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लोकडाऊन मे की जा रही रत्ती भर लोगो की हरकतों से सबक लेना ही होगा। - छिपने-छिपाने का खेल अब बंद होना चाहिए।

जयपुर।
               कोराना-19 को लेकर जारी लोकडाऊन मे रत्ती भर लोगो द्वारा की जा रही हरकतो से हो रही दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिये सभी को आगे आकर सबक लेना ही होगा। रत्ती भर लोगो द्वारा स्वयं के साथ दुसरो का जीवन खतरे मे डालने की हरकत के पीछे कोई साजिश तो नही मानी जा सकती है। लेकिन धार्मिक लीडरशिप द्वारा अपने अपने क्षेत्र मे सत्ता बनाये रखने के लिये एक बहुत बडे तबके को जदीद तालीम से दूर रखने का परिणाम आज साफ नजर आ रहा कि सरकारी दफ्तरों मे कभी पैर नही रखने वाले रत्ती भर लोग कोराना को लेकर अंधविश्वासों व नाहेली के कारण अपने आपको चिकित्सा विभाग को सरेंडर करने से आज भी कतरा रहे है। जिसको बिल्कुल भी उचित नही ठहराया जा सकता है। अज्ञानता, भयभीत होना व नासमझी को जरूर जिम्मेदार माना जा सकता है।
             लोकतांत्रिक रुप से बनने वाली सरकारों व उनके नुमाइंदों की सत्ता अलग तरह की होती है वहीं धार्मिक तंजीमो व धार्मिक लीडरान की अलग तरह की सत्ता कायम होती है। उस सत्ता को बनाये व बचाये रखने के लिये राजनेताओं की तरह ही धार्मिक लीडरान भी अपने अपने क्षेत्र व अनुयायियों को एक धार्मिक नशे की घूंट पीलाकर अपने कहे अनुसार चलाने की भरपूर कोशिशे करते पर्दे के पीछे नजर आते है। ताकि उनका अनुयायी किसी भी परिस्थितियों मे उसके आदेश का केवल मात्र पालन करे। इनमे से अधिकांश धार्मिक लीडरान स्वयं जदीद तालीम से कोसों दूर होते है तो वो हर मुमकिन कोशिश करते है कि उनके अनुयायी भी जदीद तालीम से स्वयं दूर रहे एवं वो अपने बच्चों कोभी  दूर रखे, जिसके कारण वो उस धार्मिक लीडर के इर्ध गिर्ध चक्कर लगाते रहेगे।
               राजस्थान के जयपुर के रामगंज मे विदेश से आये एक शख्स को आते ही मेडिकल टीम को अपने आपको सोंप कर चेकअप कराकर उनकी सलाह के अनुसार रहना था। लेकिन उसने ऐसा नही किया। उसकी नासमझी के कारण आज वो एवं उससे अनेक लोग संक्रमित हो चुके है। एवं परिणाम पूरा रामगंज क्षेत्र भूगत रहा है। इसी तरह बीना मेडिकल जांच करवाये जयपुर से डीडवाना पैदल जाते तीन लोग पलसाना मे किसी मकान मे ठहर जाते है। गनीमत रही कि उनको किसी तरह मेडिकल विभाग व पुलिस पकड़ कर क्वरंटाईम करा देते है। फिर उनमे से एक बहत्तर वर्षीय आदमी कोराना संक्रमित पाया जाता है। जिसको आज जयपुर भेज दिया गया है। रामगंज व पलसाना की तरह ही हनुमानगढ़ के एक आदमी द्वारा अपनी ट्रेवल हिस्ट्री को छुपाने का परिणाम यह आया है कि उसके साथ उसके एक अन्य पड़ोसी के कोराना संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है एवं उनके आस-पड़ोस मे रहने वालो की जांचे चल रही है। उनकी रिपोर्ट आने पर उनमे संक्रमित पाये जाते है या नही पाये जाते है?
                मै यहा किसी एक धर्म की बात नही करता बल्कि सभी धर्मों के धार्मिक लीडरान से उम्मीद रखता हु कि कोराना नामक महामारी से देश व राज्य सरकारे जूझ रही है। सरकार आम अवाम को इस वबा से  बचाने के लिये अधिकाधिक कोशिश कर रही है। ऐसे संकट के समय सभी धर्मो की धार्मिक लीडरशिप को आगे आकर सरकारी आदेश की पालना व विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाईड लाईन के मुताबिक घर पर रहकर जीवन जीने के लिए मजबूर करना चाहिए। साथ ही टेस्ट के लिये घर आने वाली मेडिकल टीम या चिकित्सालय जहां यह सुविधा उपलब्ध है वहां सरकारी निर्देशोनुसार आम इंसान को सरेंडर करने को तैयार करे। अगर ऐसा धार्मिक लीडरान सरकार व आम इंसान के मध्य सामंजस्य कायम नही कर पाये तो महामारी विकराल रुप धारण कर सकती है जिसकी जद मे पता नही किस किस को आना पड़ सकता है।
             हालांकि इस कोराना नामक वबा (महामारी) से पूरा देश संकट मे है। वही इसके बहाने मीडिया का एक बहुत छोटा ग्रूप व दूसरे अन्य ग्रूप द्वारा संकट के समय भी एक खास वर्ग को टारगेट करने का भ्रम टारगेट वर्ग मे पैदा होना पाया जा रहा है। लेकिन सरकारे हर मुमकिन देश को इस संकट से उभारने के प्रयास मे लगी हुई है। अब छिपने-छिपाने के खेल से सभी को बाहर निकल कर हर इंसान को मेडिकल टीम व प्रशासन का साथ देना चाहिए। ताकि कोराना को हराकर हम जल्द खुली हवा मे सांस ले पाये।


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