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महिला वकील तरन्नुम का चालान करने के बाद शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी।

 



                ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर/कोटा।

                कोराना काल मे जारी लोकडाऊन मे बीना वजह घुमने वालो के चालान व वाहन जब्त करने की कार्यवाही राजस्थान पुलिस बडी तादाद मे करती रही है। लेकिन कभी कभी पुलिस अधिकारी अपनी अना के चलते भी जायज का कारण बताने के बावजूद भी किसी का चालान करते समय अनेक खामियां रख देती है। ऐसा ही एक मामला कोटा मे होने के बाद उसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग मे होने के बाद आयोग अध्यक्ष ने तथ्यात्मक रिपोर्टर मांगी गई है।
        कोटा के एडवोकेट अख्तर खान ने बताया कि कोटा अदालत परिसर से अपने घर लोट री एडवोकेट तरन्नुम अंसारी को कोटा छावनी ओवर ब्रिज के नीचे यातायात पुलिस द्वारा  रोक कर अभद्रता करके अनावश्यक आधा अधूरा चालान भर कर  पांच सो रूपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना लगाने वाले  यातायात पुलिस निरीक्षक राजेंद्र सिंह कविया के खिलाफ ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव एडवोकेट अख्तर खान अकेला की शिकायत पर राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने प्रसंज्ञान लेकर प्रकरण मामले में पुलिस अधीक्षक कोटा शहर से इस मामले में तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। प्रकरण की आगामी सुनवाई 18 जून नियत की गयी है।
            ह्यूमन रिलीफ सोसायटी के महासचिव ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ने अपनी शिकायत में कहा था कि एडवोकेट तरन्नुम अंसारी 26 मई को कोटा न्यायालय परिसर में आयोजित वेक्सीन शिविर की व्यवस्थाएं देख कर अचानक स्वास्थ्य खराब होने से अपने घर विज्ञाननगर वकील की युनिफोर्म मे स्कूटी से जा रही थी। वो हेलमेट लगाये हुये थी। तब रास्ते में छावनी फलाइओवर के नीचे खड़े यातायात पुलिस निरीक्षक राजेंद्र सिंह कविया ने उन्हें रोका ओर लोकडाउन में आने जाने का कारण पूंछा। जब वकील तरन्नुम अंसारी ने वजह बताई तो वोह गुस्से हो कर चालान काटने को  अड़ गए। वकील ने जब कहा कि वो अदालतत से आ रही है।,कोई लोकडाउन गाइड लाइन का उसने उलंग्घन नहीं किया है।एवं आवश्यक कार्य से ही बाहर निकली है।तो यह सुनकर राजेंद्र सिंह कविया और नाराज़ हुए , उन्होंने धमकाया के तुम्हारे खिलाफ राज कार्य में बाधा का मुक़दमा बना देंगे , चुपचाप चालान जमा कराओ। महिला वकील से पुलिसिया रॉब  बर्दाश्त नहीं होने पर वो भयभीत हो गई।, उन्होंने अपने एक वकील साथी जो पार्षद भी है से उनसे फोन मिलाकर बात भी करवाना चाही। तो पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह कविया जी ने बात तक करने से इंकार कर दिया।काटे गये चालान पर डर के मारे हस्ताक्षर किये और , वोह पांच सो रूपये देकर चालन जब मानंगे लगीं तो काफी हुज्जत के बाद यातायात निरीक्षक कोटा पुलिस ने उन्हें चालान दिया। चालान की कार्बन प्रति देख कर तरन्नुम को पता लगा कि उन्हें उलंग्घन मामले में आरोपित कर चालान बनाया है। हेलमेट नहीं लगाने की सफाई देने वाले ,कविया जी ने चालान पर कहीं हेलमेट नहीं लगाने का ज़िक्र नहीं किया। इतना ही नहीं चालान में एक्टिवा गाडी होने पर भी मोटर साइकल की शार्ट फॉर्म , एम सी लिखा गया। जबकि तरन्नुम के पास एक्टिवा थी। चालान मे पांच सो रूपये लेने और कम्पाउंडिंग परफोर्मे में  प्रभारी यातायात निरीक्षक कोटा पुलिस की  मुहर तो लगी है लेकिन हस्ताक्षर नहीं है। इसके अतिरिक्त चालान में ओर भी कई कमियां होना एडवोकेट अख्तर ने बताया।
          एडवोकेट अख्तर के मुताबिक यह सबकुछ कारण साबित करते है कि चालान गुस्से व हुज्जत में सिर्फ चालान बनाने के लिए बेपरवाही से बनाया गया है। इसीलिए इतनी कमियां व गलतियां चालान में रह गयी है।
             इस मामले में पुलिस अधीक्षक कोटा से जब वकील शिष्ट मडंल मिला तो वकीलों का लोकडाउन मे आते जाते वक़्त रोकने पर वकीलों का आई कार्ड बताने पर उन्हें छूट देने का आदेश पुलिस अधीक्षक ने सभी थानाधिकारियों को जारी किया। वकील तरन्नुम अंसारी के साथ यातायात पुलिस की इस कार्यवाही की शिकायत महासचिव ह्यूमन रिलीफ सोसायटी एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने 27 मई को राजस्थान मानवाधिकार आयोग में की थी। राजस्थान मानवाधिकार आयोग के चेयरमेन जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने 28 मई को इस  शिकायत पर विचार किया। आयोग के चेयरमेन ने इस शिकायत के तथ्य साथ में संलग्न चालान के अवलोकन के बाद  प्रकरण को गंभीर मानते हुए इस मामले में कोटा पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। आयोग में परिवाद संख्या 2021 /24 /2300 दर्ज कर प्रकरण में आगामी सुनवाई 18 जून की पेशी नियत की है। रिपोर्ट की एक प्रति शिकायत कर्ता महासचिव ह्यूमन रिलीफ सोसायटी एडवोकेट अख्तर खान अकेला को भी प्रेषित की गयी है

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