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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान की तस्वीर बदल रहे है या फिर अपने चहतो को पुरुस्कृत करने मे लगे है?


जयपुर।
             हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं मूल पीछड़ा वर्ग की माली बिरादरी से आते है। एवं उन्होने अब राजस्थान के प्रमुख ओहदो व संस्थाओं के प्रमुख पदो पर दलित व पीछड़े वर्ग के लोगो को बैठाकर एक नया संदेश देते हुये राजस्थान की तस्वीर बदलने की तरफ कदम बढाते साफ नजर आ रहे है। या फिर अपने मुख्यमंत्री काल मे अपनो को पुरुस्कृत करने मे लगे है।
               वैसे तो प्रमुख पदो पर किस को पदस्थापित किया जाये या मुख्यमंत्री के अपने विवेक पर निर्भर करने के साथ उनका अधिकार होता है। लेकिन दस सीनीयर ब्यूरोक्रेट्स की वरिष्ठता को लांघ कर प्रदेश के इतिहास मे पहली दफा किसी अनुसूचित जाति के अधिकारी निरंजन आर्य को राज्य का मुख्य सचिव बनाया जाना अपने आपमे अलग सा नजर आ रहा है। वेसे मुख्य सचिव निरंजन आर्य के मुख्यमंत्री गहलोत का काफी करीबी होने की चर्चा काफी अर्शे से सुनने मे आती रही है। मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने करीबी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी निरंजन आर्य की पत्नी को पहले सोजत से कांग्रेस की टिकट विधानसभा चुनाव मे दिलवा कर चुनाव लड़वाया। जब वो चुनाव जीत नही पाई तो उसको राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य बनाकर पुरुस्कृत किया गया।
                 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी निरंजन आर्य की तरह ही मुख्यमंत्री गहलोत भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की वरिष्ठता को लांघ कर अपने चहते व पीछड़ा वर्ग जाट बिरादरी से तालूक रखने वाले एम एल लाठर को राजस्थान पुलिस का मुखिया DGP बनाने मे कामयाब रहे है।
               इसके अतिरिक्त पीछड़ा वर्ग की यादव बिरादरी के तत्तकालीन राजस्थान पुलिस मुखिया DGP भूपेंद्र यादव के समय पूर्व सेवानिवृत्ती लेने पर प्रदेश की प्रमुख संवेदानिक संस्था "राजस्थान लोकसेवा आयोग" का मुखिया (चेयरमैन) मनोनीत हाल ही मे किया है।
            मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उक्त तरह की नियुक्ति करके सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढा रहे है या फिर भविष्य का किसी तरह का राजनीतिक गठजोड़ बनाने का सपना संजोये हुये है। यह सबकुछ तो मुख्यमंत्री स्वयं जाने लेकिन उक्त तरह की नियुक्तियों के बाद राजस्थान मे एक अलग तरह की चर्चा को बल जरुर मिल रहा है। लेकिन इसके विपरीत आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक तौर पर काफी कमजोर व कांग्रेस के मजबूत वोटबैंक के तौर पर बडी मजबूत माने जाने वाली मुस्लिम बिरादरी से एक तरह से मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा नियुक्तियों के समय आंखे फेर लेनी की चर्चा भी बडी जोरो से वातावरण मे उछालें मारती नजर आ रही है।


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