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राजस्थान मे कायमखानी बीरादरी को मुस्लिम समुदाय मे बडे भाई की भूमिका निभानी होगी।

 
जयपुर।
              हालांकि मूलतः राजस्थान मे राजपूत समाज के मोटेराव चोहान के पूत्रों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनके वंशजो को "कायमखानी" बीरादरी के तौर पर जाना जाता। जो कायमखानी बीरादरी आज के समय राजस्थान के जयपुर, बीकानेर, जोधपुर व अजमेर सम्भाग मे बडी तादाद मे एवं मेवाड़ के भीलवाड़ा सहित प्रदेश के कुछ क्षेत्रो के अतिरिक्त यहां से रोजगार या फिर नवाब की चाहत पर दिसवर मे प्रमुख रुप से निवास करते है। क्षत्रिय वंशज होने के कारण अक्खड़ स्वभाव व लगन एवं वादे के पक्के होने के साथ साथ अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग हटकर देहाती परिवेस मे सभी से मिलजुल कर रहने के आदी व फौज-पुलिस जैसी सरकारी नोकरी की चाहत रखकर तालीम को हासिल करने की दिवानगी इनमे भरपूर पाने के बावजूद अभी तक कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो के साथ सामंजस्य बैठाकर सही मायने मे बडे भाई की भूमिका निभाने मे उतनी सफल नही हो पाई है, जितनी इनको भूमिका निभानी चाहिये थी।
                   राजस्थान मे मुस्लिम समुदाय की अन्य बीरादरियो के मुकाबले तालीम को अधिक मजबूती से पकड़ कर सरकारी सेवा मे बाबू से लेकर अधिकारी स्तर की नौकरी मे ठीक ठाक प्रतिनिधित्व पाने वाली कायमखानी बीरादरी ने अपनी बस्तियों मे रहने वाली अन्य मुस्लिम बीरादरियो मे शिक्षा व सरकारी नोकरी पाने की ललक पैदा करने के लिये वो कोशिशे नही की, जिस कोशिश की दरकार रही है। रहन सहन , स्वभाव-बोलचाल की भाषा व सामाजिक वेषभूषा के अलावा पारम्परिक रिवायतो के हिसाब से चाहे कायमखानी अन्य मुस्लिम बीरादरियो से अलग नजर आती हो लेकिन सभी के मुस्लिम होने के लिये उनका अवल धर्म बनता है कि वो बडे भाई की भूमिका निभाते हुये अन्य बीरादरियो को भी शेक्षणिक फिल्ड की जानकारी देते हुये उन्हें भी प्रगति के पथ पर साथ लैकर दोड़ लगा कर अच्छे से वतन की तरक्की मे भागीदारी निभाये।
           राजस्थान प्रदेश मे अब तक जस्टिस सैय्यद फारुक हसन नकवी, जस्टिस असगर अली चोधरी, जस्टिस यामीन अली, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक हाईकोर्ट जज बने है। जिनमे जस्टिस असगर अली चोधरी व जस्टिस यामीन अली का तालूक मूलतः यूपी से है। राजस्थान के बने केवल जस्टिस सैयद फारुक हसन, जस्टिस भवंरु खा व जस्टिस मोहम्मद रफीक मे से जस्टिस फारूक हसन को छोड़कर दोनो जस्टिस कायमखानी बीरादरी से तालूक रखते है। इसी तरह राजस्थान केडर मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के बनने वाले अधिकारियों मे जे एम खान, सलाऊद्दीन अहमद, , ऐ.आर खान, एम एस खान, अशफाक हुसैन, मोहम्मद हनीफ व जाकीर हुसैन के अलावा कमरुल जमा चोधरी एवं अतर आमिर का नाम शामिल है। जिनमे सलाऊद्दीन व ऐ.आर खान का तालूक यूपी से व कमरुल जमा व अतर आमिर का तालूक कश्मीर से है। अशफाक हुसैन व जाकीर हुसैन का तालूक कायमखानी बीरादरी से है। इसी तरह राजस्थान केडर मे भारतीय पुलिस सेवा के बने अधिकारी फिरोज सिंधी, मुराद अली अब्रा, लियाकत अली, नीसार अहमद, सरवर खान, हबीब खान, तारिक आलम व हैदर अली जैदी है। जिनमें लियाकत अली, सरवर खा व हबीब खा कायमखानी बीरादरी से तालूक रखते है।
                 कुल मिलाकर यह है कि अपने अक्खड़ पन को त्याग कर राजस्थान के पांच-छ सम्भागो मे बहुतायत मे रहने वाली मुस्लिम समुदाय की कायमखानी बीरादरी को शेक्षणिक तरक्की के पथ पर बढकर शासन व प्रशासन मे प्रमुख भागीदारी निभाने के लिये अपने साथ अन्य मुस्लिम बीरादरियो को भी लेकर चलने के लिये बडे भाई के रुप मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर दृढता से विचार करके उस पर अमल करना होगा। साथ ही राजस्थान मे मेव व सिंधी बीरादरी को साथ लेकर अन्य बीरादरियो के साथ आपसी समनव्य बैठाना ही होगा। जिससे फायदा यह होगा कि जिस तरह से कायमखानी बीरादरी का वतन की अन्य बीरादरियो से भाई जैसा भाईचारा का समनव्य सालों से कायम है, उसका प्रभाव पूरे मुस्लिम समुदाय पर पड़ेगा। जिसके बाद आम भारतीयों मे मोहब्बत की डोर ओर अधिक मजबूत होगी।


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