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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज भी अरविंद केजरीवाल नही बन पा रहे है!

जयपुर।


               जोड़तोड़ करके अलग अलग समय राजस्थान के तीसरी दफा मुख्यमंत्री बनने वाले अशोक गहलोत आज भी मुख्यमंत्री रहते हमेशा की तरह फिर से कांग्रेस को सत्ता मे लाकर मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना वर्तमान समय मे पैदा नही कर पा रहे है। जबकि उनके मुकाबले दिल्ली के मुख्यमंत्री केंद्र सरकारों के भारी राजनीतिक दवाब व पूर्ण राज्य का दर्जा नही होने के बावजूद लगातार तीसरी दफा सोलह फरवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे है।


                हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केजरीवाल के मुकाबले प्रदेश मे विकास व जनहित की योजनाओं के संचालन का अच्छा रिकॉर्ड कायम किया है। लेकिन उनके व उनकी सरकार द्वारा जनहित मे उठाये कदमो का लगातार पांच साल जनता के मध्य आम चर्चा नही हो पाई। जबकि कांग्रेस पार्टी वर्कर तो उनके उलट प्रचार करने से भी पीछे नही हटे। वो वर्कर स्वयं कहते रहे कि हम तो चुनाव हार रहे है। आगे हमारी सरकार नही आ रही है। वर्कर यहां तक भी कहने से चुकते नही है कि राजस्थान मे तो पांच साल यह व पांच साल वो सरकार। इसके मुकाबले केजरीवाल के वर्कर पूरे पांच साल सरकार द्वारा स्कूल, मोहल्ला क्लिनिक, महिलाओं को मुफ्त बस-मेट्रो सेवा सहित अन्य जनहित कारी कदमो की पूरे पांच साल हर दिन हर जगह लगातार चर्चा करते रहे। अपने हित के मुद्दे को बनाये रखने के साथ ही केजरीवाल की उजली छवि बनाये रखने की भरपूर कोशिश की।


              मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिये बोला जाता है कि वो मुख्यमंत्री बनने की तो खूब कोशिश-जोरतोड़  व जल्दबाजी करते है। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के लिये राजनीतिक व संवैधानिक पदो पर की जाने वाली नियुक्तियों मे बहुत ही देरी व कंजूसी बरतते है। जब यह राजनीतिक नियुक्तियां करते है तब तक वो काफी बासी हो जाती है। उससे कार्यकर्ताओं व नेताओं मे सत्ता मे अपनी भागीदारी नही मिलने से उनमे निराशा का भाव पैदा होता है। निराशाजनक स्थिति मे वो उदासी उदासी की बात करते है। उनका सरकार की उपलब्धियों का जनता मे बखान करने का मन नही करता। वो भी दबी जूबान से सरकार ठीक से नही चलने की बात करने लगते है। जिससे सरकार के खिलाफ वातावरण बनने लगता है। उसका परिणाम पार्टी के आगामी चुनाव मे हार का तमगा तैयार होता है। जबकि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता व नेता हमेशा हरदम सरकार की उपलब्धियों की लगातार चर्चा कर करके सरकार की छवि उजली बनाने पर मेहनत करते रहते है।


 


 


 


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