मुख्यमंत्री गहलोत समर्थक दस निर्दलीय विधायको के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।


जयपुर।
               दलबदल कानून के तहत राजनीतिक दल से जीते विधायको को एक कानून के दायरे मे बांधते हुये विधायक काल पुरा करने तक उन्हें शर्तो से बांधा गया है। उसी तरह निर्दलीय विधायकों को भी कुछ शर्तों के तहत बांधा गया है। निर्दलीय विधायक किसी भी राजनीतिक दल मे शामिल नही हो सकता है।वह उस कार्यकाल मे निर्दलीय विधायक बने रहकर ही अपना कार्यकाल पुरा कर सकता है।
         राजस्थान के वर्तमान कुल तेराह निर्दलीय विधायको मे से दस निर्दलीय विधायक गहलोत घटक के समर्थन मे। उनको इस तरह की आजादी भी मिली हुई है कि वो किसी भी दल का समर्थन कर सकते है लेकिन किसी दल विशेष के पार्टी स्तर के कार्यक्रमो मे भाग नही लेने की शर्त उन पर लागू होना बताते है। जबकि संयम लोढा, महादेव सिंह, बाबूलाल नागर , राजकुमार, आलोक बेनीवाल, बलजीत यादव, कांतिलाल मीणा सहित सहित दस निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री निवास व होटल के बाड़ेबंदी मे आयोजित होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक मे शामिल श होने से प्रतीत होता है कि वो निर्दलीयों विधायक की बजाय अन्य दल की कार्यवाही मे हिस्सा लेकर वो किसी खास के विधायक होना अधिक पसंद कर रहे है।
        कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठको मे दस निर्दलीय विधायकों के शामिल होते रहने को लेकर कुछ लोग उनकी सदस्यता को खत्म कराने को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।


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