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जयपुर। ।अशफाक कायमखानी। 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद सचिन पायलट पर अशोक गहलोत को तरजीह देते हुये गांधी परिवार ने उन्हें अपना वफादार साथी मानते हुये मुख्यमंत्री के पद पर पदस्थापित किया था। उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस की करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुये तत्तकालीन राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुये अध्यक्ष पद से स्तीफा दे दिया था। उस समय राहुल गांधी व अन्य गाधी परिवार के सदस्यों को उम्मीद थी कि राहुल गांधी के स्तीफे के तुरंत बाद कम से कम अशोक गहलोत भी उनके समर्थन मे स्तीफा देने का ऐहलान जरुर करेगे। पर गहलोत सहित किसी भी कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी के समर्थन मे उनके साथ स्तीफा देने का दिखावा तक नही किया था। उस घटना के बाद से गहलोत लगातार गांधी परिवार से दूर होते जा रहे है।
                 एक साल पहले मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा सचिन पायलट समर्थक विधायकों के गुडगांव की होटल मे डेरा डालने को लेकर उन्होंने पायलट को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की भरपूर कोशिशे की थी। पर प्रियंका गांधी द्वारा अंतिम समय मे एक पासा फेंकने से गहलोत की मंशानुसार पायलट कांग्रेस से बाहर नही हो पाये थे। पायलट उसके बाद से राजस्थान मे ही रहकर एक तरह से गहलोत की छाती पर मूंग दलते आ रहे है।
           जुलाई से घट रहे ताजा घटनाक्रम से यह लगता है कि दिल्ली स्थित कमजोर केन्द्रीय नेतृत्व को भलीभांति समझते हुये गहलोत उनकी परवाह किये वगैर अपनी बातो पर अड़े हुये है। हाल ही मे संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल, प्रभारी महामंत्री अजय माकन, मेनीफेस्टो कमेटी चेयरमैन साहू, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शैलजा के जयपुर आकर हाईकमान की मंशा से अवगत करवाने के बावजूद गहलोत अभी टस से मस नही हो रहे है। अब जाकर कल तेज तर्रार नेता कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार जयपुर आकर गहलोत से मिलकर एक बार हाईकमान की मंशा से उन्हें अवगत करवायेगे।
          गहलोत की जीद के चलते राजस्थान कांग्रेस की राजनीतिक उठापटक का अंत हाईकमान द्वारा लगातार नेताओं को भेजने के बावजूद अबतक नही होने से काग्रेस मे बैचेनी का  आलम है। गहलोत मोजूदा संकट सहित हर मुद्दे को हल करने के लिये सोनिया गांधी से बात करके करना चाहते है। जबकि बताते है कि सोनिया गांधी स्वयं गहलोत से बात ना करके नेताओं के स्तर पर मसले को सुलझाना चाहती है। राजनीतिक सूत्र बताते है कि सोनिया गांधी- प्रियंका गांधी व राहुल गांधी के मध्य अब एक ही राय बनी होती है। चाहे तीनो मे से कोई भी कोई राय प्रकट करे।
            राजनीति के जानकार बताते है कि उक्त वरिष्ठ नेताओं के जयपुर आकर गहलोत से मिलने के बाद आखिर मे कल गहलोत से मिलने कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार आ रहे है। उसके बाद अगर बात नही बनी तो हाईकमान कड़ा फैसला ले सकती है। हाईकमान किसी भी सूरत मे वर्तमान समय मे राजस्थान की सरकार गवाना नही चाहती है। जिसका फायदा उठाते हुये गहलोत दिल्ली के नेताओं को उंगलियों पर नचाने की कोशिश कर रहे है।
             कुल मिलाकर यह है कि केन्द्रीय नेतृत्व की तरफ से कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार गहलोत के पास कल केन्द्रीय दूत के तौर पर आखिरी नेता के तौर पर जयपुर आ रहे है। अगर बात नही बनी तो अगले दिन शिवकुमार  व पूर्व मे आये अन्य नेताओं की रिपोर्ट पर मंथन करके केन्द्रीय नेतृत्व कड़ा फैसला ले सकता है। जबकि वर्तमान राजनीतिक संकट का गहलोत अपने तरीके से हल निकालने के लिये अभी तक अड़े हुये है।

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