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कोराना की दूसरी लहर ने शेखावाटी जनपद की जाट व कायमखानी बिरादरी को भी पहली दफा अधिक मात्रा मे चपेट मे लिया। पर कोराना के भयंकर प्रकोप मे जाट व कायमखानी बिरादरी के युवाओं ने जगह जगह जरुरतमंदों को आक्सीजन व प्लाज्मा एवं अन्य चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवा कर बडी जनहानि से क्षेत्र को बचाया भी है।



                    ।अशफाक कायमखानी।
सीकर।

                 भारत भर मे कोराना की दूसरी लहर के समय ढहाते प्रकोप के शहरो के साथ गावों को भी अपनी चपेट मे लेने का असर शेखावाटी जनपद व लगते नागौर जिले के डीडवाना व लाडनू उपखंड मे भी नजदीक से देखने व अहसास करने को मिला। जिस क्षेत्र मे पहली लहर के मुकाबले दुसरी लहर मे खासतोर पर देहातो मे रहने वाली देशी खाद्य को खुराक मे शामिल करने वाली मजबूत इम्यूनिटी पावर वाली जाट व मुस्लिम कायमखानी बिरादरी को भी बडी मात्रा मे प्रभावित किया है।
                उक्त क्षेत्र के अधीकांश गावो मे रहने वाली  जाट व कायमखानी बिरादरी मे कोविड का संक्रमण बढने के अनेक कारण हो सकते है। लेकिन उनमे से एक प्रमुख कारण जनवरी-फरवरी व मार्च महीने मे इन बिरादरियों मे शादियों का सीलसीला काफी चला। सरकारी पाबंदियो के बावजूद स्थानीय जिम्मेदार सरकारी लोगो की उदासीनता के चलते शादियों मे कोराना काल के पहले होने वाली शादियों की तरह ही भीड़ जमा की गई।सरकारी कोविड गाइडलाइंस के आदेश के अनुसार अधीकतम पचास लोगो की उपस्थिति का ख्याल उक्त शादियों मे कम रखा जाना ही मुसीबत बना। उक्त अवसरो पर भीड़ जमा होने से कोराना वायरस का आदान प्रदान आसानी से हुवा। फरवरी व मार्च मे गावों मे अधिक उम्र के लोगो की मृत्यु भी हुई। लेकिन सबने उन मौतो को साधारण व दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मोते माना। उस समय कोराना जांच का चलन एक तरह से काफी ठंडा पड़ चुका था। जो लोग विदेश जा रहे थे या जिनको आवश्यक था वोही कोराना टेस्ट उस समय करवा रहे थे।
                हालांकि जाट व कायमखानी बिरादरी के अलावा अन्य बिरादरी के लोग भी कोराना की दुसरी लहर से संक्रमित हुये है। लेकिन मेने उक्त दोनो बिरादरी पर काफी नजदीकी से नजर रखी व अधिक टच मे रहा। इस कोराना के प्रकोप मे उक्त जाट व कायमखानी बिरादरी के युवाओं द्वारा कोराना की चपेट मे आने से बेखौफ होकर संक्रमित जरुरतमंदो को अस्पताल मे भर्ती करना, जगह जगह आक्सीजन व प्लाजमा उपलब्ध करवाना, अन्य चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के अलावा उचित सलाह देने के अतिरिक्त कोराना केयर सेंटर कायम करना या कायम करने मे मदद करना। सरकारी संस्थान मे प्रशासन द्वारा स्थापित किये जा रहे आक्सीजन प्लांट मे आर्थिक मदद करना व करवाना जैसे अनेक सेवा के काम जीतनी शिद्दत व मेहनत के साथ किये है उसी के परिणाम को आज कोराना कमजोर पड़ने के रुप मे हम देख रहे है।
            कुल मिलाकर यह है कि जाट व कायमखानी बिरादरी के युवाओं ने अप्रेल व मई माह के मध्य तक कोराना के भंयकर रुप से जारी प्रकोप मे खिदमत ए खल्क का जो तन मन व धन लगाकर रुप पैश किया है। उसकी जितनी तारीफ की जाये वो बहुत कम हांकी जायेगी। इसी तरह राजनीतिक तौर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया, दांतारामगढ़ विधायक विरेन्द्र सिंह व सुधीर महरिया संस्थान के पूर्व विधायक नंद किशोर महरिया के अतिरिक्त फतेहपुर विधायक हाकम अली खान व पूर्व मंत्री यूनुस खान ने जिस तरह से प्रभावित व संक्रमित लोगो की अस्पताल मे बेड दिलवाने, आक्सीजन व अन्य चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने, संक्रमित व प्रभावित लोगो का मनोबल बढाये रखने एवं चुपचाप आर्थिक मदद व अंश दान करने का जो प्रभावी कार्य अंजाम दिया है, उसकी जितनी सहरायना की जाये वो कम होगी। ऐसे जन नेताओं का दूख व मुसीबत की घड़ी मे जनतंत्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर तन मन व धन लगाकर कोराना को मात देने का माध्यम बनने को इतिहास मे याद किया जायेगा।

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