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दूरसंचार कंपनियों पर लाइसेंस शुल्क का 22,589 करोड़ रुपये बकाया, शेष ब्याज, जुर्माना

नयी दिल्ली, ::  दूरसंचार कंपनियों पर लाइसेंस शुल्क के रूप में 22,589 करोड़ रुपये का बकाया है। जबकि ब्याज और जुर्माने के साथ कुल देनदारी 92,641 करोड़ रुपये बैठती है।


कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) में बड़ा हिस्सा लाइसेंस शुल्क का है। सरकार का यह बकाया दूरसंचार क्षेत्र में परिचालन करने वाली और गैर-परिचालन वाली दोनों तरह की कंपनियों के ऊपर जुलाई 2019 तक का है।


दूरसंचार विभाग के अनुमान के अनुसार लाइसेंस शुल्क के अलावा दूरसंचार कंपनियों पर 55,054 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का बकाया है।


सूत्रों के अनुसार दूरसंचार कंपनियां उच्चतम न्यायालय के एजीआर बकाये पर आदेश के अनुपालन को लेकर संघर्ष कर रही है जबकि लाइसेंस शुल्क को लेकर उनकी वास्तविक बकाया देनदारी 22,589 करोड़ रुपये है।


कुल 92,641 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क बकाये में शेष 74 प्रतिशत राशि ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज के कारण है।


दूरसंचार विभाग द्वारा जुलाई 2019 में तैयार आकलन के अनुसार लंबित मूल लाइेंसस शुल्क में से परिचालन कार्य में लगी दूरसंचार कंपनियों पर संयुक्त रूप से 16,746 करोड़ रुपये का ही बकाया है।


भारती एयरटेल पर लाइसेंस शुल्क का बकाया 5,528.52 करोड़ रुपये, वोडाफोन आइडिया पर 6,870.69 करोड़ रुपये, टाटा समूह पर 2,321.31 करोड़ रुपये, टेलीनोर (अब एयरटेल के साथ विलय) 529.02 करोड़ रुपये, बीएसएनएल पर 614 करोड़ रुपये और एमटीएनएल पर 876.39 करोड़ रुपये बैठता है।


एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘‘ये अनुमान जुलाई में तैयार किये गये थे। नया आकलन किया जा रहा है।’’


इस बीच, भारती एयरटेल ने लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क मद में 10,000 करोड़ रुपये, वोडाफोन आइडिया ने 3,500 करोड़ रुपये और टाटा समूह 2,197 करोड़ रुपये भुगतान कर चुके हैं।


एक अन्य सूत्र ने पीटीआई- भाषा से कहा कि दूरसंचार विभाग ने पाया कि सर्किल कार्यालयों ने समान प्रक्रिया नहीं अपनाई और एजीआर बकाया के आकलन में दूरंसचार परिचालकों ने अपने अनुकूल आंकड़े दिये।


दूरसंचार विभाग ने तीन फरवरी को संचार लेखा महानियंत्रक को दिशानिर्देश के साथ पत्र जारी कर एजीआर बकाया का मिलान करने और उन्हें परिचालकों को कटौती के लिये अपील और दस्तावेज देने के लिये 15 दिन का समय देने को कहा गया था।


एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘‘लाइसेंस शुल्क या इसके तहत अन्य कोई बकाया के भुगतान में किसी प्रकार की देरी पर ब्याज लगेगा। यह ब्याज एसबीआई के प्रधान उधारी दर से दो प्रतिशत अधिक होगा।’’ इसके अलावा समय पर जरूरी राशि भुगतान नहीं होने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था।


दूरसंचार विभाग के कुल बकाया के अनुमानों के अनुसार एयरटेल पर करीब 35,586 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के साथ बकाया राशि पर जुर्माना और ब्याज शामिल हैं।


वहीं वोडाफोन आइडिया पर करीब 50,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसी प्रकार टाटा टेलीसर्विसेज पर 11,600 करोड़ रुपये, बीएसएनएल पर 4,989 करोड़ रुपये और एमटीएनएल पर 3,122 करोड़ रुपये का बकाया है।


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