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राजस्थान मे------       पंचायत समिति व जिला परिषद के चुनाव चार चरणो मे होगे। पायलट प्रभाव वाले जिलो को छोड़कर बाकी इक्कीस जिलो मे चुनाव की घोषणा।


जयपुर।
            राजस्थान मे जनवरी-20 से शुरु हुये सरपंच चुनाव हाल ही पूरे एक साल मे सम्पन्न होने के बाद आज चुनाव आयोग द्वारा पंचायत समिति व जिला परिषद के चार चरणो मे चुनाव कराने का ऐहलान करने के बाद राजस्थान की ग्रामीण राजनीति मे गरमाहट आना देखा जा रहा है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट के काफी प्रभाव वाले दौसा, करोली, अलवर, सवाईमाधोपुर, भरतपुर, जयपुर, कोटा सहित कुछ जिलो को छोड़कर बाकी इक्कीस जिलो मे चुनाव की रणभेरी बजी।
            हालांकि चुनाव आयोग द्वारा आज की गई चुनाव घोषणा के मूताबिक प्रदेश के मात्र इक्कीस जिले अजमेर, बांसवाड़ा, बाडमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरु, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झूंझुनू, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सीकर, टोंक व उदयपुर मे ही उक्त कार्यक्रम के मूताबिक 23-नवम्बर, 27 नवम्बर,1 दिसंबर व 5 दिसम्बर को चार चरणो मे पंचायत समिति व जिला परिषद के निदेशक के के लिये मतदान होने के बाद 8-दिसम्बर को जिला मुख्यालय पर मतगणना एवं 10-दिसम्बर को प्रधान व जिला प्रमुख के लिये मतदान होकर उसी दिन परिणाम जारी कर दिये जायेगे। उक्त इक्कीस जिलो मे होने वाले चुनावों मे 2 करोड़ 41 लाख 87 हजार 9 सौ 46 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेगें है।
           उक्त चुनाव बीना राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह के होने की पीछले कुछ दिनो से जारी चर्चा पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पहले की तरह सिम्बल पर ही चुनाव होने के ब्यान के बाद विराम लगने से यह तय माना जा रहा है कि अब राजनीतिक दल अपने अपने उम्मीदवारों को अपने अपने चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव लड़ायेगे। जिसके चलते राजनीतिक दलो की पीछले 22-साल से चली आ रही परिपाटी के मुताबिक पार्टी के वर्तमान विधायक व जहां विधायक नही है वहां पर पीछले विधानसभा चुनाव मे रहे पार्टी उम्मीदवारों की मंशानुसार उनके निर्वाचन क्षेत्र मे उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया ही इस दफा भी अपनाई जायेगी। लेकिन राजस्थान मे भाजपा के पच्चीस के पच्चीस लोकसभा सांसद जीते हुये है। पर कांग्रेस का एक भी लोकसभा सांसद जीता हुवा नही होने के चलते उक्त इक्कीस जिलो मे कांग्रेस उम्मीदवार चयन मे लोकसभा उम्मीदवार रहे नेताओं की भूमिका रहेगी या नही रहेगी। अगर रहेगी तो क्या रहेगी। इस बात को लेकर मतदाताओं व पार्टी कार्यकर्ताओं के मध्य एक अलग तरह से बहस चल पड़ी है।
                कुल मिलाकर यह है कि होने वाले पंचायत समिति व जिला परिषद चुनावो मे सत्तारूढ़ कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के अलावा अलग अलग जिलो के सीमित क्षेत्र मे प्रभाव रखने वाले लोकपा, बसपा, बीटीपी व माकपा सहित छोटे छोटे दल भी चुनावों मे अपने उम्मीदवार खड़े करके कहीं त्रिकोणीय व कहीं चतुष्कोणीय दिलचस्प मुकाबला करते नजर आयेगे। इसी के साथ  कांग्रेस मे गहलोत व पायलट फेक्टर भी काम करने की सम्भावना जताई जा रही है।


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