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दिल्ली चुनावों में भाजपा के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण पर क्या केजरीवाल का विकास पड़ेगा भारी ?

जयपुर।


           आगामी आठ फरवरी को दैश की राजधानी दिल्ली मे विधानसभा चुनाव के लिये मतदान होने से पहले आम आदमी पार्टी से सत्ता छीनने के लिये भाजपा के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वाला आखिरी हथियार को इस्तेमाल करने के बावजूद केजरीवाल से सत्ता छीनना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा । वर्तमान विधानसभा मे तीन सदस्य वाली भाजपा प्रधानमंत्री मोदी व ग्रह मंत्री शाह सहित अपने केन्द्रीय मंत्री व मुख्यमंत्रियों के भारी जमावड़े के एक साथ दिल्ली मे चुनाव प्रचार करने व कुछ नेताओं के साम्प्रदायिक भाषाओं के मार्फत मतो मे बंटवारा करने की कोशिश के बावजूद भाजपा की डगर आसान नहीं है।


          पीछले दिल्ली विधानसभा चुनाव मे कुल 70 सीटो मे से 67 सीट पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा किया था। एवं मित्र तीन सीट पर भाजपा के उम्मीदवार चुनाव जीत पाये थे। कांग्रेस का खाता भी नही खुल पाया था। कांग्रेस आज भी चुनावो मे सांप निकलने के बाद लकीर  पीटने वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है। भाजपा के फेवर मे एक तरफ गोदी मीडिया माहोल बनाने की कोशिशें कर रहा है एवं दूसरी तरफ केन्द्रीय मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों के अलावा मोदी व शाह केजरीवाल के स्वयं पर व उनकी सरकार पर लगातार हमले करके उनको हराने की कोशिश कर रहे है। इसके विपरीत केजरीवाल सरकार के विकास के रिकॉर्ड व आम दिल्ली वासी तक उसकी एवं आम आदमी पार्टी की पहुंच के सामने भाजपा का हर हथियार कमजोर पड़ता जा रहा है।


         दिल्ली मे छ फरवरी शाम तक चुनाव प्रचार होना है। उससे पहले तक एक राजनीतिक दल द्वारा किसी भी तरह की अफवाह फैलाकर या फिर शाहीनबाग के बहाने साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर सकती है। लेकिन आम आदमी के कार्यकर्ता काफी चोकन्ने रहकर विरोधी दल की हर हरकत को असफल करने मे कोई कसर नही छोड़ रहे है। केजरीवाल सरकार की पान-बिजली व स्कूल के अलावा अस्पताल जैसी सफल योजनाओ के सामने भाजपा का हर पैंतरा कमजोर नजर आता है। सीएए-एनपीआर व एनआरसी का मुद्दा भी केजरीवाल की सफल योजनाओं के सामने भाजपा के काम नही आ पा रहे है। भाजपा के दो केन्द्रीय मंत्रियों व एक सांसद द्वारा भड़काऊ भाषण देने के अतिरिक्त शाहीनबाग व जामीया क्षेत्र मे आंदोलनरत महिलाओं व छात्रो पर गोलियां चलने की घटनाओं के बाद भी जब दिल्ली का मतदाता आक्रोशित नही हो पाने के बाद लगने लगा कि केजरीवाल विरोधी मतदान तक कोई हरकत करने की कोशिश कर सकते है।


                 कुल मिलाकर यह है कि भाजपा के लिए प्रधानमंत्री सहित उनकी केबिनेट सदस्यों के अलावा सेंकड़ो सांसद व एनडीऐ के मुख्यमंत्रियों सहित अनेक पार्टी नेता दिल्ली चुनाव के प्रचार मे उतर कर उनके द्वारा अंतिम हथियार के तौर पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने की भरसक कोशिश के बावजूद उनकी सीटों में बढ़ोतरी होगी यह कहना मुश्किल है। । कांग्रेस के अनेक दिग्गज नेताओं के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा सहित अनेक नेताओं के प्रचार करने के बावजूद उनके प्रदर्शन में कितना सुधार होगा ये भी देखने वाली बात होगी ।


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