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सीकर की गठाला बहुओ की राजनीति से मुस्लिम समुदाय को सबक लेना चाहिये। रिस्ते मे सास इंदिरा गठाला भाजपा जिलाध्यक्ष तो सुनीता गठाला अब कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनी।


           ।अशफाक कायमखानी।
 सीकर।

             राजनीति वैसे तो किसी रिस्तेदार व नजदीकी के दवाब व सलाह के कारण ना होकर अपने विचारों व सिद्दातों के कारण ही जारी रखी जा सकती है। लेकिन कुछ अर्शे से भारतीय राजनीति मे देखा गया है कि सियासी लोग ऊपर से निचले स्तर तक अपने हित साधने के लिये एक से दूसरे दल मे छलांग लगाते देर नही लगाते है। लेकिन सीकर के धोद विधानसभा क्षेत्र के बिडोली गावं के शेक्षणिक व राजनीतिक तोर पर जागरूक व मजबूत गठाला (जाट) परिवार की दो बहुओं ने अपने सिद्धांतों व राजनीतिक विचारों की ताकत के बल पर भारत के दो बडे राजनीतिक दलो की जिलाध्यक्ष बनकर अपनी राजनीतिक काबलियत का लोहा मनवा कर नई दिशा दिखाई है। इन्हीं दो बहुओ का अनुसरण करते हुये उनकी तर्ज पर मुस्लिम मतदाता चुनावो मे मौके की नजाकत समझकर चाहे मतदान किसी भी दल या उम्मीदवार के पक्ष मे करे लेकिन सिंद्धातों व राजनीतिक विचारों के अनुसार परिवारों मे अलग अलग दलो मे लीडरशिप उभारने की कोशिश जरूर करनी चाहिये। ताकि वोटबैंक के धब्बे से छुटकारा पाकर राजनीति के वर्तमान मे चलत मे जारी बदलाव मे अपने आपको समायोजित रख पाये।
              हालांकि सीकर जिले की राजनीति मे देश व प्रदेश के राजनीतिक परिवारों की तरह एक ही परिवार व खानदान के लोगो द्वारा अलग अलग दलो मे राजनीति करने के साथ साथ एक दुसरे के आमने सामने अलग अलग चुनाव चिन्ह पर भाग्य अजमाने के अनेक उदाहरण सुने जाते रहे है। हाल ही मे सीकर जिले के जिलापरिषद चुनाव मे वार्ड-10 से उक्त गठाला परिवार की दो बहुओं ने कांग्रेस व भाजपा के चुनाव चिन्ह पर आमने सामने मुकाबला किया। जिसमे भाजपा उम्मीदवार के जीत का सहरा बंधा।
         रिस्ते मे सास इंदिरा गठाला व बहु सुनीता गठाला ने जिलापरिषद निदेशक का चुनाव भाजपा व कांग्रेस की टिकट पर मजबूती से अपने सिद्धांतों व राजनीतिक विचारों के बल पर लड़ा। जिसमे चाहे भाजपा जिलाध्यक्ष इंदिरा गठाला ने बाजी मारी हो पर सुनीता गठाला ने प्रदेश मे सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की जिलाध्यक्ष बनकर अब जाकर नहले पर दहला मार दिया है। इसी तरह पुलिस विभाग मे प्रदेश के सबसे बडे ओहदे डीजीपी पद पर रहे सगे भाई नमोनारायण मीणा व हरीश मीणा ने कांग्रेस व भाजपा के उम्मीदवार की हैसियत से 2014 मे दौसा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। जिसमे भाजपा उम्मीदवार हरीश मीणा ने बाजी मारी। फिर अब 2018 के विधानसभा चुनाव मे तत्तकालीन भाजपा सांसद हरीश मीणा ने कांग्रेस उम्मीदवार की हैसियत से देवली विधानसभा से चुनाव लड़ा। वर्तमान मे हरीश मीणा कांग्रेस के प्रदेश मे विधायक है। एवं उनके भाई नमोनारायण भी कांग्रेस मे रहकर राजनीति कर रहे है।
                      कुल मिलाकर यह है कि गठाला बहुओ व मीणा बंधुओं की तरह राज्य व जिला स्तर पर अनेक परिवार ऐसे होगे जो अपने राजनीतिक विचारों व वर्तमान राजनीतिक हालात की पहचान करने की कुशलता के बल पर राजनीति मे कदम बढा रहे होगे। उक्त तरह के राजनीतिक परिवारों से सबक लेकर मुस्लिम समुदाय के परिवारों को भी वोटबैंक की बजाय इस तरह की राजनीति मे कदम बढाने पर विचार करना चाहिये।



 

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