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राजस्थान कांग्रेस के वर्तमान हालात के अनुसार शांति व एकजुटता कायम होना मुश्किल नजर आ रहा है। - प्रदेश मध्यवर्ती चुनाव होने की तरफ बढता नजर आ रहा है।


जयपुर।
              राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राजनीतिक नेचर रहा बताते है कि वो अपने मुकाबले पार्टी के अंदर उभरते प्रत्येक मजबूत नेतृत्व को अवसर मिलते ही उसे कुचलकर मात्र अपने आपको सर्वेसर्वा बनाये रखने की हर मुमकिन कोशिश किसी भी हद तक जाकर हमेशा से करते आ रहे है।
            कांग्रेस विधायक दल मे गहलोत व पायलट के नाम पर दो फाड़ होने का मात्र माहौल बनाकर अवसर पाते ही पायलट को भाजपा से मिलीभगत करने के नाम पर सदिग्ध करते हुये मुख्यमंत्री गहलोत ने मनोनीत प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट व सेवादल अध्यक्ष राकेश पारीक को पद से हटवाने का अवसर मिलते ही उन्हें हटवा कर उनकी जगह अपने खास लोगो को नये अध्यक्ष मनोनीत करवा लिये। लेकिन गहलोत ने हद तो तब कर दी जब लोकतांत्रिक तरीकें से चुनाव से मतदान होकर चुनकर आये युवक कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाकर व एनएनयूआई अध्यक्ष अमित पूनीया को भी हटवा कर उनकी जगह नये अध्यक्ष बनवा कर लोकतंत्र मूल्यों की ही एक तरह से हत्या करवा डाली।
              कांग्रेस हाईकमान की पहल पर सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायको से प्रियंका गांधी व राहुल गांधी सहित कुछ अन्य नेताओ ने वार्ता करके उनके पार्टी हित मे दिये सुझावों को सुनकर एक तरह से उनके जयपुर आकर विधानसभा सत्र की शुरुआत मे 14-अगस्त को सरकार के विश्वास प्रस्ताव के पक्ष मे मत व्यक्त करने के बावजूद मुख्यमंत्री गहलोत उन विधायको को एक तरह से अभी तक अछूत की तरह मान रहे है। 21-अगस्त को कोराना पर विधानसभा मे हो रही बहस मे उन सभी 18-विधायको को बोलने का अवसर ना देकर एक तरह से उनके साथ न्याय नही होना माना जा रहा है। जबकि उनमे से अनेक विधायको ने कोराना बहस मे भाग लेने की इच्छा भी जताई थी। विधानसभा मे सीटो का बंटवारा भी नये तोर पर इस तरह किया बताते है कि सचिन के समर्थक माने जाने वाले विधायको के सामने माईक नही आये।
             इसी तरह लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव होकर मतदान प्रतिशत अधिक पाकर चुने गये युवा कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाकर की जगह एक मात्र नेता की मर्शी पर मनोनीत युवा कांग्रेस अध्यक्ष गणेश घोघरा के 24-अगस्त को पदभार ग्रहण अवसर पर मुख्यमंत्री गहलोत का भाषण कांग्रेस के नेताओं की आपसी गहराई को ओर अधिक गहरा करने वाला बताया जा रहा है।
             कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस मे मोजूद सचिन पायलट व उनके समर्थकों को राजनीतिक रुप से कुचलने की लगातार कोशिशे की जा रही है। उनको देखकर लगता है कि कांग्रेस मे एकजुटता व शांति कायम होना मुश्किल है। तुफान उठने के पहले की खामोशी होना माना जा रहा है। मंत्रीमण्डल विस्तार व राजनीतिक नियुक्तियों के बाद राजस्थान कांग्रेस मे एक बडा राजनीतिक भूचाल आना माना जा रहा है।


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