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राजस्थान विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीति का पारा चढने लगा। - कांग्रेस के लिये अनुसूचित जाति-जनजाति व अल्पसंख्यक मतदाताओं की नाराजगी व उदासीनता को दूर करने की चैलेंज।


            ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

            राजस्थान की सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के नेताओं के अंदरूनी तौर व वर्चस्व की जारी जंग के मध्य आखिर कार चुनाव आयोग ने राजस्थान की रिक्त चार सीट मे से बल्लबनगर की सीट को छोड़कर बाकी तीन सीटो पर उपचुनाव कराने की घोषणा करने के साथ ही राजनीति का पारा चढने लगा है। घोषणा के अनुसार 17 अप्रैल को मतदान होगा। जिसके लिये 23 मार्च से नामांकन भरे जा सकेंगे एवं नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि 30 मार्च होगी।नामांकन की संवीक्षा 31 मार्च तक व 3 अप्रैल तक नाम वापसी हो सकेगी। दो मई को मतगणना के बाद परिणाम जारी होगे।
                   कांग्रेस के पूर्व मंत्री रमेश मीणा सहित विधायक मुरारी मीणा व वैद प्रकाश सोलंकी ने अपनी ही प्रदेश सरकार पर अनुसूचित जाति व जनजाति सहित अल्पसंख्यक विधायकों व मतदाताओं की उपेक्षा करने का आरोप विधानसभा के अंदर व बाहर लगाते हुये कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने का समय मांग कर राजनीति को गरमा कर मुख्यमंत्री गहलोत के सामने गम्भीर सवाल खड़ा कर दिया है। 8-मार्च को पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने अपने जन्म दिन पर भरतपुर मे वर्तमान व पूर्व विधायक व सांसदों सहित अनेक नेताओं को जमा करके अपनी ताकत अलग से दिखाते हुये अपने पार्टी नेतृत्व पर दवाब डालने की कोशिश करके पार्टी के नेतृत्व को लेकर जारी जंग को खुलेआम उजागर कर दिया है।
             कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी के निधन से खाली हुई सीट सहाड़ा, कांग्रेस विधायक भंवरलाल मेघवाल के निधन से सुजानगढ़ व भाजपा विधायक किरण महेश्वरी के निधन से खाली हुई राजसमन्द सीट पर उपचुनाव हो रहे है। जिनपर भाजपा व कांग्रेस मे कड़ा मुकाबला होने की पूरी पूरी सम्भावना है। वही सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा सहित कुछ अन्य दल अपने अपने उम्मीदवार खड़े करके चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस व भाजपा जैसे दोनो ही दलो को अपने नेताओं से ज्यादा खिलाफ वाले दल के असंतुष्ट नेताओं द्वारा अंदर खाने की जाने वाली मदद पर अधिक भरोसा लगता है। कांग्रेस मे गहलोत व पायलट एवं भाजपा मे वसुंधरा राजे व अन्य नेताओं वाले धड़े मे वर्चस्व को लेकर जारी जग मे अपने ही दल के नेता के घुटने टिकानै की रणनीति पर पर्दे के पीछे अपनाने की सफलता पर उपचुनाव का परिणाम निर्भर करेगा।
          फोन टेपिंग को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत के त्याग पत्र की मांग को लेकर भाजपा हमलावर है। वही कांग्रेस के अनेक विधायक भी गहलोत पर उनकी सरकार चलाने की नीतियों को लेकर अनुसूचित जाति , जनजाति व अल्पसंख्यक विधायक उनपे जोरदार हमलावर है। दुसरी तरफ वोटबैंक माने जाना वाले मुस्लिम मतदाताओं का युवा तबका भी वादाखिलाफी को लेकर गहलोत व उनकी सरकार से सख्त नाराज चल रहा है। यह तबका उक्त उपचुनाव के बहाने गहलोत को सबक सीखना चाहता बताते है।
            कुल मिलाकर यह है कि होने वाले तीन विधानसभा उपचुनाव मे कांग्रेस की तरफ से खड़े होने वाले उम्मीदवार लगभग मृतकों के बेटे भाई व पुराने उम्मीदवार ही तय बताते है। वही भाजपा के उम्मीदवार राजे के मर्जी के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पसंद से तय होना बताया जा रहा है। चुनाव मे भाजपा व कांग्रेस मे कड़ा मुकाबला होगा। भाजपा अपनी सीट राजसमन्द व कांग्रेस अपनी सुजानगढ़ व सहाड़ा सीट को बचाने के लिये भरपूर कोशिश तो करेगी, पर जनता परिणाम बदल सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी किसान आंदोलन का असर पड़ा तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। वरना कांग्रेस के अंदरुनी झगड़े का असर अधिक पड़ा तो भाजपा अपनी लाज बचाने मे कामयाब हो सकती है।

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