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हफ्ते भर मे सीकर जिले की दो शख्सियते रामेश्वर महरिया (प्रधान जी) व लादुराम गोदारा के जाने का खालीपन वर्षों याद आयेगा।


सीकर।
             पंचायत राज व सहकारिता सिस्टम को मजबूत कर तमाम लोगो की सेवा मे जीवन लगाने वालो के तोर पर पहचान रखने वाले राजस्थान के शेखावाटी जनपद के अग्रणी जिला सीकर की रामेश्वर महरिया (प्रधान जी) व लादू राम गोदारा नामक दो शख्सियतों का इस दुनिया को अलविदा कहकर चले जाने से जो जगह खाली हुई है उस जगह को वर्षों तक भरा जाना नामुमकिन नजर आ रहा है।
          तत्तकालीन समय मे अच्छी शिक्षा पाने के बावजूद देश-विदेश मे जाकर कोई बडा काम सेट करने की इच्छा को त्याग कर अपनी मिट्टी को गुलजार करने की नियत लेकर सीकर जिले के कुदन गावं निवासी रामेश्वर महरिया ने सूट-बूंट त्याग कर धोती कुर्ता धारण करने वाले को पंचायत राज व सहकारिता सिस्टम को मजबूत करने की अहम कड़ी के तौर भी माना जाता था, उनके 89-साल की उम्र मे देहांत होने से जनपद को बडा झटका लगना माना जा रहा है। मरहूम महरिया धोद पंचायत समिति के एक लम्बे अर्शे तक प्रधान रहे। इसके अलावा सहकारी बैंकों के अध्यक्ष रहकर भी पंचायत राज व सहकारिता सिस्टम को काफी मजबूत किया था। मरहूम महरिया को चुनावी गणित का ज्ञाता के तोर पर भी माना व पहचाना जाता था।
              रामेश्वर महरिया की तरह ही सीकर जिले की बिड़ोदी बडी गावं के रहने वाले 93-वर्षीय लादूराम गोदारा भी कल 15-अप्रैल की रात को इस दुनिया फानी को अलविदा कह गये। पंचायत राज के चुनावी प्रक्रिया शूरु होने की शूरुआत से लेकर पीछले दिनों तक मरहूम लादूराम गोदारा बिड़ोदी पंचायत के या तो स्वयं सरपंच रहे या फिर उनकी पुत्रवधू सरपंच रह चुकी है। मरहूम गोदारा के पंचायत राज मे लम्बे समय तक सक्रिय रहने पर 2009 मे भिरत सरकार के पंचायत राज व ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दिल्ली मे देश के कुछ लोगो मे उन्हें शुमार करते हुये सम्मानित भी किया था। मरहूम गोदारा अपने जीवन भर इंसाफ व ईमानदाराना कार्यवाही करने के लिये मशहूर रहे है।
            जनपद के दोनो मरहूमीन के क्षेत्र मे बडी तादाद मे प्रशंसक मोजूद है। लेकिन कोराना-19 के चलते उनके परिवार जनो द्वारा सार्वजनिक उठावणा व नियमित बैठक नही करने के कारण उनके प्रशंसक उनकी अंतिम क्रियाओं मे शामिल होकर उन्हें श्रंद्धाजलि देने के बजाय अपने अपने घरो मे रहकर ही श्रंद्धाजलि अर्पित कर रहे है। हालांकि मरहूमीन के वजह से खाली हुये जगह को किसी द्वारा भरना तो नामुमकिन है। पर दोनो ही मरहूमीन अपने अपने पीछे तीन तीन पूत्र व बेटी व बेटीया छोड़कर गये है।


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