देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद की पुण्य तिथि पर आयोजित हुई संगोष्ठी


लखनऊ : देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद  की पुण्य तिथि पर  संगोष्ठी  का आयोजन हुआ , संगोष्ठी मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी की तरफ से आयोजित की गई। संगोष्ठी में मुख्यातिथि की तौर पर पूर्व आई.पी.एस  शैलेंद्र सागर शामिल हुए तो कार्यक्रम की सदारत सय्यद सग़ीर अहमद ( वरिष्ठ समाजसेवी ) ने की वही कार्यक्रम का संचालन क़ुद्दूस हाश्मी ने किया।



कार्यक्रम में देश के  पहले शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना आज़ाद के जीवन और उनके द्वारा किए गए कार्यो पर प्रकाश डाला गया साथ ही हिन्दू मुस्लिम सदभावना और सौहार्द को लेकर मौलाना आज़ाद द्वारा किए कार्यो को भी याद किया गया।



कार्यक्रम में बोलते हुए वरिष्ठ समाजसेवी सय्यद सग़ीर अहमद ने कहा कि मौलाना आज़ाद ने देश की आज़ादी में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश के निर्माण में अहम योगदान दिया।  मौलाना आज़ाद ने  सिर्फ पाकिस्तान को नाकारा बल्कि भारत के मुस्लिमो से भी पाकिस्तान न जाने की अपील की।  सग़ीर साहब ने बताया कि पंडित जवाहर लाल नेहरू मौलाना आज़ाद का बहुत ही सम्मान करते थे और जब मौलाना आज़ाद इस दुनिया से रुक्सत हुए तो पंडित नेहरू बहुत दुखी हुए थे और मौलाना की अंतिम यात्रा में पंडित नेहरु न सिर्फ शरीक हुए बल्कि मौलाना आज़ाद को पंडित नेहरू ने अपने हाथों से क़ब्र में उतरा।


मौलाना आज़ाद के 62 वी पुण्य तिथि पर आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और मौलाना की ज़िन्दगी पर रौशनी डाली। कार्यक्रम में रिटायर्ड जज बी.डी.नक़वी , वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी , शशि कांत पांडेय (एच.ओ.डी अम्बेडकर यूनिवर्सिटी ) नवीन तिवारी , शारिक अल्वी , प्रोफेसर साबरा , राजनाथ शर्मा , डॉ सीमा सिद्दीक़ी आदि ने भी सम्बोधित किया और अपने विचार रखे।


 


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