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मुस्लिम समुदाय को अपने बच्चों को विभिन्न तरह के इंटीग्रेटेड व उच्च विशेष कोर्स करवाने पर भी विचार करना चाहिये।


                  ।अशफाक कायमखानी।
सीकर।

                  हालांकि शेक्षणिक तौर पर पीछड़े होने का दंश झेल रहे  मुस्लिम समुदाय मे अन्य क्षेत्रो के मुकाबले शेखावाटी जनपद मे पहल सेठ-साहुकारों द्वारा व फिर बिरादरी स्तर पर एवं अब खासतौर पर किसान बिरादरी द्वारा शैक्षणिक संस्थान  कायम होने से बेटे व बेटीयों का तालीमी प्रतिशत प्रदेश के अन्य क्षेत्रो से कुछ बेहतर हो सकता है। लेकिन उसे आज के हालात मे अन्य वतन भाइयों के मुकाबले संतोषजनक कतई नही कहा व माना जा सकता है। फिर भी कुछ स्टुडेंट खासतौर पर जाट बिरादरी के बच्चों के शेक्षणिक क्षेत्र मे बढते कदम का अनुसरण करते हुये सैंट्रल यूनिवर्सिटीज के विभिन्न क्षेत्र के इंटीग्रेटेड कोर्स व पोस्ट ग्रेजुएशन करने की कोशिश करने की तरफ कदम बढाने लगे है।
                   भारत व भारत के बाहर विभिन्न तरह के कोर्सेज करके लगातार स्टुडेंट्स अपनी शेक्षणिक योग्यताओं मे इजाफा करते रह सकते है। फिर भी जितना सम्भव हो उतनी शेक्षणिक योग्यताओं मे इजाफा जरूर करना चाहिये। सीनियर करने के बाद स्टूडेंट्स की विषयवार योग्यता व चाहत के अनुसार साधारण ग्रेजुएशन व साधारण शैक्षणिक संस्थान की बजाय विभिन्न तरह के सेंकड़ो लाईन के ग्रेजुएशन व इंटीग्रेटेड कोर्स (ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन) सेंट्रल यूनिवर्सिटीज या फिर नामी गिरामी शैक्षणिक संस्थानों से उनके प्रवेश पूर्व के विभिन्न तरह के टेस्ट क्लीयर करके करने पर विचार करना चाहिए।
                 आर्ट-वाणिज्य व विज्ञान संकाय से सीनियर करने वाले अधीकांश मुस्लिम बच्चे अवल तो आगे पढते नही है। अगर कुछ स्टुडेंट आगे पढते भी है तो वो साधारण रुपसे चलन मे आने वाले कोर्सेज स्थानीय साधारण शैक्षणिक संस्थानों से ग्रेजुएशन करके रह जाते है। फिर भी इन सब के विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कुछ स्टूडेंट्स ऐसे है जो उच्च स्तर की तालीम उच्च श्रेणी के तालीमी संस्थानों से पाने की तरफ बढने लगे है। उनके इस तरफ किये जा रहे संघर्ष व लगन से चाहे तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर विज्ञान संकाय से सीनियर पास करके एनआईटी NIT से ग्रेजुएशन करने वाले बच्चे अच्छी तादाद मे हो सकते है। उदाहरण के तौर शेखावाटी के एजुकेशन हब से जाने जाने वाले सीकर शहर से शायद मोहम्मद यूसुफ नामक लड़का शहर का एक मात्र स्टूडेंट होगा जिसने नामी आईआईटी IIT से इंटीग्रेटेड B.Tech-M.Tech करके अब वो KSA की नामी किंग सलमान यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने जा रहा है। इसका अमेरिका की नामी यूनिवर्सिटी मे भी पीएचडी के लिये सलेक्शन हो गया था। इसी तरह अक्सर स्टुडेंट B.Arch करके रुक जाते है। वो पोस्ट ग्रेजुएशन करने की तरफ बढने से कतराते रहते है। सीकर शहर के मोहम्मद खालिद जाटू नामक एक स्टुडेंट ने इसी साल B.Arch करने बाल टेस्ट क्लीयर करके दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (सेंट्रल यूनिवर्सिटी) मे पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिये M.Arch मे प्रवेश लिया है। इसी तरह सीकर शहर से मोहम्मद मुजाहिद ने अलग हटकर नेशनल फोरोन्सिक साईस यूनिवर्सिटी जैसी नामी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का प्रवेश पूर्व भारतीय स्तर का टेस्ट क्लीयर करके साईबर सेक्यूरिटी का इंटीग्रेटेड B.Tech-M.Tech कोर्स मे प्रवेश लिया है। यह सब मात्र कुछ उदाहरण हो सकते है लेकिन फिर भी इन्हें सकारात्मक संकेत मानते हुये अन्य स्टूडेंट्स को इस तरफ नजर दौड़ा कर आगामी सत्रो मे कोशिश करनी चाहिये।
               जिला व प्रदेश स्थित साधारण शैक्षणिक संस्थानों से मेडिकल, इंजीनियरिंग, ला, सहित विभिन्न तरह के सेंकड़ो ग्रेजुएशन कोर्स करते है ओर वही ग्रेजुएशन कोर्स सेंट्रल यूनिवर्सिटीज या फिर नामी शैक्षणिक संस्थानों से करने मे काफी अंतर अपने आप स्टूडेंट्स की बोडी लेंग्वेज व उसके जहन के खुले स्तर से पता लग जाता है। साथ ही उनके प्लेसमेंट या फिर उनके प्रति आने वाले पब्लिक व्यू से भी अंतर साफ झलकता नजर आयेगा।
               कुल मिलाकर यह है कि बच्चों की शैक्षणिक स्तर मजबूत बनाने के लिये अवल तौर पर शैक्षणिक संस्थान का चयन ठीक से करने व उसकी शैक्षणिक बुनियाद मजबूत करने की जिम्मेदारी उनके अभिभावकों की होती है। फिर दसवीं पास करने के बाद जूनियर मे संकाय चयन करने मे गहन मालुमात करके बच्चे की पसंद को वरीयता देते हुये प्रवेश दिलवाना चाहिए। सीनियर करने के बाद स्टूडेंट्स की संकाय के अनुसार ग्रेजुएशन करने के लिये उस फिल्ड के दक्ष लोगो से गहनता से मालूमात करके विभिन्न तरह की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज व नामी संस्थानों के प्रवेश पूर्व टेस्ट दिलवा कर बच्चों को वहा से पहले ग्रेजुएशन, इंटीग्रेटेड यूजी व पीजी साथ करने की कोशिश करनी चाहिए। फिर पीजी व रिसर्च करने की भी कोशिश करनी चाहिए।

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