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अपनी तहजीब व शैक्षणिक लेवल को बचाये रखने के लिये उच्च श्रेणी के शेक्षणिक संस्थान कायम करने वाली राजपूत बिरादरी से कायमखानी बिरादरी को भी सीखना होगा।

 
             ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

                हालाकि उच्च श्रेणी के शेक्षणिक संस्थान कायम करके उनमे प्रवेश पाकर अपने आपको गोरान्वित महसूस करने के हर एक का सपना होने की हर एक के दिल मे ललक पैदा करने मे ईशाई बिरादरी का मुकाबला नही है। फिर भी राजस्थान मे खासतोर पर अजमेर, जयपुर व जोधपुर मे राजपूत राज परिवार द्वारा कायम कुछ शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा पाना हर एक का सपना होता है। उक्त जगह कायम संस्थानो मे राजपूती तहजीब का भी बडा ख्याल रखा जाता है।
                  जोधपुर मे सालो पहले राज परिवार द्वारा चोपासनी स्कूल व महारानी गायत्री देवी गलर्स स्कूल मे खासतौर पर पढने वाले लड़के व लड़कियों को राजपूती तहजीब मे आला दर्जे की शिक्षा दी जाती थी एवं दी जा रही है। जहां से निकले लड़के व लड़कियां शासन व प्रशासन के अंग होते है। इसी तरह राजपूत बिरादरी मे उच्च श्रेणी के साधन सम्पन्न परिवारों के बच्चों के लिये अजमेर मे मेव स्कूल कायम है। उसी मेव स्कूल के कारण आज बिरादरी मे एलाइट क्लास वजूद मे है। इसी तरह जयपुर की एमजीडी गलर्स कालेज का अपना एक मुकाम है। जोधपुर की चोपासनी व अजमेर के मेवो स्कूल अब कोलेज बन चुके है।
          राजपूत बिरादरी द्वारा अपनी तहजीब बचाये रखने के साथ साथ खुशनुमा माह़ोल मे आला दर्जे की शिक्षा बच्चों को देने के उदाहरण के तौर पर उक्त तरह से शेक्षणिक संस्थानो का हवाला दिया जाता है। अगर इसी तरह कायमखानी बिरादरी को सोचना चाहिये।
              कायमखानी बिरादरी अपना शैक्षिक स्तर ऊपर उठाने व अपनी तहजीब को बचाये रखने के लिये जोधपुर , जयपुर व सीकर को टारगेट करके आला दर्जे की स्कूल कायम करने एवं उसमे भी सबसे पहले एजुकेशन हब बन चुके सीकर मे अलग से गलर्स हास्टल कायम करके चाहे देर से सही पर कदय उठाया जा सकता है।लेकिन बहादुर कहलाने वाली कायमखानी बिरादरी की सामाजिक संस्था राजस्थान कायमखानी महासभा  के चुनाव के मसले को सुलझा नही पाये है। जो बिरादरी पहले देश की सीमाओं पर लड़ती थी वो आज घर मे आपस मे लड़ रह है। जिसके कारण पीछले बीस साल मे काफी नुकसान उठा चुकी है।
         कुल मिलाकर यह है कि बिरादरी के सेवानिवृत्त जस्टिस भंवरु खान, सेवानिवृत्त आईजी कुवंर सरवर खान, राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व चैयरमैन हबीब खा गौरान, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशफाक हुसैन , सेवानिवृत्त जिला जज मोहम्मद हनीफ व अगले साल सेवानिवृत्त होने वाले चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक खान व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जाकीर हुसैन जैसे कुछ अन्य सेवानिवृत्त अधिकारी एक जगह बैठकर इस दिशा मे चाहे तो बहुत कुछ कर सकते है।

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