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राजस्थान मे कायमखानी राजनेता अपने राजनीतिक आकाओ का विश्वास दुबारा जीतने मे कमजोर साबित रहे !


जयपुर।
               पूर्व मंत्री व भाजपा नेता यूनुस खान को छोड़कर बाकी अधीकांश कायमखानी राजनेता अपने राजनैतिक आकाओ का विश्वास जीतकर दुबारा पद पाने मे नाकामयाब रहे है। जबकि इसके उलट जनता ने काफी नेताओं कै फिर से विधायक व सांसद बनने मे उनका पुरा साथ दिया है। तत्कालीन डीडवाना भाजपा विधायक यूनुस खां भाजपा की राजे सरकार मे अपने राजनैतिक आका का विश्वास पाकर दुबारा मंत्रीमण्डल मे मंत्री पद पाया था। लेकिन उनके अलावा मरहूम रमजान खां राजस्थान राज्य मंत्रीमंडल मे एवं मरहूम केप्टेन अय्यूब का केन्द्रीय मंत्रीमंडल मे एक एक दफा ही मंत्री बन पाये है। जबकि जनता ने उक्त तोनो नेताओं के साथ मरहूम आलम अली खा व भंवरु खा के एक से अधिक दफा विधायक या फिर सांसद का चुनाव जीतवाया है।
             अपने राजनैतिक आकाओं के विश्वास की ताकत के बल पर राजनीतिक नियुक्तियों को पाने वाले 1998-2003 की गहलोत सरकार मे डा.निजाम खान ने राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पाया था। लेकिन उसके बाद दुबारा उस पद पर या उसके अन्य समानांतर पद पर मनोनीत नही हो पाये है। तत्तकालीन समय मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के काफी करीबी लोगो की गिनती मे डा. निजाम खान शुमार होते थे। इसी तरह कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष लियाकत अली खान बने थे। जो दुबारा उक्त पद के समानांतर पद पर अपने जीवनकाल मे मनोनीत नही हो पाये थे। इसके अलावा राजनीतिक आकाओ के विश्वास पाने पर भाजपा सरकार मे सलावत खां चोलूखा राजस्थान वक्फ बोर्ड व हिदायत खां धोलीया मदरसा बोर्ड के एक एक दफा अध्यक्ष बन पाये। लेकिन उक्त पदो पर या उनके समांतार पदो पर अभी तक दोनो नेता मनोनीत नही हो पाये है। मौजूदा अशोक गहलोत सरकार मे गहलोत के विश्वास के कारण खानू खां 16 महिनो के लिये वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने है जिनके भविष्य का अभी इंतजार होगा।
             


           उक्त राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा डा. हबीब खां गोरान IPS को गहलोत सरकार के समय पहले राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य व फिर चेयरमैन बनाया गया था। इसी तरह गहलोत सरकार मे ही जस्टिस भंवरु खां को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद राजस्थान राज्य पुलिस जवाबदेह समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। लेकिन दोनो ही उच्च अधिकारियों को उसके बाद अभी तक उक्त पदो के समानांतर अन्य पदो पर दुबारा मनोनीत नही किया गया है।
             


           कुल मिलाकर यह है कि कायमखानी नेताओं को अपने आप पर व अपनी कार्यशैली पर मंथन करना चाहिए कि अपने राजनैतिक आकाओ के विश्वास के कारण पूर्व मंत्री यूनूस खां को छोड़कर बाकी नेता एक दफा तो राजनीतिक नियुक्ति या मंत्रीमंडल मे जगह जैसे तैसे पाने मे सफल हो जाते है। लेकिन जल्द ही उनसे उन पर से राजनैतिक आकाओ का  विश्वास डगमगाने लगता है या फिर वो स्वयं फाल चूकने वाली कहावत को सिद्ध करने पर उतारू हो जाते है। उक्त सवालो का कायमखानी नेताओं को स्वयं जवाब तलासना चाहिए। जबकि जनता ने आलम अली खा, भवरु खां , रमजान खा व युनूस खां को एक से अधिक दफा विधायक व केप्टेन अय्यूब खा को एक से अधिक दफा सांसद का चुनाव जीताकर विधानसभा व संसद भेजा है।


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