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जोधपुर जेल ब्रेक की फिल्मी कहानी:16 कैदियों को भगाने वाले 4 किरदार; दो गार्डों ने अफसरों के आने से पहले अपने कपड़े फाड़े, महिला पुलिसकर्मी ने घायल होने का नाटक किया

               ।अशफाक कायमखानी।

जोधपुर (राजस्थान)।
                        जिले की फलोदी जेल से कैदियों को भगाने में सुरक्षा प्रहरियों की मिलीभगत इस फोटो से ही उजागर हो रही है। दो ने अपने कपड़े खुद ही फाड़ लिए।

जोधपुर के फलोदी जेल से सोमवार शाम को महिला सिपाही की आंख में मिर्च झोंककर 16 कैदी फरार हो गए। शुरुआती जांच में मंगलवार को कैदियों के भागने या भगाने के राज से पर्दा उठ गया। इसमें चार पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। ये 4 किरदार कैदियों को जेल से बाहर निकालने की पूरी साजिश में शामिल हैं। शुरुआती जांच के बाद इन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

यह पूरी घटना एक फिल्म की कहानी जैसी है। घटना के तुरंत बाद सिपाही मदनपाल और राजेंद्र गोदारा चोटिल महिला सिपाही के पास खड़े थे। तब दोनों के कपड़े सही थे। लेकिन आधे घंटे बाद जब ये दोनों अफसरों को बयान दे रहे थे, तब इनके कपड़े फटे थे।

इन्होंने कैदियों के साथ धक्का-मुक्की होने की बात कही, जबकि तुरंत बाद की तस्वीरों से स्पष्ट था कि कैदियों को रोकने का दोनों ने कोई प्रयास नहीं किया। बाद में दोनों ने अपनी वर्दी व ड्रेस खुद फाड़कर यह दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने कैदियों को भागने से रोकने के लिए बहुत प्रयास किया। इसके बाद सभी चारों सुरक्षा गार्ड संदेह के घेरे में आ गए।

महिला पुलिसकर्मी ने बढ़ा-चढ़ाकर बताई कहानी
कैदियों के भागने के बाद महिला गार्ड मधु ने काफी बढ़ा-चढ़ा कर दर्शाया कि भागते समय कैदियों को उसने रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कैदियों ने उसे उठाकर फेंक दिया। इससे वह चोटिल भी हुई, लेकिन खुद की परवाह किए बगैर उसने भरसक प्रयास किया। घटना के तुरंत बाद उसे अपने चोटिल होने के साथ तबीयत बिगड़ने की जोरदार एक्टिंग भी की, लेकिन पूछताछ में उसकी पोल खुल गई। जेल के कार्यवाहक जेलर नवीबक्स, गार्ड सुनील कुमार, मदनपाल सिंह और मधु देवी को सस्पेंड कर दिया गया है।

16 कैदियों के भागने का CCTV फुटेज: सभी कैदी दौड़ते हुए जेल से निकले और स्कॉर्पियो में बैठकर भाग गए

अंदर का गेट खोला, बाहर के गेट पर नहीं था ताला
जेल के दो गेट हैं। बंदियों को बैरकों में डालने व निकालने के वक्त दोनों में से एक पर ताला होना चाहिए, लेकिन सोमवार को घटना के वक्त बाहरी गेट पर ताला नहीं था और अंदर का गेट वैसे ही खोला गया था। ऐसे में बंदियों के सामने न दीवार फांदने की नौबत आई और न ही कोई हथियार चलाने की। कचहरी परिसर में उप कारागृह सिर्फ विचाराधीन बंदियों को रखने के लिए है। 40 गुणा 60 फीट के एरिया में ही यह जेल बनी हुई। यहीं SDM कोर्ट है। इतनी छोटी सी जगह में तीन बैरक हैं। साथ ही जेल का ऑफिस व कर्मचारियों के रहने के क्वार्टर हैं।

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