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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार मुस्लिम विरोधी रुख अपना कर क्या संदेश देना चाहते है? शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठे उर्दू टीचर शमशेर गांधी की पत्नी व महिला मदरसा पैराटीचर्स ने मुख्यमंत्री के काफिले को पीसीसी के सामने आज रोकने की कोशिश की।


        
                ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

               राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने वर्तमान टर्म मे  लगातार सोफ्ट हिन्दूत्व पर चलते हुये सत्ता मे हिस्सेदारी को लेकर मुस्लिम विरोधी रुख क्यो अपना रहे है। इसको लेकर प्रदेश का पुरा मुस्लिम समुदाय आश्चर्यचकित व हैरान होकर उनके उठते सियासी कदमो पर नजर गढाये हुये है। कांग्रेस द्वारा 2018 के आम विधानसभा चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र मे मदरसा पैराटीचर्स को नियमित करने का वादा करने के बावजूद अभी तक उन्हें नियमित नही करने से नाराज पैराटीचर्स अब नियमित करने की मांग को लेकर लगातार धरना -प्रदर्शन करने के साथ साथ पीछले पेतांलिस दिन से जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दे रहे है। धरने का नेतृत्व करने वाले उर्दू टीचर शमशेर भालू खां गांधी की पत्नी अख्तर बानो व कुछ महिला पैराटीचर्स ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय मे मुख्यमंत्री के प्रैस कांफ्रेंस करने आने के समय उनके काफिले को रोकने की कोशिश करने पहुंची। जिन्हें काफिला आने से पहले सीएम सुरक्षा व पुलिस वालो ने हटाने के बावजूद वो लगातार नारेबाजी करते हुये विरोध करती रही।
               मदरसा पैराटीचर्स को नियमित करने की मांग लेकर लम्बे समय से आंदोलित मदरसा पैराटीचर्स जयपुर के शहीद स्मारक पर दिन रात ठंड के बावजूद डटे हुये है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शमशेर गांधी ने अन्न व पानी त्याग रखा है। जिसके कारण उसकी सेहत लगातार गिरती जा रही है। पर प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह आंदोलनकारी किसानों से वार्ता नही की उसी तरह मोदी का अनुसरण करते हुये मुख्यमंत्री गहलोत स्वयंं ने इन आंदोलनकारियों से अबतक किसी भी रुप मे वार्ता नही की है। मुख्यमंत्री अपने वार्ता नही करने के अपने अड़यल रुख पर अब तक कायम है।
           दिसंबर-18 मे अशोक गहलोत द्वारा मुख्यमंत्री बनने के बाद बनाये मंत्रीमंडल मे एक मात्र मुस्लिम विधायक शाले मोहम्मद को मंत्री बनाकर उन्हें अल्पसंख्यक मामलात विभाग तक सिमित रखा। उसके बाद नवम्बर-21 मे मंत्रीमंडल विस्तार मे अन्य मुस्लिम विधायक जाहिदा खान को राज्य मंत्री बनाया है। गहलोत के 2018 मे मुख्यमंत्री बनने पर हाईकोर्ट मे सरकार की तरफ से पैरवी करने के लिये एक महाधिवक्ता व सोलह अतिरिक्त महाअधिवक्ता मनोनीत किये। जिनमे एक भी मुस्लिम एडवोकेट को मनोनीत नही किया। संविधानिक संस्थाओं मे अध्यक्ष व सदस्य पदो पर जमकर नियुक्तिया की पर उसमे भी मुस्लिम को प्रतिनिधित्व नही मिला। जयपुर जोधपुर व कोटा की नगर निगमो मे मुस्लिम पार्षद बडी तादाद मे जीतकर आने के बावजूद उन्हें एक जगह पर भी मेयर नही बनाया। राजस्थान लोकसेवा आयोग मे चैयरमैन व सदस्य मनोनीत किये पर उसमे भी मुस्लिम को प्रतिनिधित्व देने से कोसों दूर रखा। मुस्लिम सम्बंधित बोर्ड-निगम व विभिन्न आयोगों का गठन भी अभी तक नही किया गया है।
             कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा अपने वर्तमान टर्म मे मुस्लिम समुदाय को लगातार सत्ता मे किसी भी तरह की हिस्सेदारी देने की पहल नही करने के पीछे की असल वजुवात वो स्वयंं जाने। लेकिन आम मुस्लिम उनके उक्त व्यवहार से खासा नाराज व हैरान नजर आ रहा है। महीनो से जयपुर मे अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर शहीद स्मारक पर धरने पर बैठे महिला-पुरूष मदरसा पैराटीचर्स से अशोक गहलोत स्वयं अभी तक वार्ता करने को तैयार नही है। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी आंदोलनकारी किसानों से वार्ता को तैयार नही थे। शहीद स्मारक जयपुर पर आंदोलनकारी मदरसा पैराटीचर्स का नेतृत्व करने वाले उर्दू शिक्षक शमशेर गांधी के अन्न व पानी त्याग कर अनसन पर बैठे रहने से उनकी सेहत मे लगातार गिरावट देखी जा रही है। इसी सीलसीले मे आज अनसनकारी शमशेर गांधी की पत्नी पूरी तरह घरेलू माहोल मे रहने वाली अख्तर बानो ने जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यलय के बाहर प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश करते हुये अपनी महिला साथियों के साथ अचानक विरोध मे नारे लगाने से एक दफा अफरातफरी का माहोल हो गया। पीसीसी के सामने मोजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें धकेल कर पार्किंग की तरफ ले जाने की कोशिश करने के बावजूद वो मुख्यमंत्री व सरकार के खिलाफ लगातार नारे लगाती रही।



 

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