सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लॉकडाउन में फंसे लोग अपने घर लौटने को बेचैन

देहरादून, :: जम्मू के रहने वाले विजय बरू व्यापार के सिलसिले में उत्तराखंड के नैनीताल आए थे, लेकिन कोरोना वायरस महामारी को नियंत्रित करने के लिए लागू हुए लॉकडाउन के कारण वहीं फंस गये। बरू के साथ जम्मू-कश्मीर के दो दर्जन से अधिक लोग नैनीताल में फंसे हुए है।


ऊनी वस्त्रों के व्यापारी बरू ने बताया, ‘'मैं पिछले महीने से नैनीताल में कैद हूं। मैं अपने घर जम्मू जाने के लिए बहुत बेचैन हूं लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी नैनीताल से नहीं निकल पा रहा हूं।’’ कश्मीर के कुपवाडा क्षेत्र के रहने वाले लियाकत हुसैन, आशिक हुसैन, किश्तवाड के अंकुश कोतवाल और जम्मू के राकेश कुमार की व्यथा भी बरू से जुदा नहीं है, जो अपने-अपने घर लौटने के लिए परेशान हैं।


जम्मू-कश्मीर के इन लोगों की तरह उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर अन्य राज्यों के करीब 1,700 लोग लॉकडाउन के कारण फंसे हुए हैं। इनमें 700-800 विदेशी सैलानी भी हैं जो ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे अलग-अलग स्थानों पर रुके हुए हैं।


उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, अशोक कुमार ने बताया कि अभी तक 700 विदेशी पर्यटकों को उनके देशों के दूतावासों द्वारा यहां से निकालकर अपने घरों को भेज दिया गया है लेकिन इतने ही विदेशी सैलानी अभी उत्तराखंड में मौजूद हैं।


उन्होंने बताया कि यहां से वापस जाने वालों में ज्यादातर अमेरिका, फ्रांस, स्पेन तथा अन्य यूरोपीय देशों के लोग हैं।


इनके अलावा, विभिन्न राज्यों के 30 से 40 हजार प्रवासी मजदूर भी यहां फंसे हुए हैं जो अपने घरों को लौटना चाहते हैं।


हालांकि, कुमार ने कहा कि उद्योग गतिविधियों के प्रारंभ होने से घर लौटने की इच्छा रखने वाले मजदूरों की संख्या में बदलाव आ सकता है।


इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले मध्य प्रदेश के सिंगरोली जिले के त्रिलोकी कुमार कर भी देहरादून की बद्रीश कॉलोनी में कैद होकर रह गये हैं। कर ने कहा कि वह देहरादून में अपनी पुत्री से मिलने आए थे लेकिन लॉकडाउन के कारण यहां से नहीं निकल पाए।


उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी दिली इच्छा थी कि अपनी सेवानिवृत्ति का दिन अपने सहकर्मियों के साथ बिताऊं। लेकिन लॉकडाउन में फंसने के चलते यह सपना अधूरा रह गया।’’ कश्मीर के लियाकत हुसैन ने कहा, ‘‘मैं यहां की सरकार से आग्रह करता हूं कि हमें नैनीताल से निकाल कर हमारे घर जाने का बंदोबस्त कर दे।’’ 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वक्फबोर्ड चैयरमैन डा.खानू की कोशिशों से अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये जमीन आवंटन का आदेश जारी।

         ।अशफाक कायमखानी। चूरु।राजस्थान।              राज्य सरकार द्वारा चूरु शहर स्थित अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये बजट आवंटित होने के बावजूद जमीन नही होने के कारण निर्माण का मामला काफी दिनो से अटके रहने के बाद डा.खानू खान की कोशिशों से जमीन आवंटन का आदेश जारी होने से चारो तरफ खुशी का आलम देखा जा रहा है।            स्थानीय नगरपरिषद ने जमीन आवंटन का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजकर जमीन आवंटन करने का अनुरोध किया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा कार्यवाही मे देरी होने पर स्थानीय लोगो ने धरने प्रदर्शन किया था। उक्त लोगो ने वक्फ बोर्ड चैयरमैन डा.खानू खान से परिषद के प्रस्ताव को मंजूर करवा कर आदेश जारी करने का अनुरोध किया था। डा.खानू खान ने तत्परता दिखाते हुये भागदौड़ करके सरकार से जमीन आवंटन का आदेश आज जारी करवाने पर क्षेत्रवासी उनका आभार व्यक्त कर रहे है।  

आई.सी.एस.ई. तथा आई.एस.सी 2021 के घोषित हुए परीक्षा परिणामो में लखनऊ पब्लिक स्कूल ने पूरे जिले में अग्रणी स्थान बनाया

 आई.सी.एस.ई. तथा आई.एस.सी 2021 के घोषित हुए परीक्षा परिणामो में लखनऊ पब्लिक स्कूल ने पूरे जिले में अग्रणी स्थान बनाया। विद्यालय में इस सत्र में आई.सी.एस.ई. (कक्षा 10) तथा आई.एस.सी. (कक्षा 12) में कुल सम्मिलित छात्र-छात्राओं की संख्या क्रमशः 153 और 103 रही। विद्यालय का परीक्षाफल शत -प्रतिशत रहा। इस वर्ष कोरोना काल में परीक्षा परिणाम विगत पिछले परीक्षाओं के आकलन के आधार पर निर्धारित किए गए है ।  आई.सी.एस.ई. 2021 परीक्षा में स्वयं गर्ग ने 98% अंक लाकर प्रथम,  ऋषिका अग्रवाल  ने 97.6% अंक लाकर द्वितीय तथा वृंदा अग्रवाल ने 97.4% अंक लाकर तृतीय स्थान प्राप्त किया।   आई .एस.सी. 2021 परीक्षा में आयुष शर्मा  ने 98.5% अंक लाकर प्रथम, कुशाग्र पांडे ने 98.25% अंक लाकर द्वितीय तथा आरुषि अग्रवाल ने 97.75% अंक लाकर तृतीय स्थान प्राप्त किया।   उल्लेखनीय है कि आई.एस.सी. 2021 परीक्षा में इस वर्ष विद्यालय में 21 छात्रों ने तथा आई.सी.एस.ई.की परीक्षा में 48 छात्रों ने 90 प्रतिशत से भी अधिक अंक लाएं।   आई.सी.एस. 2021 परीक्षा में प्रथम आये आयुष शर्मा के पिता श्री श्याम जी शर्मा एक व्यापारी हैं । वह भविष्य में

नूआ का मुस्लिम परिवार जिसमे एक दर्जन से अधिक अधिकारी बने। तो झाड़ोद का दूसरा परिवार जिसमे अधिकारियों की लम्बी कतार

              ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।             राजस्थान मे खासतौर पर देहाती परिवेश मे रहकर फौज-पुलिस व अन्य सेवाओं मे रहने के अलावा खेती पर निर्भर मुस्लिम समुदाय की कायमखानी बिरादरी के झूंझुनू जिले के नूआ व नागौर जिले के झाड़ोद गावं के दो परिवारों मे बडी तादाद मे अधिकारी देकर वतन की खिदमत अंजाम दे रहे है।            नूआ गावं के मरहूम लियाकत अली व झाड़ोद के जस्टिस भंवरु खा के परिवार को लम्बे अर्शे से अधिकारियो की खान के तौर पर प्रदेश मे पहचाना जाता है। जस्टिस भंवरु खा स्वयं राजस्थान के निवासी के तौर पर पहले न्यायीक सेवा मे चयनित होने वाले मुस्लिम थे। जो बाद मे राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस पद से सेवानिवृत्त हुये। उनके दादा कप्तान महमदू खा रियासत काल मे केप्टन व पीता बक्सू खां पुलिस के आला अधिकारी से सेवानिवृत्त हुये। भंवरु के चाचा पुलिस अधिकारी सहित विभिन्न विभागों मे अधिकारी रहे। इनके भाई बहादुर खा व बख्तावर खान राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी रहे है। जस्टिस भंवरु के पुत्र इकबाल खान व पूत्र वधु रश्मि वर्तमान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के IAS अधिकारी है।              इसी तरह नूआ गावं के मरह