लाल टापू के नाम से विख्यात रहे धोद विधानसभा क्षेत्र की पंचायत समिति मे भाजपा का प्रधान बन सकता है।


             ।अशफाक कायमखानी।
जयपुर।

 



             कामरेड अमरा राम के विधानसभा चुनाव लड़कर विजयी होने के समय राजस्थान मे लाल टापू के नाम से विख्यात रहे सीकर जिले की धोद विधानसभा क्षेत्र की पंचायत समिति निदेशक के हुये चुनावो का परिणाम दस दिसम्बर को आना है। लेकिन धोद क्षेत्र की राजनीति पर नजर रखने वालो का मानना है कि वर्तमान कांग्रेस विधायक परशराम मोरदिया के कोराना पोजिटिव होने के कारण उनके चुनाव प्रचार से दूर रहने के अलावा दिग्गज कांग्रेस नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया की उम्मीदवार चयन से लेकर उक्त चुनाव प्रचार तक सक्रियता नजर नही आने के चलते माकपा के मुकाबलें अधीकांश जगह पर्दे के पीछे कांग्रेस भाजपा के मतदान के दिन एक लाईन मे होने से तत्तकालीन भाजपा प्रधान गोवर्धन वर्मा के बाद इस दफा भाजपा का प्रधान बन सकने के अलावा भाजपा नेता रामेश्वर रणवां के परिवार से पहली दफा कोई सदस्य सीधे तौर पर जनता के मतो से चुनकर जनप्रतिनिधि बनेगा।


              धोद पंचायत समिति प्रधान पद पर अधीकांश समय कांग्रेस की तरफ से महरिया परिवार व माकपा का का कब्जा रहा है। लेकिन इस दफा चुनावी मैदान मे कांग्रेस काफी पिछड़ती दिखाई दी ओर भाजपा व माकपा मे मुख्य मुकाबला होता साफ नजर आया। कुल 41 वार्ड निदेशक चुनाव मे केवल मात्र कूदन वार्ड को अपवाद स्वरूप छोड़कर बाकी सभी 40 वार्डो मे माकपा से अधीकांश जगह भाजपा का मुकाबला नजर आया। कांग्रेस कुछ जगह को छोड़कर अधीकांश जगह जब मुकाबले से पिछड़ती नजर आई तो उनके समर्थक मतदाताओं ने माकपा को रोकने के लिये भाजपा उम्मीदवारों पर कृपादृष्टि रखी बताते है। धोद की राजनीति पर नजर रखने वालो का मानना है कि इतना सबकुछ होने के बावजूद भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत के करीब नही पहुंच पा रही है। पर संख्या बल के हिसाब से भाजपा बडा दल रहेगा। जिसको कुछेक निर्दलीय व कुछ कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों का समर्थन मिलेगा जो पहले से उनके टच मे बताते है। आंकलन के अनुसार भाजपा के 14-17 उम्मीदवार, माकपा के 10-12 उम्मीदवार, कांग्रेस के 4-8 उम्मीदवार एवं इतने ही निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर आ सकते है।
        


 

   कुल मिलाकर यह है कि प्रधान चुनाव मे माकपा के मुकाबलै भाजपा के निशान पर जीते निदेशक को प्रधान बनाने के लिये किसी ना किसी रुप मे कांग्रेस समर्थन करती नजर आ सकती है। जिस तरह पिछले चुनाव मे ओमप्रकाश झीगर को प्रधान बनाने मे भाजपा के निशान पर जीते निदेशक मतदान करते नजर आये थे। भाजपा का प्रधान पद उम्मीदवार रणवां परिवार से हो सकता है।



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