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प्रभारी महासचिव अजय माकन का प्रभाव सरकार पर नजर आने लगा।


जयपुर।
              कांग्रेस की केंद्रीय राजनीतिक के मजबूत स्तम्भ व गांधी परिवार के नजदीकी माने जाने कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री अजय माकन के राजस्थान का प्रभारी महामंत्री बनने पर राजस्थान के कांग्रेस से जुड़े प्रमुख नेताओं से सम्भागवार संवाद कार्यक्रमों मे आने वाले सुझावों मे से कुछ सुझावों पर सरकार पर असर नजर आने लगा है।
               प्रभारी महामंत्री अजय माकन के संवाद कार्यक्रम के तहत अजमेर व जयपुर सम्भाग के नेताओं से मिलते हुये बिजली की दर बढने, तबादलो पर से प्रतिबंध हटाने व जिले के प्रभारी मंत्रियों द्वारा कोराना काल मे भी भूमिका ठीक से नही निभाने को लेकर आवाज मुखर होना बताया जा रहा था। पूर्व मे उर्जा मंत्री अजय माटन ने बिजली के मामले को भी अच्छी तरह समझ लिया बताते है। अधीकांश प्रभारी मंत्रियों के प्रति उनके जिले के जनप्रतिनिधि व नेताओं मे नाराजगी के सूर उठते देखे गये थे। सीकर के तत्तकालीन प्रभारी मंत्री रघू शर्मा के खिलाफ सीकर मे कोराना मरीजो की बढती तादाद व जिले से दूर रहने को लेकर दांतारामगढ़ के तेज तर्रार विधायक वीरेंद्र सिंह ने खुले आम अखबारात के मार्फत घेरा था। उसके बाद रघू शर्मा सीकर मे कोई भी बैठक करने नही आये। राजनीतिक हलको मे खासी चर्चा चक्कर लगा रही थी कि सीकर मे रघू शर्मा बैठक करने आते थो प्रशासन के सामने ही उन्हीं के दल के जनप्रतिनिधि कठघरे मे खड़ा करने से चूकते नही। पर अजय माकन के सुझाव पर गहलोत सरकार ने जिले के प्रभारी मंत्रियो को इधर से उधर करके उनके जिले मे सक्रियता से काम करने को कहा बताते।
             पीछले कुछ सालो से तबादलो को भी कुछ लोग धंधा समझने लगे है। जब धंधा मंदा हो तो कारोबारियों की चिंता बढना लाजिमी है। प्रभारी महामंत्री अजय माकन के संवाद कार्यक्रम मे तबादलो पर रोक हटाने की मांग भी किसी ना किसी रुप मे उभर आने के बाद पीछले साल 30-सितम्बर से तबादलो पर लगी रोक कल 15-सितंबर को सरकार के हटाने के बाद जनप्रतिनिधियों व उनके समर्थकों मे खुशी का आलम छाया नजर आने लगा है। अपने पसंद के अधिकारी व कर्मचारियों को अपने क्षेत्र मे पदस्थापित करवाने व नापसंद वालो को बाहर का रास्ता दिखाने की भरसक कोशिशों का दौर अब चलेगा।
             कुल मिलाकर यह है कि प्रभारी महासचिव अजय माकन के संवाद कार्यक्रम के सार्थक परिणाम नजर आने लगे है। गहलोत सरकार को काफी कुछ वो करने पर मजबूर होना पड़ रहा है जो माकन चाह रहे है।


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