प्लाज्मा डोनेशन स्क्रीनिंग व एंटीबॉडी टेस्ट और सैंपल कलेक्शन कैंप दस सितम्बर को।

 


 सीकर 8-सितंबर।
            सुधीर महरिया स्मृति संस्थान एवं नेहरू युवा संस्थान सीकर द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सीकर तथा जिला प्रशासन के तत्वावधान में गुरुवार 10 सितंबर को सामुदायिक भवन इंडस्ट्रियल एरिया,जयपुर रोड सीकर में प्लाजमा डोनेशन स्क्रीनिंग ,एंटीबॉडी टेस्ट और सैंपल कलेक्शन कैंप का आयोजन किया जाएगा |
         सुधीर महरिया स्मृति संस्थान निदेशक एवं नेहरू युवा संस्थान सचिव बी एल मील ने बताया कि जिला कलेक्टर  अविचल चतुर्वेदी , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ  अजय चौधरी,  पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं संस्थान संरक्षक सुभाष महरिया   तथा पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया के निर्देशन में आयोजित  शिविर में जो व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव होने की 14 दिन होने के बाद वाले लोगों का प्लाजमा डोनेशन स्क्रीनिंग, एंटीबॉडी टेस्ट और सैंपल कलेक्शन किया जाएगा |
          मील ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड -19 के सीरियस पेशेंट के लिए  जीवनदान है |  कोरोना संकट के बीच राजस्थान सरकार के प्रयासों से डॉक्टर प्लाजमा थेरेपी से कोरोना पॉजिटिव के गंभीर मरीजों का इलाज करने के प्रयास में लगे हुए हैं जिसमें कोरोना से ठीक हो चुके है मरीजों के प्लाज्मा से कोविड-19 गंभीर पीड़ित व्यक्ति का उपचार किया जा रहा है | भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर )  द्वारा प्लाज्मा थेरेपी से कोविड-19 संक्रमित मरीजों के उपचार की अनुमति के बाद प्लाज्मा थेरेपी की मदद से इलाज में सकारात्मक नतीजे देखे जा रहे हैं |
          कॉविड एंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा ब्लड कंपोनेंट कोरोना से ठीक हुये मरीज का रक्तदान से प्राप्त किया जाता हैं। एक व्यक्ति द्वारा किया हुआ प्लाज्मा दान ,दो मरीजों के जीवन बचाने मे सहयोगी होता है। कोई भी कोरोना मरीज जिसको ठीक हुये 14 दिन से ज्यादा हो गये हो ओर उसकी  रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी हो , उम्र  18 - 60  साल हो , वजन  60 किलोग्राम हो ओर  हिमोग्लोबिन 12.5 हो । कुछ रक्त  की जांचें जैसे सीबीसी, सिरम प्रोटीन  लेवल  देखकर डोनर को फिट किया जाता है । प्लाज्मा  डोनेशन  प्लाजमा फेरेसिस मशीन से लिया जाता है इसमे दाता का केवल प्लाज्मा ( पीला रक्त) ही लिया जाता है , यह प्रक्रिया पूर्णतः   सुरक्षित है किसी भी प्रकार के इंफेक्शन का कोई संभावना नहीं रहती , हर दाता के लिए अलग अलग किट का उपयोग लिया जाता है  | प्लाज्मा डोनेशन की प्रक्रिया मे लगभग 45  मिनट  लगते है ।


एंटीबॉडी  क्या है  एवं एंटीबॉडी टेस्ट के फायदे
  कोई वायरस किसी व्यक्ति पर हमला करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज कहे जाने वाले प्रोटीन विकसित करती है अगर वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी विकसित होती है तो वह वायरस की वजह से होने वाली बीमारियों से ठीक हो जाता है | सामान्यतः कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव होने के 14 दिन बाद उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है जिसका टेस्ट करवाने से उस व्यक्ति को यह फायदा है कि उसको पता चल जाता है कि एंटीबॉडी का उसके शरीर में लेवल क्या है क्योंकि अगर उसका एंटीबॉडी लेवल अच्छा रहेगा तो उसके दोबारा पॉजिटिव होने की संभावना कम हो जाती है |
      प्लाज्मा डोनेशन के 24 घंटे बाद हमारे शरीर में प्लाज्मा की पूर्ति हो जाती है । 7 दिन के बाद दुबारा डोनेट कर सकते है । बार बार डोनेट करने से हमारे शरीर मे  नई एंटीबॉडी बनती  है |


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