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कोराना कुछ परिवारों पर भंयकर कहर ढा रहा है। एक एक परिवार व खानदान के छ-सात लोगो को भी लील गया है।


                  ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

               पहली लहर के मुकाबले कोराना की दूसरी लहर मे गैर सरकारी तौर पर मौतो के आंकड़ो पर नजर डाले तो सदी की सबसे अधिक कहर ढाने वाली महामारी साबित हो रही है। जिसके कारण चारो तरफ भय का माहोल व्याप्त है। एक ही परिवार मे एक से अधिक मोत होने से उस परिवार पर दुखो का पहाड़ टूटते देख अन्य परिवार भी सहमे हुये साफ देखे जा रहे है।
              कोराना काल मे ऐसे गावं भी है जिनमे से एक एक गावं मे 25-35 तक लोगो की मौत हो चुकी है। तो ऐसा परिवार भी है जिनमे छ मोते हो चुकी है। वहीं ऐसा परिवार भी है कि जिसके एक भाई की ओरत व अन्य दो भाइयो के सास ससूर कोराना से संक्रमित होकर जान गवां चुके है। यानि कुछ परिवारों पर तो दुखो के पहाड़ इस तरह टूटा एवं टूट रहा है कि उनको अपनो को भूलाने मे सालो लग जायेगे। कुछ बच्चे मां-बाप को खोकर अनाथ हो चुके है।
               अन्य देशो के मुकाबले भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के बूरे हाल का प्रभाव सभी जगह वर्तमान मे देखने को मिल रहा है। वर्तमान समय मे यहां कोराना वायरस से कम व समय पर इलाज नही मिलने से अधिक मोते हुई है। भारत मे चिकित्सा सुविधा के नाम पर लोग दो तिहाई निजी क्षेत्रो पर निर्भर है। जहां इलाज बहुत महंगा व आम आदमी की पहुंच से काफी दूर है। आंकड़े अनुसार भारत मे एक लाख लोगो पर मात्र पचास बेड उपलब्ध है कि जबकि अमेरिका मे यह संख्या 290 बेड है। इसी तरह भारत मे एक लाग लोगो पर मात्र 90 चिकित्सक है वही अमेरिका मे यही संख्या 260 है।
                   कुल मिलाकर यह है कि वर्तमान कोराना की दूसरी लहर से संक्रमित होकर मरने वालो मे सरकारी व गैर सरकारी आंकड़ों मे काफी अंतर इसलिए भी हो सकता है कि काफी लोग अस्पताल तक पहुंचे ही नही ओर उनकी मौत हो
गई। जो अस्पताल पहुंचे उनको समय पर ठीक से इलाज मिला नही। जो समय पर अस्पताल पहुंचे उनको समय पर इलाज मिला उनमे से अधिक लोग रिकवर भी हुये है। फिर भी देखने मे मिला है कि निजी क्षेत्र के अस्पतालों के मुकाबले सरकारी अस्पतालों मे मरीज अधिक पहुंचे ओर उनमे से अच्छी खासी मात्रा मे मरीज रिकवर होकर घर आये है। सरकारी अस्पताल मे एक तरह से निशुल्क व ट्रेंड चिकित्सा कर्मियों के हाथो इलाज होने से परिणाम अच्छे आये व आ रहे है। जबकि निजी क्षेत्र के अस्पतालों मे कोरान का इलाज काफी महंगा व स्टाफ सरकारी अस्पताल के मुकाबले ट्रेंड कम ही है। इस कोराना काल की विभिषिका मे कम पड़ती सरकारी चिकित्सा सुविधाओं को सदियो तक याद किया जायेगा।

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