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कोविड से माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिये सीएलसी के निदेशक इंजीनियर श्रवण चोधरी द्वारा मुफ्त शिक्षा के साथ रहना व खाना देने की पहल की चारो तरफ प्रशंसा हो रही है।



               ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

              आज के आर्थिक युग मे रिस्तो को दरकिनार करके भयभित करने वाले युग एवं पैसो को भगवान तो नही पर भगवान से भी कम नही मानने के कलयुग मे नामी कोचिंग संस्थान सीएलसी के निदेशक श्रवण चौधरी ने अवाम के मनो की सभी तरह की भ्रांतियों को तोड़ते हुये कोविड-19 से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिये अपनी स्कूल व कोचिंग संस्थान के दरवाजे खोलकर इच्छुक विधार्थियों को मुफ्त शिक्षा जबतक वो चाहे तबतक उपलब्ध करवाने का ऐहलान किया है। इस ऐलान की चारो तरफ प्रशंसा होने के साथ साथ कोविड से माता पिता खोने वाले बच्चों के जीवन मे आये अंधेरे मे चौधरी ने दिया जलाकर रोशनी करके उनकी राह हमवार करने की कोशिश की है।
           हमेशा निर्धन, होशियार व मेहनती विधार्थियों पर अपने बेटो से अधिक मेहनत करके उनमे निखार लाकर उनके जीवन को नैतिकता के साथ सकारात्मक दिशा मे मोड़कर उनका जीवन सफल करने मे काफी हद तक सफल रहे सीएलसी निदेशक श्रवण चोधरी के कदम हमेशा दुख व विपदा की घड़ी मे सहरायनीय रहे है।
              सीएलसी निदेशक इंजीनियर श्रवण चौधरी ने अपने वीडियो संदेश मे कहा है कि कोविड-19 के प्रकोप से अपने माता पिता को खोने वाले बच्चों की मदद के लिये सरकार, समाज व आमजन साथ खडे है। पर वो भी एक इंसान है इस दुख का अहसास वो भी भलीभांति करते है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा राजस्थान बोर्ड व सीबीएसई बोर्ड की चलाई जाने वाली स्कूल व नीट-जेईई की कोचिंग के लिये संचालित सीएलसी कोचिंग संस्थान मे कोविड-19 से माता पिता को खोने वाले बच्चे जबतक चाहे उपलब्ध सुविधा के मुताबिक निशुल्क पढ सकते है।
           कुल मिलाकर यह है राजस्थान का काफी पुराना व सीकर का पहला एवं शिर्षतम कोचिंग संस्थान सीएलसी मे प्रवेश पाकर नीट व जेईई की कोचिंग लेना अपने आपमे कामयाबी की गारंटी माना जाता है। इस कोराना काल मे इंजीनियर श्रवण चौधरी द्वारा कोविड महामारी से माता पिता को खोने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का ऐहलान करना काफी प्रशंसनीय कदम माना जा रहा है।

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