सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

भारी भरकम आंकड़ों की बाजीगरी है बजट: अजय कुमार लल्लू


लखनऊ :: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  अजय कुमार लल्लू  ने प्रदेश की योगी सरकार द्वारा आज विधानसभा में आज प्रस्तुत आम बजट 2020-21 को आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए युवाओं और किसानों के लिए घोर निराशाजनक और धोखा करार दिया है।



प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 450 रूपये प्रति कुन्तल गन्ने का मूल्य देने की घोषणा करके सत्ता में आने वाली भाजपा तीन वर्षों में मात्र गन्ने के मूल्य में 10 रूपये की ही वृद्धि कर पायी है। 


युवा बेरोजगारों जिनकी तादात पिछले दो वर्षों में 12.5 लाख बढ़ गयी, 21 लाख 39 हजार 811 के मुकाबले 33 लाख 93 हजार 330 (सरकार द्वारा विधानसभा में की गयी घोषणा के मुताबिक) नये रोजगार देने के बजाए आज के बजट में रिटायर्ड शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में नौकरी देने की घोषणा बेरोजगार युवाओं के साथ विश्वासघात है। वहीं कौशल विकास योजना भी छलावा साबित हुई। 


18 मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की घोषणा भी झूठ का पुलिन्दा है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 राजीव गांधी जी द्वारा घोषित नवोदय विद्यालय को खत्म करने की साजिश है क्योंकि न तो इसमें बजट ही बढ़ाया गया है उसके मुकाबले फीस वृद्धि और सुविधाएं घटायी गयीं हैं।


  कृषि पर लागत कम करने, खाद, बीज, पानी, कृषि यन्त्र, कीटनाशक, बिजली आदि के दामों में कमी का कोई प्रावधान बजट में नहीं किया गया है और न ही दूसरे राज्यों की भांति जैसे छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि राज्यों में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित कृषि उत्पादित गेहूं, धान एवं तिलहन की फसलों के मूल्य पर प्रति कुंतल दो सौ रूपये से लेकर पन्द्रह सौ रूपये तक बोनस देने का प्रावधान है, इसे प्रदेश सरकार ने बजट में कोई महत्व नहीं दिया है, जबकि पिछले तीन वर्षों में इन अनिवार्य कृषि उपयोग की चीजों के दामों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। 


3200 रूपये प्रति कुंतल गेहूं का मूल्य होना चाहिए था जो नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त किसान आयोग का गठन तथा खेतों में रखवाली करने वालों के लिए भत्ता का भी कोई प्राविधान नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों की आय दुगुनी करने की घोषणा किसानों के साथ क्रूर मजाक और धोखा है।


शिक्षा मित्र, आंगनबाड़ी, रसोइयां, आशा बहू, रोजगार सेवक, चैकीदार, होमगार्ड, अनुदेशक एवं मदरसा शिक्षकों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है जो अत्यन्त निराशाजनक है। 


शिक्षा बजट में ‘व्यापक कटौती’ पिछले बजट 2019-20 में कुल 48044 करोड़ की घोषणा हुयी थी जबकि इस बजट में 18633 करोड़ रुपये की घोषणा की गयी है, यह शिक्षा के बाजारीकरण का संकेत है वहीं आयुष्मान येाजना में बजट का आवंटन न करना निजीकरण को बढ़ावा देने जैसा है। 


महिलाओं की सुरक्षा के लिए मात्र 20 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है इससे पूरे प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा कैसे हो पायेगी। एसिड अटैक एवं रेप पीड़ित महिलाओं के लिए बजट में कोई सहायता राशि का प्रावधान नहीं है। 


बजट पूरी तरह प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के जले पर नमक छिड़कने जैसा है। 

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वक्फबोर्ड चैयरमैन डा.खानू की कोशिशों से अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये जमीन आवंटन का आदेश जारी।

         ।अशफाक कायमखानी। चूरु।राजस्थान।              राज्य सरकार द्वारा चूरु शहर स्थित अल्पसंख्यक छात्रावास के लिये बजट आवंटित होने के बावजूद जमीन नही होने के कारण निर्माण का मामला काफी दिनो से अटके रहने के बाद डा.खानू खान की कोशिशों से जमीन आवंटन का आदेश जारी होने से चारो तरफ खुशी का आलम देखा जा रहा है।            स्थानीय नगरपरिषद ने जमीन आवंटन का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजकर जमीन आवंटन करने का अनुरोध किया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा कार्यवाही मे देरी होने पर स्थानीय लोगो ने धरने प्रदर्शन किया था। उक्त लोगो ने वक्फ बोर्ड चैयरमैन डा.खानू खान से परिषद के प्रस्ताव को मंजूर करवा कर आदेश जारी करने का अनुरोध किया था। डा.खानू खान ने तत्परता दिखाते हुये भागदौड़ करके सरकार से जमीन आवंटन का आदेश आज जारी करवाने पर क्षेत्रवासी उनका आभार व्यक्त कर रहे है।  

नूआ का मुस्लिम परिवार जिसमे एक दर्जन से अधिक अधिकारी बने। तो झाड़ोद का दूसरा परिवार जिसमे अधिकारियों की लम्बी कतार

              ।अशफाक कायमखानी। जयपुर।             राजस्थान मे खासतौर पर देहाती परिवेश मे रहकर फौज-पुलिस व अन्य सेवाओं मे रहने के अलावा खेती पर निर्भर मुस्लिम समुदाय की कायमखानी बिरादरी के झूंझुनू जिले के नूआ व नागौर जिले के झाड़ोद गावं के दो परिवारों मे बडी तादाद मे अधिकारी देकर वतन की खिदमत अंजाम दे रहे है।            नूआ गावं के मरहूम लियाकत अली व झाड़ोद के जस्टिस भंवरु खा के परिवार को लम्बे अर्शे से अधिकारियो की खान के तौर पर प्रदेश मे पहचाना जाता है। जस्टिस भंवरु खा स्वयं राजस्थान के निवासी के तौर पर पहले न्यायीक सेवा मे चयनित होने वाले मुस्लिम थे। जो बाद मे राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस पद से सेवानिवृत्त हुये। उनके दादा कप्तान महमदू खा रियासत काल मे केप्टन व पीता बक्सू खां पुलिस के आला अधिकारी से सेवानिवृत्त हुये। भंवरु के चाचा पुलिस अधिकारी सहित विभिन्न विभागों मे अधिकारी रहे। इनके भाई बहादुर खा व बख्तावर खान राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी रहे है। जस्टिस भंवरु के पुत्र इकबाल खान व पूत्र वधु रश्मि वर्तमान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के IAS अधिकारी है।              इसी तरह नूआ गावं के मरह

पत्रकारिता क्षेत्र मे सीकर के युवा पत्रकारों का दैनिक भास्कर मे बढता दबदबा। - दैनिक भास्कर के राजस्थान प्रमुख सहित अनेक स्थानीय सम्पादक सीकर से तालूक रखते है।

                                         सीकर। ।अशफाक कायमखानी।  भारत मे स्वच्छ व निष्पक्ष पत्रकारिता जगत मे लक्ष्मनगढ निवासी द्वारा अच्छा नाम कमाने वाले हाल दिल्ली निवासी अनिल चमड़िया सहित कुछ ऐसे पत्रकार क्षेत्र से रहे व है। जिनकी पत्रकारिता को सलाम किया जा सकता है। लेकिन पिछले कुछ दिनो मे सीकर के तीन युवा पत्रकारों ने भास्कर समुह मे काम करते हुये जो अपने क्षेत्र मे ऊंचाई पाई है।उस ऊंचाई ने सीकर का नाम ऊंचा कर दिया है।         इंदौर से प्रकाशित  दैनिक भास्कर के प्रमुख संस्करण के सम्पादक रहने के अलावा जयपुर सीटी भास्कर व शिमला मे भास्कर के सम्पादक रहे सीकर शहर निवासी मुकेश माथुर आजकल दैनिक भास्कर के जयपुर मे राजस्थान प्रमुख है।                 दैनिक भास्कर के सीकर दफ्तर मे पत्रकारिता करते हुये उनकी स्वच्छ व निष्पक्ष पत्रकारिता का लोहा मानते हुये जिले के सुरेंद्र चोधरी को भास्कर प्रबंधक ने उन्हें भीलवाड़ा संस्करण का सम्पादक बनाया था। जिन्होंने भीलवाड़ा जाकर पत्रकारिता को काफी बुलंदी पर पहुंचाया है।                 फतेहपुर तहसील के गावं से निकल कर सीकर शहर मे रहकर सुरेंद्र चोधरी के पत्रका