नयी दिल्ली, : भाजपा ने रक्षा मामलों संबंधी एक संसदीय समिति में पार्टी सांसद प्रज्ञा ठाकुर को शामिल किये जाने के फैसले पर कांग्रेस की आपत्ति और इसे सुरक्षा बलों का अपमान बताये जाने को देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल की नासमझी का सबसे बड़ा प्रमाण करार दिया है।
आतंकवाद के मामले में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को एक संसदीय समिति में शामिल करने पर कांग्रेस द्वारा सवाल उठाये जाने को लेकर भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने प्रतिक्रिया में बृहस्पतिवार को कहा, ''कांग्रेस और राहुल गांधी की नासमझी का यह सबसे बड़ा प्रमाण है। प्रज्ञा ठाकुर भोपाल से चुनाव जीतकर आयी हैं। वह सांसद हैं। सांसद होने के नाते समितियों में सदस्य चुना जाना उनका अधिकार है।''
नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आरोपी बनाये जाने का हवाला देते हुये सिन्हा ने कहा, ''सांसद होने के नाते प्रज्ञा ठाकुर के वही अधिकार हैं जो सोनिया और राहुल गांधी के हैं। प्रज्ञा ठाकुर और सोनिया गांधी में अगर अंतर करेंगे तो मैं यही कह सकता हूं कि सोनिया गांधी नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर हैं, क्या वह सभी संसदीय समितियों से इस्तीफा देंगी।''
राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और नागरिकता कानून में धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुये उच्च सदन में विपक्षी दलों के हंगामे पर सिन्हा ने कहा, देश को 'धर्मशाला' बनाकर रखने वाली कांग्रेस को मैं बताना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जो नागरिक नहीं हैं, जो अवैध तरीके से भारत आये हैं, उन सभी पर कार्रवाई की जायेगी।''
उन्होंने प्रस्तावित नागरिकता कानून में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव के आरोपों के जवाब में कहा, ''जेहादी और घुसपैठिये अल्पसंख्यक नहीं है। यदि कांग्रेस का प्रेम रोहिंग्या और बांग्लादेश से आये घुसपैठियों के प्रति है तो मैं क्या कह सकता हूं।''
वक़्फ़ संशोधन बिल के विरोधियों को लखनऊ पुलिस द्वारा भेजा गया नोटिस असंवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट ले एक्शन- शाहनवाज़ आलम
नयी दिल्ली, 11 अप्रैल 2025 . कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ विचार रखने वाले नागरिकों के संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आज़ादी और विरोध करने के मौलिक अधिकारों के हनन करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसलों की अवमानना पर स्वतः संज्ञान लेकर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाई की मांग की है. शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि लखनऊ के कई नागरिकों को लखनऊ पुलिस द्वारा उनकी तरफ से वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ़ होने वाले संभावित प्रदर्शनों में शामिल होने का अंदेशा जताकर उन्हें नोटिस भेजा गया है. जबकि अभी नागरिकों की तरफ से कोई विरोध प्रदर्शन आयोजित हुआ भी नहीं है. सबसे गम्भीर मुद्दा यह है कि इन नोटिसों में नागरिकों को अगले एक साल तक के लिए उनसे शांति भंग का खतरा बताते हुए 50 हज़ार रुपये भी जमा कराने के साथ इतनी धनराशि की दो ज़मानतें भी मांगी जा रही हैं. शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यूपी पुलिस यह कैसे भूल सकती है कि उसकी यह कार्यवाई संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है जो नागर...
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