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शेखावाटी जनपद मे सत्ता की धूरी अब परिवहन मंत्री विजेंद्र ओला के ईर्दगिर्द घूमती नजर आने लगी। जनपद के राजनीतिक रुप से मजबूत ओला परिवार के विजेंद्र ओला सत्ता के नये केंद्र बनते नजर आने लगे।



                   ।अशफाक कायमखानी।
सीकर।

                जाट-मुस्लिम व दलित बहुल व देश को सबसे अधिक फौजी देने वाले शेखावाटी जनपद की देश-प्रदेश की राजनीति मे अधीकांश समय विशेष धमक रहने के बावजूद पीछले करीब दस साल से जो थमक धूंधली पड़ने लगी थी वो फिर से चाहे धीरे धीरे पर चमकने लगी है।
            अडानी-अम्बानी व टाटा को छोड़कर बाकी नामी उधोगपति बिड़ला-गोयनका-पोद्दार-बजाज-खेतान-तोदी सहित दर्जनो नामी गिरामियो की जन्म भुमि एवं तत्तकालीन लोकसभा अध्यक्ष व कृषि मंत्री बलराम जाखड़-तत्तकालीन पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल जैसे बाहरी नेताओं का कभी निर्वाचन क्षेत्र रहे शेखावाटी जनपद ने राजनीति मे खासा दबदबा रखने वाले नेता दिये है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के परिवार के निकास वाले धामोरा गावं व केन्द्रीय मंत्री रहे मरहूम दौलतराम सारण, मरहूम शीशराम ओला, सुभाष महरिया, महादेव सिंह, सहित अन्य केन्द्रीय मंत्री व वर्तमान राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी इसी भुमि मे पैदा हुये है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का ससूराल व पूर्व मुख्यमंत्री एवं उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत भी इसी भुमि की पैदाइश है।
                   हालांकि उपरोक्त सबकुछ होने के बावजूद सीकर-चूरु व झूझनू जिलो को मिलाकर कहलाने वाले शेखावाटी जनपद से केंद्र सरकार मे पीछले एक दशक से कोई महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व नही था। जबकि राज्य सरकार मे लक्ष्मनगढ से तीसरी दफा विधायक बने गोविंद डोटासरा व भंवरलाल मेघवाल वर्तमान गहलोत सरकार मे मंत्री बने थे। लेकिन मेघवाल के निधन के बाद डोटासरा के क्षेत्र से एक मात्र मंत्री होने के चलते उनकी तूती कुछ समय तक खूब बढचढकर बोली। पर इसी महीने राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार होने पर डोटासरा को मंत्रीमंडल से एक पद एक व्यक्ति के फारमूला के तहत हटना पड़ा ओर दिग्गज नेता रहे शीशराम ओला के पूत्र व झूंझुनू विधायक विजेंदर ओला का भाग्य चमका तो वो परिवहन व सड़क सुरक्षा जैसै महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री बन गये। साथ मे उदयपुर वाटी विधायक राजेन्द्र गुढा भी मंत्री बने है। षर उन्हें होमगार्ड जैसे कम महत्व का विभाग मिला है।
               किसी समय सत्ता का केंद्र रहे डोटासरा के घर उनके मंत्रीकाल के समय भीड़ जमा रहती थी। लेकिन उनके मंत्री हटने के बाद उनके पहली दफा सीकर अपने घर आने पर घर पर भीड़ के नाम पर चंद लोग भी नही जुट पाये। जबकि डोटासरा अपने सीकर निवास पर ठहरे थे। उसी दिन मंत्री बनने के बाद विजेंदर ओला पहली बार जयपुर से अपने निर्वाचन क्षेत्र झूझनू आये। जिनका जयपुर-सीकर व झूंझुनू जिलो मे जगह जगह भारी भीड़ द्वारा स्वागत होना देखा गया। वो अपने निर्वाचन क्षेत्र झूझनू तय समय से पांच घंटे देरी से पहुंचे। ओला का रास्ते मे दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के लगते हिस्सों पर जगह जगह भारी भीड़ द्वारा स्वागत हुवा। नवलगढ़ मे स्थानीय कांग्रेस विधायक व मुख्यमंत्री के सलाहकार राजकुमार शर्मा के समर्थकों की अनुपस्थिति के बावजूद ऐतिहासिक स्वागत होना उनके सत्ता की धूरी होने की तरफ इशारा करता है।
                             कुल मिलाकर यह है कि गहलोत सरकार मे शिक्षा मंत्री रहते गोविंद डोटासरा की जनपद मे एक तरफा तूती बोलती थी। तत्तकालीन समय मे उनके द्वारा शिक्षकों को कहे "नाथी का बाड़ा" काफी फेमस होने के साथ साथ उनके मंत्री पद से हटने के बाद उनकी दबंगाई व उनके इर्द गिर्द घूमने वालो लोगो मे कमी देखी जा रही है। वही परिवहन मंत्री ओला के जयपुर से झूंझुनू जाते समय जगह जगह हुये स्वागत मे भारी भीड़ के आने से लगता है कि जनपद मे अब सत्ता की धूरी उनके इर्द गिर्द घूमती नजर आयेंगी। ओला परिवार राजनीतिक रुप से जनपद मे काफी मजबूत माना जाता है। उनके पीता मरहूम शीशराम ओला अनेकों दफा विधायक व सांसद रहने के अलावा राज्य व केन्द्र सरकार की केबिनेट के सदस्य रहे थे। स्वयंं विजेंद्र ओला तिसरी दफा विधायक व दुसरी दफा मंत्री बने है। विधायक से पहले यह जिला प्रमुख भी रहे है। इनकी पत्नी राजबाला जिला प्रमुख रहने के अलावा कांग्रेस की टिकट पर झूंझुनू लोकसभा से चुनाव लड़ चुकी है।

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