सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अलग - अलग चार्जेज़ के नाम पर कुछ इस तरह लूटता है अपने ग्राहकों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई)


नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अपने करोड़ों खाताधारकों से तगड़ा चार्ज वसूल रहा है। बैंक पैसे जमा करने से लेकर निकालने तक पर शुल्क लगाता है। एक तय लिमिट के बाद अगर किसी ने बैंक में अपने खाते में पैसा जमा किए या निकाले तो यह शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा एसबीआई ने अपने ग्राहकों पर पेनाल्टी भी लगाता है। यह पेनाल्टी मामूली सी चूकों पर वसूली जाती है। ऐसे में अगर आपका भी बैंक खाता एसबीआई में तो सावधान रहें। क्योंकि एसबीआई पेनाल्टी वसूलने में देरी नहीं करता है। आइये जानते हैं कि एसबीआई कितनी फीस और पेनालटी वसूलता है।


अब जानिए पैसे निकालने पर कितनी लगती है पेनाल्टी -अगर आपके बैंक खाते में औसत मंथली बैलेंस 25000 रुपये तक है, तो आप केवल 3 बार ही फ्री में खाते से पैसे निकाल सकते हैं। वहीं अगर आपके एसबीआई बैक खाते में औसत मंथली बैलेंस 25000 रुपये से लेकर 50000 रुपये तक है, तो आप महीने में 10 बार खाते से फ्री में पैसा निकाल सकते हैं। वहीं 50000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक एवरेज बैलेंस होने पर आप 15 बार फ्री में पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके एसबीआई बैंक खाते में 1 लाख रुपये से ज्यादा का एवरेज बैलेंस है, तो आप चाहे जितनी बार चाहें पैसे निकाल सकते हैं।

अगर निकाला ज्यादा बार पैसा तो देना चार्ज एसबीआई के अनुसार 1 अक्टूबर 2019 के बाद से अगर किसी ने ऊपर बताई सीमा से ज्यादा बार खाते से पैसा निकाला तो 50 रुपये का चार्ज लगाया जा रहा है। वहीं इस चार्ज पर जीएसटी भी आपको ही देना होगा।


अब जान लीजिए मिनिमम बैलेंस के नियम एसबीआई ने अपनी शहरी क्षेत्र की बैंक शाखाओं के लिए 3000 रुपये एवरेज मंथली बैलेंस की राशि तय की है। लेकिन अगर आपका एसबीआई में शहरी क्षेत्र में बैंक खाता है और आपका मिनिमम मंथली बैलेंस आधे से कम यानी 1500 रुपये से नीचे जाता है तो आपको 10 रुपये पेनाल्टी और साथ में जीएसटी देना होगा। वहीं अगर आपका मिनिमम मंथली बैलेंस 50 फीसदी से 75 फीसदी के बीच रहता है तो आपको 12 रुपये पेनाल्टी के अलावा जीएसटी देना होगा। इसके अलावा अगर आपका मिनिमम मंथली बैलेंस 75 फीसदी के नीचे चला जाता है तो आपको 15 रुपये पेनाल्टी के साथ जीएसटी देना होगा।


एसबीआई की अर्द्ध शहरी क्षेत्र की शाखाओं के लिए क्या हैं नियम एसबीआई ने अपनी अर्द्ध शहरी क्षेत्र की शाखाओं के लिए भी एवरेज बैलेंस के बारे में नियम बदल दिया है। 1 अक्टूबर 2019 से अगर आपका बैंक खाता एसबीआई के अर्द्ध शहरी क्षेत्र वाली ब्रांच में तो जानिए आप पर कौन सा नियम लागू है। एसबीआई अर्द्ध शहरी क्षेत्र की ब्रांच में 2000 रुपये मिनिमम बैलेंस की शर्त लागू है। लेकिन अगर आप यह मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रख पाए तो आप पर चार्ज लगाया जा रहा है। अगर आपका यह मिनिमम मंथली बैलेंस कम होकर 50 फीसदी तक है, तो आप पर 7.50 रुपये की पेनाल्टी लग रही है। वहीं इस पेनाल्टी पर जीएसटी भी आपको ही देना होगा। अगर आपका मिनिमम मंथली बैलेंस 50 फीसदी से लेकर 75 फीसदी तक कम है, तो आपको 10 रुपये पेनाल्टी देनी पड़ रही है। इस पर जीएसटी अलग से देना पड़ता है। लेकिन अगर आपका एवरेज बैलेंस इससे भी कम रहता है, तो आप पर 12 रुपये की पेनाल्टी लगाई जा रही है। साथ ही इस जीएसटी भी वसूला जाता है।


जानिए ग्रामीण क्षेत्रों में क्या है पेनाल्टी अगर आपका एसबीआई बैंक अकाउंट किसी ऐसी शाखा में है, जो ग्रामीण क्षेत्र में आती है, तो इस पर पेनाल्टी वसूली जा रही है। ऐसी शाखाओं में जमाकर्ता पर 1000 रुपये मिनिमम मंथली बैलेंस रखने की शर्त है। अगर आपके एसबीआई बैंक खाते में इतना मिनिमम मंथली बैलेंस नहीं रहता है, तो आप पर पेनाल्टी लगाई जा रही है। अगर आपके खाते में मिनिमम मंथली बैलेंस 50 फीसदी तक कम रहता है, तो आप पर 5 रुपये की पेनाल्टी लग रही है। इस पर जीएसटी अलग से देना पड़ता है। वहीं अगर यह मिनिमम मंथली बैलेंस 50 फीसदी से 75 फीसदी तक कम हो जाता है, तो आप से 7.5 रुपये की पेनाल्टी ली जा रही है। इस पर जीएसटी अलग से देना होगा। वहीं अगर मिनिमम मंथली बैलेंस 75 फीसदी से भी नीचे चला जाता है, तो आपको 10 रुपये पेनाल्टी और जीएसटी लिया जा रहा है।

फंड ट्रांसफर पर देना पड़ रहा है चार्ज एसबीआई नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर यानी निफ्ट (एनईएफटी) पर भी चार्ज वसूलता है। हालांकि इसका ऑनलाइन इस्तेमाल पूरी तरह से फ्री है। लेकिन अगर आप अपनी एसबीआई की शाखा में जाकर इसका इस्तेमाल करते हैं, तो आप पर चार्ज लगाया जाएगा। यह निफ्ट ट्रांसफर चार्ज इस प्रकार होगा। -10000 रुपये तक 2 रुपये और जीएसटी प्रति ट्रांजेक्शन -10 हजार से 1 लाख रुपये तक 4 रुपये और जीएसटी प्रति ट्रांजेक्शन -1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक 12 रुपये और जीएसटी प्रति ट्रांजेक्शन -वहीं 2 लाख रुपये से ज्यादा पर 20 रुपये और जीएसटी प्रति ट्रांजेक्शन


आरटीजीएस के चार्ज भी जान लीजिए एसबीआई के आरटीजीएस के चार्ज भी साथ में जान लें। अगर आप 2 लाख रुपये से ज्यादा 5 लाख रुपये तक आरटीजीएस से पैसा ट्रांसफर करते हैं तो आप से 20 रुपये और जीएसटी लिया जाएगा। वहीं अगर आप 5 लाख रुपये से ज्यादा पैसा आरटीजीएस से ट्रांसफर करते हैं तो एसबीआई आपसे 40 रुपये और जीएसटी लेगा।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सरकारी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के लिये मिलने वाले "महिला सशक्तिकरण अवार्ड" मे वाहिद चोहान मात्र वाहिद पुरुष। - वाहिद चोहान की शेक्षणिक जागृति के तहत बेटी पढाओ बेटी पढाओ का नारा पूर्ण रुप से क्षेत्र मे सफल माना जा रहा है।

                 ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।              हर साल आठ मार्च को विश्व भर मे महिलाओं के लिये अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। लेकिन महिलाओं को लेकर इस तरह के मनाये जाने वाले अनगिनत समारोह को वास्तविकता का रुप दे दिया जाये तो निश्चित ही महिलाओं के हालात ओर अधिक बेहतरीन देखने को मिल सकते है। इसके विपरीत राजस्थान के सीकर के लाल व मुम्बई प्रवासी वाहिद चोहान ने महिलाओं का वास्तव मे सशक्तिकरण करने का बीड़ा उठाकर अपने जीवन भर का कमाया हुया सरमाया खर्च करके वो काम किया है जिसकी मिशाल दूसरी मिलना मुश्किल है।इसी काम के लिये राजस्थान सरकार ने वाहिद चोहान को महिला सशक्तिकरण अवार्ड से नवाजा है। बताते है कि इस तरह का अवार्ड पाने वाले एक मात्र पुरुष वाहिद चोहान ही है।                   करीब तीस साल पहले सीकर शहर के रहने वाले वाहिद नामक एक युवा जो बाल्यावस्था मे मुम्बई का रुख करके वहां उम्र चढने के साथ कड़ी मेहनत से भवन निर्माण के काम से अच्छा खासा धन कमाने के बाद ऐसों आराम की जिन्दगी जीने की बजाय उसने अपने आबाई शहर सीकर की बेटियों को आला तालीमयाफ्ता करके उनका जीवन खुसहाल बनाने की जीद लेक

डॉक्टर अब्दुल कलाम प्राथमिक विश्वविद्यालय एकेटीयू लखनऊ द्वारा कराई जा रही ऑफलाइन परीक्षा के विरोध में एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक आदित्य चौधरी ने सौपा ज्ञापन

  लखनऊ : डॉक्टर अब्दुल कलाम प्राथमिक विश्वविद्यालय एकेटीयू लखनऊ द्वारा कराई जा रही ऑफलाइन परीक्षा के  विरोध में  एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक आदित्य चौधरी ने सौपा ज्ञापन आदित्य चौधरी ने कहा कि   केाविड-19 महामारी के एक बार पुनः देश में पैर पसारने और उ0प्र0 में भी दस्तक तेजी से देने की खबरें लगातार चल रही हैं। आम जनता व छात्रों में कोरोना के प्रति डर पूरी तरह बना हुआ है। सरकार द्वारा तमाम उपाय किये जा रहे हैं किन्तु एकेटीयू लखनऊ का प्रशासन कोरोना महामारी को नजरअंदाज करते हुए छात्रों की आॅफ लाइन परीक्षा आयोजित कराने पर अमादा है। जिसके चलते भारी संख्या में छात्रों की जान पर आफत बनी हुई है। इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए देश भर से तमाम प्रदेशों के भी छात्र परीक्षा देने आयेंगे जिसमें कई राज्य ऐसे हैं जहां नये स्टेन की पुष्टि भी हो चुकी है और विभिन्न स्थानों लाॅकडाउन की स्थिति बन गयी है। ऐसे में एकेटीयू प्रशासन द्वारा आफ लाइन परीक्षा कराने का निर्णय पूरी तरह छात्रों के हितों के विरूद्ध है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की मांग है कि इस निर्णय को तत्काल विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वापस लि

राजस्थान मे गहलोत सरकार के खिलाफ मुस्लिम समुदाय की बढती नाराजगी अब चरम पर पहुंचती नजर आने लगी।

                   ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।              हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा शुरुआत से लेकर अबतक लगातार सरकारी स्तर पर लिये जा रहे फैसलो मे मुस्लिम समुदाय को हिस्सेदारी के नाम पर लगातार ढेंगा दिखाते आने के बावजूद कल जारी भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के अलावा राजस्थान प्रशासनिक व पुलिस सेवा की जम्बोजेट तबादला सूची मे किसी भी स्तर के मुस्लिम अधिकारी को मेन स्टीम वाले पदो पर लगाने के बजाय तमाम बर्फ वाले माने जाने वाले पदो पर लगाने से समुदाय मे मुख्यमंत्री गहलोत व उनकी सरकार के खिलाफ शुरुआत से जारी नाराजगी बढते बढते अब चरम सीमा पर पहुंचती नजर आ रही है। फिर भी कांग्रेस नेताओं से बात करने पर उनका जवाब एक ही आ रहा है कि सामने आने वाले वाले उपचुनाव मे मतदान तो कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष मे करने के अलावा अन्य विकल्प भी समुदाय के पास नही है। तो सो प्याज व सो जुतो वाली कहावत हमेशा की तरह आगे भी कहावत समुदाय के तालूक से सही साबित होकर रहेगी। तो गहलोत फिर समुदाय की परवाह क्यो करे।               मुख्यमंत्री गहलोत के पूर्ववर्ती सरकार मे भरतपुर जिले के गोपालगढ मे मस्जिद मे नमाजियों क