डा.खानू खान की कोशिशों से जमीन आवंटन का आदेश जारी होने से चारो तरफ खुशी का आलम देखा जा रहा है।            स्थानीय नगरपरिषद ने जमीन आवंटन का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजकर जमीन आवंटन करने का अनुरोध किया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा कार्यवाही मे देरी होने पर स्थानीय लोगो ने धरने प्रदर्शन किया था। उक्त लोगो ने वक्फ बोर्ड चैयरमैन डा.खानू खान से परिषद के प्रस्ताव को मंजूर करवा कर आदेश जारी करने का अनुरोध किया था। डा.खानू खान ने तत्परता दिखाते हुये भागदौड़ करके सरकार से जमीन आवंटन का आदेश आज जारी करवाने पर क्षेत्रवासी उनका आभार व्यक्त कर रहे है।  

नूआ का मुस्लिम परिवार जिसमे एक दर्जन से अधिक अधिकारी बने। तो झाड़ोद का दूसरा परिवार जिसमे अधिकारियों की लम्बी कतार

              ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।             राजस्थान मे खासतौर पर देहाती परिवेश मे रहकर फौज-पुलिस व अन्य सेवाओं मे रहने के अलावा खेती पर निर्भर मुस्लिम समुदाय की कायमखानी बिरादरी के झूंझुनू जिले के नूआ व नागौर जिले के झाड़ोद गावं के दो परिवारों मे बडी तादाद मे अधिकारी देकर वतन की खिदमत अंजाम दे रहे है।            नूआ गावं के मरहूम लियाकत अली व झाड़ोद के जस्टिस भंवरु खा के परिवार को लम्बे अर्शे से अधिकारियो की खान के तौर पर प्रदेश मे पहचाना जाता है। जस्टिस भंवरु खा स्वयं राजस्थान के निवासी के तौर पर पहले न्यायीक सेवा मे चयनित होने वाले मुस्लिम थे। जो बाद मे राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस पद से सेवानिवृत्त हुये। उनके दादा कप्तान महमदू खा रियासत काल मे केप्टन व पीता बक्सू खां पुलिस के आला अधिकारी से सेवानिवृत्त हुये। भंवरु के चाचा पुलिस अधिकारी सहित विभिन्न विभागों मे अधिकारी रहे। इनके भाई बहादुर खा व बख्तावर खान राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी रहे है। जस्टिस भंवरु के पुत्र इकबाल खान व पूत्र वधु रश्मि वर्तमान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के IAS अधिकारी है।              इसी तरह नूआ गावं के मरह

पत्रकारिता क्षेत्र मे सीकर के युवा पत्रकारों का दैनिक भास्कर मे बढता दबदबा। - दैनिक भास्कर के राजस्थान प्रमुख सहित अनेक स्थानीय सम्पादक सीकर से तालूक रखते है।

                                         सीकर। ।अशफाक कायमखानी।  भारत मे स्वच्छ व निष्पक्ष पत्रकारिता जगत मे लक्ष्मनगढ निवासी द्वारा अच्छा नाम कमाने वाले हाल दिल्ली निवासी अनिल चमड़िया सहित कुछ ऐसे पत्रकार क्षेत्र से रहे व है। जिनकी पत्रकारिता को सलाम किया जा सकता है। लेकिन पिछले कुछ दिनो मे सीकर के तीन युवा पत्रकारों ने भास्कर समुह मे काम करते हुये जो अपने क्षेत्र मे ऊंचाई पाई है।उस ऊंचाई ने सीकर का नाम ऊंचा कर दिया है।         इंदौर से प्रकाशित  दैनिक भास्कर के प्रमुख संस्करण के सम्पादक रहने के अलावा जयपुर सीटी भास्कर व शिमला मे भास्कर के सम्पादक रहे सीकर शहर निवासी मुकेश माथुर आजकल दैनिक भास्कर के जयपुर मे राजस्थान प्रमुख है।                 दैनिक भास्कर के सीकर दफ्तर मे पत्रकारिता करते हुये उनकी स्वच्छ व निष्पक्ष पत्रकारिता का लोहा मानते हुये जिले के सुरेंद्र चोधरी को भास्कर प्रबंधक ने उन्हें भीलवाड़ा संस्करण का सम्पादक बनाया था। जिन्होंने भीलवाड़ा जाकर पत्रकारिता को काफी बुलंदी पर पहुंचाया है।                 फतेहपुर तहसील के गावं से निकल कर सीकर शहर मे रहकर सुरेंद्र चोधरी के पत्रका