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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नीतियों के खिलाफ मुस्लिम नेता जयपुर मे जमा हुये! कांग्रेस के ग्रूप-23 नेताओं के लेटरबम का अपवर्तन नजर आया उक्त आयोजित बैठक मे। - अनुसूचित जाति-जनजाति व जाट नेताओं के बाद मुस्लिम नेताओं का जमा होगा गहलोत की मुश्किलें बढा सकता है।

 


                ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

                मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राजस्थान सरकार के कामकाज के सेकुलर कांग्रेस के तरीकों के बजाय शुरुआत से जारी सोफ्ट हिन्दुत्व के ऐजेण्डे पर चलाने के तहत मुस्लिम समुदाय को प्रदेश मे राजनीतिक तौर पर अलग थलग करने व उनके प्रभाव को शुन्यता की तरफ धकेल कर उनमे अहसास ऐ कमतरी का अहसास करने की चाले चलने से नाराज मुस्लिम समुदाय के एक नेता ने राजस्थान के चुने गये मुस्लिम सभापति व चैयरमैन के इस्तकबाल करने के बहाने अपने निवास पर बैठक करने से राजस्थान की मुस्लिम राजनीति नई करवट ले सकती है। बताते है कि उक्त बैठक मे निकाय चेयरमैन की हेसियत से मात्र हनुमानगढ़ जिले की भादरा नगरपालिका के चैयरमैन दाऊद कुरेशी व आसिफ खान ने ही शिरकत की।
            कांग्रेस नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की विशेष उपस्थिती मे पूर्व मंत्री दूर्रु मियां के जयपुर आवास लुहारू हाऊस मे आयोजित बैठक के करीब पांच घंटे चलने के उपरांत कफी मुद्दों के अलावा राजस्थान मे मुस्लिम समुदाय की सरकार मे भागीदारी के मुद्दे पर भी काफी गम्भीरता के साथ विचार विमर्श हुवा बताते। अधीकांश लोगो ने गहलोत सरकार द्वारा सोची समझी रणनीति के तहत मुस्लिम समुदाय को दरकिनार करना माना।
            हालांकि प्रदेश मे कांग्रेस सरकार गठित करवाने मे मुस्लिम समुदाय द्वारा महत्ती भूमिका निभाने के बावजूद सत्ता मे जो हिस्सेदारी उन्हें मिलनी चाहिये थी वो भागीदारी उन्हें नही मिलने से समुदाय मे आक्रोश व्यापक स्तर पर देखा जा रहा है। शुरुआत मे मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा गठित मंत्रीमंडल मे मात्र एक मुस्लिम विधायक शाले मोहम्मद को शामिल करके उसको मुख्यधारा का विभाग देने की बजाय अल्पसंख्यक मंत्रालय देकर उनका आकार सिमित करके अल्पसंख्यक समुदाय को आयना दिखाया। उसके बाद एक महाधिवक्ता व सोलह अतिरिक्त महाअधिवक्ताओ का मनोनयन किया जिसमे एक भी मुस्लिम वकील को शामिल नही किया। राजस्थान लोकसेवा आयोग मे गहलोत ने अध्यक्ष व चार सदस्य मनोनीत किये जिनमे भी एक भी मुस्लिम को मनोनीत नही किया। गहलोत ने इसके अतिरिक्त सुचना आयोग, मानवाधिकार आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, लोकायुक्त जैसे अनेक संवैधानिक पदो पर चैयरमैनो की नियुक्तिया भी की है। जिनसे मुस्लिम समुदाय को प्रतिनिधित्व से पूरी तरह दूर रखा है। गहलोत सरकार का गठन होने को ढाई साल होने को है लेकिन अल्पसंख्यकों के सम्बन्धित, मदरसा बोर्ड, वक्फ बोर्ड, उर्दू ऐकेडमी, अल्पसंख्यक आयोग, मेवात विकास बोर्ड, अल्पसंख्यक वित्त कारपोरेशन, वक्फ विकास एवं वित्त निगम सहित अनेक गठन से वंचित चल रहे है। जिला स्तर पर गठित होने वाली अल्पसंख्यक उत्थान सम्बंधित 15-सूत्री कार्यक्रम समिति मे मनोनयन नही हो पाया है। कांग्रेस के घोषणा पत्र मे किये वादे के बावजूद  उर्दू व मदरसा पैराटीचर्स के स्थाईकरण करने सम्बंधित मांगे जस की तस पड़ी है।
                पूर्व मंत्री दूर्रु मियां के घर आयोजित अल्पसंख्यक नेताओं की बैठक मे खुलकर गहलोत सरकार की नितियों व कांग्रेस मे आ रहे बदलाव पर खुलकर चर्चा होने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत से अल्पसंख्यक नेताओं ने सलमान खुर्शीद के नेतृत्व मे उनसे मिलने का समय मांगने के बावजूद मिलने का समय नही मिला तो मुख्यमंत्री से बीना मिले पांच घंटे चली बैठक को निरासा के भाव के साथ समाप्त करना पड़ा। सूत्र बताते है कि उक्त नेता अब दिल्ली मे राहुल गांधी, सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी से मिलकर अपनी बात रखने की कोशिश करेगे।
            आयोजित बैठक मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री व दिल्ली से आये कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, पूर्व मंत्री दूर्रु मियां, पूर्व सांसद अश्क अली टांक, राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष आबिद कागजी, विधायक रफीक खान, विधायक आमीन कागजी, विधायक हाकम अली, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर, पूर्व विधायक अब्दुल कय्यूम, पूर्व विधायक मकबूल मण्डेलीया, पूर्व विधायक अलाऊद्दीन आजाद, पूर्व मंत्री हमीदा बेगम, पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान, पूर्व प्रदेश कांग्रेस महासचिव शब्बीर खान भादरा, पूर्व मंत्री दर्जा प्राप्त अब्दुल गफूर चोहटन, प्रधान शम्मा खान, सूरसागर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे प्रोफेसर अय्यूब, मारवाड़ सोसायटी के अतीक अहमद जोधपुर, मिल्ली कोंसिल राजस्थान के अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम अख्तर, शब्बीर कारपेट, लतीफ आरको व सरवाड़ दरगाह के मुतवल्ली यूसुफ , पूर्व प्रदेश सचिव शरीफ खान, रिटायर्ड मुख्य सचिव सलाऊद्दीन अहमद खान सहित अनेक लोग शामिल थे।
                 कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान विधानसभा मे सीनियर जाट नेता व पूर्व मंत्री हेमाराम चोधरी व विजेंदर ओला ने सरकार पर गम्भीर आरोप जड़े। वही पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने भी विधानसभा मे सिटिंग अरेजमेंट मे खासतौर पर अनुसूचित जाति व जनजाति एवं अल्पसंख्यक विधायकों को बीना माईक वाली सीटो पर बैठाने का मुद्दा उठाया। तो विधायक मुरारी मीणा व वेदप्रकाश सोलंकी ने रमेश मीणा की बात का समर्थन किया था। इस तरह अनुसूचित जाति व जनजाति के अलावा जाट विधायकों द्वारा गहलोत को घेराने के बाद अब मुस्लिम विधायकों व नेताओं द्वारा बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत की मुश्किलें अगले कुछ दिनो मे बढ सकती है।


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