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यूआईटी की अवैध कालोनियों पर की गई कार्यवाही से जिले की कांग्रेस राजनीति मे हलचल बढीं।



              ।अशफाक कायमखानी।
सीकर।

                सीकर यूआईटी द्वारा विनायक कालेज के पास काटी जा रही एक अवैध कालोनी पर निर्मित मकान व प्लाटस के सीमांकन के पायो को तोड़ने के बाद लगातार तीन दिन तक झूंझुनू बाईपास के इर्दगिर्द ऊंची पहुंच रखने वाले कोलोनीनाईजर्स द्वारा बीना नियमन के काटी जा रही करीब छब्बीस कालोनियों पर यूआईटी द्वारा जेसीबी का पंजा व हथोड़ा चलाकर तोड़फोड़ करके कच्चे पक्के निर्माण के साथ साथ सीमेंट व डामर सड़क को खोदने से सीकर की कांग्रेस राजनीति मे हलचल बढ गई है।
               हालांकि सीकर मे नगरपरिषद व यूआईटी की अनदेखी या फिर अधिकारियों की मिलिभगत से अवैध कालोनियों का जाल पहले से लगातार अबतक बिछता रहा है। लेकिन कभी कभार ऊपरी दवाब या फिर लोकायुक्त एवं न्यायालय तक मामला जाने पर कार्यवाही करने पर यूआईटी व नगरपरिषद अधिकारियों को मजबूर होना पड़ता है। अक्सर यह भी देखने को मिलता रहा कि अधिकारियों द्वारा कालोनी को अवेध बताकर कार्यवाही करने के कुछ समय बाद फिर वोही कालोनी उसी रुप मे विकसित होती रहती है।
             सीकर नगरपरिषद व यूआईटी क्षेत्र मे कोलोनीनाईजर्स द्वारा बसाई जाने वाली वैध व अवैध कालोनियों के अतिरिक्त बहुमंजिले भवन/बाजार मे सामने दिखने वाले चेहरो के पीछे कुछ असरदार व शासन-प्रशासन मे ऊंची पहुंच रखने वाले राजनेता व उधोगपतियों का पैसा व मदद भी खासतौर पर रहती बताई जाती है। पीछले हफ्ते  कोलोनियो को बीना नियमन किये बसाने को अवैध बताकर उनपर यूआईटी द्वारा की गई कार्यवाही के बाद चर्चा आम है कि उनमे से कुछ कोलोनीनाईजर्स के पीछे वरिष्ठ राजनेताओं की मदद प्राय होना देखा जाता रहा है। फिर भी उन प्रभावशाली लोगो की कालोनी को अवैध बताकर कार्यवाही करने से भारी नुकसान होने से राजनीतिक रुप से अनेक सवाल खड़े हो गये है। शहर मे यह भी चर्चा है कि उक्त कालोनियों के खिलाफ कार्यवाही होने के बाद कुछ सोशियल एक्टिविस्टो ने यूआईटी व नगरपरिषद क्षेत्र मे बसी अवैध कालोनियों की डिटेल जमा करके लोकायुक्त, एसीबी व न्यायालय तक जाने की तैयारी कर रहे है।
            कुल मिलाकर यह है कि पिछले चार दिन मे युआईटी द्वारा करीब छब्बीस कालोनियों को बीना नियमन के बसाने को अवैध कालोनी बताकर उनके खिलाफ कार्यवाही करने के उन कालोनियों को नियमन करने की फाईल सम्बंधित विभाग मे भविष्य मे कितनी लगती है। एवं उनमे से कितनियो का नियमन होता है। या फिर वही ढाक के तीन पात परिणाम आते है। यह आगे देखना होगा। राजनीतिक हलचल बढने का परिणाम यूआईटी मे नये अधिकारी की तैनाती भी जल्द होने का संकेत है।

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