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रत्‍न और आभूषण क्षेत्र के लिए कोलकाता में अप्रैल 2020 तक सार्वजनिक सुविधा केन्‍द्र, एक लाख कारीगर लाभान्वित होंगे

कोलकाता के बऊ बाजार के इलाके में सार्वजनिक सुविधा केन्‍द्र (सीएफसी) बनाने के लिए 30.01.2020 को आयोजित एक अभूतपूर्व समारोह में वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार रूप दत्‍ता, रत्‍न और आभूषण निर्यात सवंर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्‍यक्ष प्रमोद अग्रवाल और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (जीजेईपीसी) और स्वर्ण शिल्पी बचाओ समिति (एसएसबीसी) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


सीएफसी के बनने से कोलकाता के प्रमुख आभूषण केंद्र बऊ बाजार और उसके आसपास हस्तनिर्मित आभूषणों के निर्माण में लगे एक लाख कारीगरों को लाभ मिलेगा। सीएफसी से विशेष रूप से कोलकाता रत्न और आभूषण क्लस्टर में उद्योग के कारीगरों के बीच आभूषण निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक की शुरुआत करके बऊ बाजार और उसके आसपास के इलाकों में छोटे रत्‍न और आभूषण इकाइयों में उत्पादों की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि होगी।


वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग की एमएसएमई की दक्षता बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर पहल की है। क्षेत्र के लिए व्यापार-अनुकूल नीतियों को शुरू करने के अलावा, मंत्रालय सीएफसी के रूप में बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से उद्योग को भी सुविधा प्रदान कर रहा है।


संबंधित विनिर्माण केन्‍द्रों के स्थानीय व्यापार संघ (एलटीए) की मदद से देश भर में सीएफसी की स्थापना सीमांत श्रमिकों के उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पादन को उन्नत बनाने में मदद करने के लिए रत्‍न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के माध्यम से की गई है। परिषद पहले ही गुजरात के प्रमुख हीरा समूहों जैसे अमरेली, पालनपुर, विसनगर और जूनागढ़ में सीएफसी स्थापित कर चुकी है। ये सीएफसी चालू हैं और एमएसएमई इकाइयों को निर्यात के योग्य बना दिया गया है। कोयम्‍बटूर में एक आभूषण सीएफसी भी स्थापित किया जा रहा है और इसके मार्च 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।


सीएफसी की स्थापना का उद्देश्य छोटी और मध्यम आभूषण निर्माण इकाइयों की सबसे महंगे उत्‍पादों को निर्दिष्‍ट करने और आधुनिक मशीनरी/उपकरण में बड़ी मात्रा में निवेश तक पहुंच प्रदान करना है जो अन्यथा व्यक्तिगत छोटे और मध्यम आभूषण निर्माताओं की पहुंच से बाहर है।


वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार रूपा दत्ता ने कहा कि देश भर में पचास लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले रत्‍न और आभूषणों का हर वर्ष 40 बिलियन अमरीकी डालर का निर्यात होता है। उन्‍होंने कहा कि इस उद्योग के बढ़ने की बहुत बड़ी संभावना है और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का उद्देश्य इस क्षेत्र में निर्यात को बढ़ाकर 2025 तक 75 बिलियन अमरीकी डालर तक ले जाना है।


उन्होंने कहा कि सीएफसी उन पहलों में से एक है जहां एमएसएमई इकाइयों के उत्पादों की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है और उन्हें निर्यात में योगदान देने योग्‍य बनाया जा रहा है।


वर्तमान में, छोटे शहरों जैसे कोयंबटूर, हैदराबाद, जयपुर, राजकोट और अंदरूनी गांवों में स्थित एसएमई इकाइयां अभी भी पुरानी तकनीक के साथ काम कर रही हैं और इससे तैयार माल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इन स्थानों पर कारीगर / सुनार थोक आभूषण निर्माता / खुदरा ज्वैलर्स काम करते हैं। वे आभूषण बनाने के लिए पुरानी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। कुछ इकाइयों में ही कास्टिंग तकनीक, फिनिशिंग तकनीक जैसे टम्बलिंग और मैग्नेटिक पॉलिशर जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। पुरानी तकनीकों का इस्‍तेमाल करके बेंच वर्क भी किया जाता है।


सीएफसी इस क्षेत्र में व्यापार को मजबूत करेगा और समग्र उत्पादकता, मुनाफा और समय पर वितरण बढ़ाएगा। यह एक ही स्‍थान पर अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सभी प्रकार की सेवाओं की पेशकश करके व्यापार को निरंतर जारी रखने योग्‍य बनाएगा। सीएफसी एसएमई के लिए अधिक राजस्व उत्पन्न करने में सहायक होगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का साधन होगा।


सीएफसी का प्रदर्शन










































सीएफसी



वर्ग फुट क्षेत्र



लाभान्वित



परिष्‍कृत हीरा



विसनगर



2398



50+



25 लाख



पालनपुर



2600



166+



23 लाख



अमरेली



1967



18+



6 लाख



जूनागढ़



1795



102+



4 लाख



कोयम्‍बटूर



मार्च, 2020 तक पूरा होने की संभावना



 



 



 


कोलकाता में आभूषण सार्वजनिक सुविधा केन्‍द्र के एक बार स्थापित हो जाने के बाद स्थानीय हस्तनिर्मित आभूषण क्षेत्र का मूल्यवर्धन करने में मदद मिलेगी और आभूषण निर्माता सर्वश्रेष्ठ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। कोलकाता में सीएफसी के इस वर्ष अप्रैल तक चालू होने की उम्मीद है।


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