आंदोलन व जारी पैदल दांडी यात्रा के बाद भी मुख्यमंत्री गहलोत जायज मांग भी मानने को अभी तक तैयार नहीं।  - अनेक वर्तमान व पूर्व विधायको सहित अनेक नेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांगे मानने का निवेदन किया।


जयपुर।
            राजस्थान का मुस्लिम समुदाय मदरसा पैराटीचर्स को नियमित करने व उर्दू सहित अन्य अल्पसंख्यक भाषाओ के साथ अन्यायपूर्ण पक्षपात करके जारी किये गये आदेशो को निरस्त करके 2004 के आदेश की बहाली के साथ साथ सरकारी स्कूल/कोलोज मे उर्दू अध्यापक/लेक्चर के पद स्वीकृत करके उनकी नियुक्ति करने को लेकर पीछले एक अर्शे से उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष आमीन कायमखानी के नेतृत्व मे उर्दू अध्यापक संघ व मदरसा पैराटीचर्स संघ लगातार आंदोलन करते आ रहे है। इन्ही मांगो को लेकर एक नवम्बर को राजस्थान के चूरु शहर से दांडी (गुजरात) की तकरीबन 1090 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर शिक्षक शमशेर भालूखां निकल के को आज सोलह दिन होने को आये है पर अभी तक सरकार के कानो तक किसी तरह की जू तक नही रेंगी है। जबकि उक्त दांडी यात्रा की गम्भीरता को देखकर राजस्थान के अनेक विधायकों व पूर्व विधायको ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उक्त मांगो को मानने का निवेदन भी कर चुके है।



        पैदल दांडी यात्रा पर निकले शिक्षक कांग्रेस के पूर्व विधायक भालूखां के पूत्र व उर्दू शिक्षक शमशेर भालूखां ने इस यात्रा को राष्ट्रीय सदभावना यात्रा ( दांडी यात्रा ) बताते हुये कहा कि वो तकरीबन 1090 किलोमीटर की उक्त यात्रा पैदल चलते हुये पूरी करने के साथ अल्पसंख्यकों मे अपने अधिकारों के प्रति जनजाग्रति पैदा करने की कोशिश करेगे। वो सरकार से उनकी जायज मांगो को मानने की अपील भी लगातार जगह जगह उनके सम्मान मे हो रहे कार्यक्रमों मे कर रहे है।
          शमशेर खा ने यात्रा का उद्देश्य बताते हुये कहा कि मुस्लिम समाज में अपने अधिकारो के प्रति जागरूकता उटपन्न करना है। एवं उन्होंने अपनी प्रमुख मांगो का ब्यौरा यू दिया।
 


    राजस्थान सरकार से शमशेर भालूखा की माँगे  


1- मदरसा पैरा टीचरों को तृत्य श्रेणी अध्यापक के समान वेतन पर स्थाई करना ।
2- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 अ को लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घटित गुजराल समिति की रिपोर्ट की अनुपालना में मंत्री मण्डलीय समिति को रिपोर्ट के अनुसार निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर द्वारा जारी सरकुलर -शिविरा / शिक्षक / संस्थान/ F-6/1319/04 दिनांक 13-12-2004 को अक्षरस लागू करना जिसमें अल्पभाषाएँ ( उर्दू पंजाबी गुजराती सिंधी के शिक्षण सम्बन्धी दिशा निर्देश हैं) 
3 -सभी राजकीय महाविद्यालयो में उर्दू संकाय स्वीकृत करना । 
           शमशेर की केंद्र सरकार से भी माँग 
     अल्पभाषा आयुक्तायल नई दिल्ली जो कि चार वर्षों से मृत प्रायः है को पुनर जीवित करना व वहाँ पर रिक्त आयुक्त व अन्य पदों को भरा जाना व अल्प भाषा सम्बन्धी रिपोर्ट राष्ट्रपति महोदय के माध्यम से संसद के सदन के पटल पर प्रस्तुत कर संरक्षण हेतु उपाय करने पर विचार करे। अल्पसंख्यक मामलात  विभाग के अंतर्गत पंद्रह सूत्री कार्यक्रम को वास्तविक धरातल पर अमल में लाया जाए । 
         दांडी यात्रा पर पैदल चल रहे शमशेर ने कहा कि यदि सरकार यह माँगे नही मानती है तो जयपुर में मुस्लिम समाज को साथ लेकर अनिश्चितकाल के लिए धरना दिया जाएगा ओर वो स्वम ठाकुर शमशेर भालू खान अनिश्चितक़ालीन आमरण अनशन पर बैठेंगे।
          पैदल दांडी यात्रा पर निकले शमशेर भालूखां को मिल रहे जनसमर्थन व यात्रा की गम्भीरता को भांप कर कांग्रेस के अनेक वर्तमान विधायकों व पूर्व विधायको सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर उक्त मांगो को मानने की अपील की है। जिनमे चूरु लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार रहे रफीक मण्डेलिया, मंडावा विधायक रीटा चोधरी, फतेहपुर विधायक हाकम अली, लाडनू विधायक मुकेश भाखर, विधायक आमीन कागजी, विधायक नरेन्द्र बूढानीया, विधायक भंवरलाल शर्मा, विधायक कृष्णा पूनीया, विधायक राजकुमार रोत, पूर्व मंत्री यूनूस खा, पूर्व विधायक मनोज न्यांगली, सूरसागर विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार रहे प्रोफेसर मोहम्मद अय्यूब, व राजगढ़ नगरपालिका चेयरमैन रजीया गहलोत प्रमुख है।


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