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राजस्थान कांग्रेस के नो मुस्लिम विधायको का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर बजट मे कुछ अल्पसंख्यक उत्थान के बिन्दुओं को शामिल करने की अपील।


जयपुर।


               राजस्थान का राज्य बजट इसी हफ्ते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार द्वारा विधानसभा मे रखा जाने से पहले कांग्रेस पार्टी के सभी नो मुस्लिम विधायको ने मुख्यमंत्री से पूर्व मे उनके द्वारा की गई बजट घोषाओ को याद दिलाते हुये उन्हें आने वाले बजट मे पूरा करने की अपील की है।


              राजस्थान विधानसभा मे कांग्रेस के नीसान पर जीते आठ व बसपा से कांग्रेस मे आये एक मुस्लिम विधायक को मिलाकर अब कांग्रेस के सभी नो मुस्लिम विधायकों ने मुख्यमंत्री गहलोत से उनके द्वारा 2013-14 मे बजट मे राजस्थान के मुस्लिम बहुल इलाकों मे इक्कीस उच्च माध्यमिक आवासीय विधालय खोलने की घोषणा पर अमल करने की अपील की है। इसी तरह मदरसा पेरा टीचर्स को मिल रहे मानदेय 7602 रुपयो को बहुत कम बताते हुये उनके सभी चरणो वाले मदरसा पेरा टीचर्स का मानदेय अधिकाधिक बढाने की मांग भी की है।


           सभी विधायकों ने मुख्यमंत्री को उनकी 2013-14 के बजट घोषणाओं के तहत याद दिलाते हुये लिखा है कि सभी जिला मुख्यालयो सहित 23 अल्पसंख्यक बहुल उप खण्डो मे पृथक पृथक रुप से अल्पसंख्यक राजकीय बालक व बालिका छात्रावास खोलने की घोषणा पर क्रियान्वयन करने की अपील की है। मुख्यमंत्री को उक्त मामले मे पत्र लिखने वालो मे अल्पसंख्यक मामलात मंत्री शाले मोहम्मद, पूर्व मंत्री व विधायक आमीन खा, विधायक जाहीदा खान , विधायक सफीया, विधायक वाजिब अली, विधायक हाकम अली, विधायक आमीन कागजी, दानिश अबरार व विधायक रफीक के नाम शामिल है।


         राजस्थान मे भाजपा सरकार के समय आने वाले बजट मे मुस्लिम समुदाय के तालूक से घोषणाओं का ना होना आम बात है। लेकिन मुस्लिम मतो द्वारा कांग्रेस सरकार बनवाने के चलते मुस्लिम समुदाय सत्ता मे अपनी हिस्सेदारी मानकर चलते हुये कांग्रेस सरकार के समय आने वाले बजट मे उनके उत्थान के लिये घोषणाएं होने की उम्मीद रखता है। कांग्रेस सरकार के समय आने वाले बजट मे आज तक मुस्लिम समुदाय के तालूक से कुछ नई व अनेक रिपिट घोषणाएं होती है। पर उनमे से अधीकांश घोषणाएं मात्र घोषणाएं ही साबित होती रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उन्हीं की पार्टी के सभी नो मुस्लिम विधायको द्वारा पत्र लिखकर उनके द्वारा पूर्व मे की गई बजट घोषणाओं पर क्रियान्वयन करने की अपील अनेक सवाल खड़े करते है।


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