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शेखावाटी के मुस्लिम समुदाय के युवाओं का एक बडा तबका किधर जा रहा है!


सीकर।
           राजस्थान के शेखावाटी जनपद के मुस्लिम समुदाय की एक समय स्थिति ऐसी थी कि पहले घर घर फौजी व पुलिस मैन होना देखा जाता था। उसके बाद हर घर से एक ना एक पुरुष अरब मे मजदूरी कर बच्चों का पैट भरने के बाद फूरसत मिलने पर रहने के लिए मकान व शादी-भात व छूछक सहित अन्य रीतिरिवाज मे फिजूल खर्चा करता नजर आता था। उस समय मजदूरी का कमाया पैसा अच्छी तालीम पर खर्च नही होने का परिणाम आज अरब से रोजगार की हालत खस्ता होने पर लोगो के आसमान से गिरकर खजूर पर लटके समान नजर आ रहा है। रही सही हालात युवाओ मे आई भटकाव की मनोवृत्ति ने बिगाड़ कर रख दी है।
            समुदाय की बेटियां को अवसर मिलने या परिवार द्वारा उपलब्ध करवाने पर वो शानदार शतप्रतिशत रजल्ट देकर अपने कदम सकारात्मक दिशा मे बढाने से कतई नही चूक रही है। लेकिन समुदाय के युवाओ (बालकों) का  एक बडा तबका दिशाहीन होकर मिले अवसरो को गवांते हुये भटकाव की तरफ अग्रसर हो रहे है। जिसके कारण किशोरावस्था मे ही कुछ समय बाद वो भटकाव के चलते दिशाहीन होकर शराब-ब्याज खोरी व अवारागर्दी के साथ साथ भौतिक सूख पाने के घन चक्कर मे फंसकर जीवन को दलदल मे फंसाने को मजबूर होकर एक नकारा इंसान बनता जा रहा है।
              अधीकांश युवा शिक्षा से दूर रहने या फिर अच्छी शिक्षा नही मिलने के कारण सरकारी सेवा से वो कोसो दूर हो चुका है। हालात अगर यही रहे तो एक न एक दिन सरकारी सेवा मे मुस्लिम का नामो-निशान भी शायद नही रहै। सीकर जिले के राजस्व विभाग मे सेंकड़ो कर्मचारी व अधिकारी कार्यरत है। जिनमे फतेहपुर मे एक तहसीलदार, सीकर कलेक्ट्रेट मे दो कलर्क व एक मात्र सूचना कर्मचारी के अलावा तीन पटवारी/गिरदावर सेवारत है। पीछले एक साल से अनेक तरह की सरकारी भर्तियों मे आवेदन व परिक्षा परिणाम जारी हुये जीनमे मुस्लिम युवा नदारद रहे। हाल ही मे पटवारी व पुलिस की भर्ती के लिये आवेदन करने वालो के लिये झूंझुनू की रहबरे हिंद नामक संस्था ने फ्री कोचिंग का इंतजाम किया है। उस तंजीम की इस काम के लिये जितनी तारीफ की जाये वो कम होगी। दूसरी तरफ झूंझुनू के भारु गावं के इंजीनियर आरिफ अली Arif Ali Bharu द्वारा अपनी टीम के साथ मिलकर जो गाईडेंस का काम चालू रख रखा है उसके बेहतर परिणाम इंशाअल्लाह आने की उम्मीद है।
          कुछ अपवादों को छोड़कर अधीकांश युवाओं की आदत बनती जा रही है कि अपने जैहन की ताकत के विपरीत  अपने आपको अधिक उपर दिखने के लिए आमद से अधिक खर्च करके अपनी आर्थिक स्थिति को जर्जर बनाने के साथ ही वो एक समय महाजनी ब्याज कारोबारियों के बूने जाल मे फंसने कर आने वाली पीढी के राह मे भी रोड़ा बीछा रहे है। शराबनोशी व उसकी तस्करी, बलात्कार व लूट-खसोट एवं डकेती के अपराधियों मे मुस्लिम युवाओं के नाम अक्सर अखबारात मे आते रहते है। दूसरी तरफ मेहनत से जी चुराने के आदि हो चुके युवा खेती जोतने से दूर भागने लगे है। व्यापार उनका है नही जो व्यापार करते है वो भी बाजार से गली-मोहल्लों मे सींकूड़ने लगे है। समुदाय मे एक बहुत छोटा तबका जो शिक्षा की रस्सी को मजबूती व जदीद तरीकें से पकड़ चुका है उसके व जो हर तरफ पीछड़ता जा रहा है उसके मध्य बहुत बडी खाई होती जा रही है। भारत के मोजूदा हालात मे केंद्र सरकार की तरफ से राह मे कांटे बिछाये जाने की कोशिश का मुकाबला जिस तरह से हमारी काबिल व होनहार बेटियों ने अन्य वतनपरस्त बेटियों व माओ को साथ लेकर मुकाबला कर रही है उसके बाद तो यह लगने लगा है कि बेटो के साथ बेटियों के शिक्षा के क्षेत्र मे कदम बढाने पर भी मेहनत कर ली जाती तो आज अब के बदले सोगुणा अच्छे परिणाम मिलते। उम्मीद करनी चाहिए की यह होनहार व काबिल बेटियों के मार्फत इंशाअल्लाह हमारा मुस्तकबिल सुनहरा होगा।
             कुल मिलाकर यह है कि एक तरफ मरकजी सरकार मुस्लिम समुदाय को बेबुनियादी मुद्दों मे उलझाये रखकर उन्हें किसी अन्य सकारात्मक रास्ते की तरफ बढने व सोचने की फूरसत नही देना चाहती है। दूसरी तरफ समाज के धार्मिक व सियासी लीडरशिप भी अपनी ढपली अपन राग अलापने मे लगे हुये है। गिनती के अधिकारीगण भी अपने परिवार से बाहर निकल कर बेहतरीन आवश्यक शिक्षा के प्रति युवाओं मे ललक पैदा कर उनको आगे बढाने के लिये कोई ठोस काम करने मे सफल नही हो पा रहे है। युवाओं के ढिगते व दलदल मे फंसते कदमो की तरह समुदाय के जागरूक लोगो ने ध्यान देकर कोई कार्ययोजना बना कर उसपर अमल नही किया तो यह जहर बढता जायेगा एवं समस्याएं विकराल रुप लेकर समुदाय को दीमक की तरह धीरे धीरे चट कर जायेगी।


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