राजस्थान कांग्रेस विवाद को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आने को लेकर गहलोत भारी पड़ रहे है।


जयपुर। 
              ढेड महीने पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मे मध्य खींची राजनीतिक तलवारों के बाद चले घटनाक्रमों के अंतिम पड़ाव पर सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी होने के समय तय शर्तों मे से एक शर्त के अनुसार तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के गठन होने के बाद जयपुर आकर मुद्दों की सुनवाई करने व कमेटी के जयपुर ना आकर दिल्ली मे ही सुनवाई करने को लेकर की जारी पायलट व गहलोत खेमे की कोशिश मे मुख्यमंत्री गहलोत खेमा भारी पड़ता नजर आ रहा है।
                  हालांकि पायलट की वापसी के समय बनी सहमति को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे घटे घटनाक्रमों व सरकार के कामकाज को लेकर अपने राजनीतिक सलाहकार व कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल,  संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल व प्रभारी महामंत्री अजय माकन को मिलाकर तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी का गठन किया है। उक्त कमेटी के गठन होने के बाद सचिन पायलट की कोशिश के अनुसार उक्त कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की भनक ज्योहीं मुख्यमंत्री गहलोत को लगी तो उन्होंने कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की बजाय दिल्ली मे ही राजस्थान के नेताओं व विधायको को बूलाकर आंकलन करने का दवाब बनाया जिसमे अभी तक गहलोत भारी पड़ते नजर आ रहे है।
               राजस्थान को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आकर सरकार के कामकाज व धड़ेबंदी का आंकलन करने के मुख्यमंत्री गहलोत सख्त खिलाफ बताते है। वो चाहते है कि वो कमेटी दिल्ली रहकर केवल पायलट समर्थक विधायको से ही मिलकर आंकलन करे। कमेटी के जयपुर आने से सरकार की स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है उससे बागी हुये विधायको का मनोबल बढ सकता है। जबकि सचिन पायलट उक्त कमेटी का जयपुर आकर सुनवाई करने मे दम लगा रखा है।
                कुल मिलाकर यह है कि पीछले दिनो तीन सदस्यीय कमेटी का जयपुर आकर सूनवाई करने को लेकर घटे घटनाक्रमोंक्षके बाद लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत की कोशिशों का पलड़ा सचिन पायलट की कोशिशों पर भरी पड़ रहा है। कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की सम्भावना क्षीण होती नजर आ रही है।


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