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कायमखानी बिरादरी अब आपसी विवादों का निपटारा कर सामाजिक, आर्थिक व शेक्षणिक राहो पर प्रगति की तरफ बढेगा।


              ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

               मूलतः राजपूत बिरादरी के चोहान वंश के मोटेराव चोहान के पुत्रो द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनके वंशजों को राजस्थान मे कायमखानी बिरादरी के नाम से जाना व पहचाना जाता है। प्रमुख रुप से शेखावाटी-मारवाड़-मेवाड़ व बीकाणा क्षेत्र मे देहाती परिवेष मे रहने वाले कृषि के अलावा पुलिस व आर्मी की सेवा को अपनाकर जीवन यापन करने वाली उक्त कायमखानी बिरादरी को भी देश बंटवारा का दंश झेलना पड़ा। देश बंटवारे के बाद प्रदेश मे रहे कायमखानी कुछ सालो के बाद हालातो से उभर कर कौमी खिदमतगारो ने बिरादरी को फिर से ऊंचले पायदान पर ले जाने की नियत से "राजस्थान कायमखानी महासभा" नामक एक सामाजिक संस्था बनाकर बिरादरी को एक जाजम पर लाकर आगे बढाने के लिये अनेक शानदार व सफल कदम उठाये। शिक्षा के लिये अवल तौर पर जोधपुर-डीडवाना सहित कुछ जगह शहरो मे छात्रावास कायम किये। लेकिन महासभा के भादरा अधिवेशन मे कुछ लोगो मे  चुनाव प्रक्रिया को लेकर हुये आपसी मनमुटाव के बाद समाज मे दरार आने की शुरूआत हुई। जो दरार की खाई फतेहपुर व बिसाऊ अधिवेशन मे कम होने की बजाय ओर अधिक गहरी हुई और विवाद न्यायालय तक पहुंचा दिया गया। आखिर कार समाज के कुछ जागरूक लोगो द्वारा आपसी रजामंदी से इसी सप्ताह न्यायालय मे जारी उक्त विवाद का निपटारा करके एक कमेटी बनाकर अब जाकर फिर से नया सवेरा करने की शूरुआत करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है।
                 हालांकि विवाद के बावजूद बिरादरी का यह सोभाग्य रहा कि जोधपुर, डीडवाना, सीकर, झूंझुनू व चूरु सहित अन्य जगह कायम कायमखानी छात्रावास मे आवश्यक आधुनिक सुविधाओं का प्रसार व नये भवन निर्माण (विस्तार) के अलावा शेक्षणिक माहोल बनाने मे स्थानीय कमेटी व लोगो की मेहनत ने काफी कुछ करके दिखाया। चाहे तादाद मे कम लेकिन छात्रावास से बच्चे विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं मे सफल होते नजर आये। विवाद के मध्य आई कमजोरी के चलते बिरादरी के कुछ लोगो ने महासभा के नाम से मिलते जूलते नामो से संस्थाओं का गठन करके कुछ हित साधने की कोशिशें भी की पर उनको कौमी स्तर पर मान्यता नही मिलने से वो मात्र कागजी संगठन ही बनते नजर आये।
                      वर्तमान मे मध्यप्रदेश के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक खान व राजस्थान हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस भंवरु खां, आईजी पुलिस से सेवानिवृत्त मरहूम लियाकत अली खान व कुवंर सरवर खान, राजस्थान लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रहे आईपीएस हबीब खान गौरान, भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्तमान अधिकारी व श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर जाकीर हुसैन व सेवानिवृत्त अधिकारी अशफाक हुसैन  IAS के अलावा राज्य प्रशासनिक व पुलिस से सेवा के साथ साथ आर्मी के भी बडे अधिकारी वर्तमान मे है एवं रहे है। भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे अब्दुल रज्जाक खा भी इसी बिरादरी से तालूक रखते है। राजस्थान न्यायीक सेवा मे भी बिरादरी से तालूक रखने वाले अधिकारी रहे व वर्तमान मे सेवारत है।
            कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान कायमखानी महासभा के वर्तमान संयोजक कर्नल शोकत अली खान ने विवाद निपटारे के लिये कौमी सरदारों के साथ मिलकर भरसक प्रयास करके कामयाबी पाई है। उनके द्वारा बनाई गई इक्कीस सदस्यीय कमेटी अब महासभा को फिर से पटरी पर लाकर बिरादरी मे सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक व शेक्षणिक माहोल बनाकर प्रगति के रास्ते पर बिरादरी को चलाने के प्रयास करेगे।

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