मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या मसले में दायर करेगा रिव्यु पिटीशन

लखनऊ : आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनऊ के मुमताज़ कॉलेज में हुई बैठक जिसमे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की  चारों महिला मेंबरान डॉ आसमा ज़हरा, निगहत परवीन खान, देहली की ममदुहा माजिद, आमना रिजवाना भी हुई शामिल , मौलाना वाली रहमानी, जलालुद्दीन उमरी, मौलाना अतीक बस्तवी, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, असदुद्दीन ओवैसी , मौलाना अरशद मदनी जमीयत उलेमा ए हिंद, जफरयाब जिलानी, फजलुररहीम मुजद्दीदी, ईटी मोहम्मद रशीद सांसद मुस्लिम लीग केरला, यासीन अली उस्मानी, सआदत उल्लाह हुसैनी जमात ए इस्लामी हिंद, आरिफ मसूद विधायक भोपाल समेत अन्य मेंबरान मौजूद रहे 45 मेंबर आज की AIMPLB की मीटिंग में शरीक हुए। 


मीटिंग के बाद बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा हम लोग रिव्यू रिटर्न फाइल करेंगे ,जो कोर्ट ने 5 एकड़ जमीन देने की बात कहीं उसको हम एक्सेप्ट नहीं करेंगे। 


 आपको अवगत करा दें 16 दिसम्बर 1949 में बाबरी मस्जिद में आखिरी नमाज़ पढ़ी गई थी ये बात सुप्रीम कोर्ट भी मान चुकी है।  मस्जिद के बदले में कोई भी चीज नहीं ली जा सकती शरीयत इस बात की इजाजत नहीं देता कि मस्जिद की जगह हम दूसरी जमीन ले सके।  कोर्ट ने ये भी माना था कि बाबरी मस्जिद का गिराया जाना असंवैधानिक था। कोर्ट ने माना है कि किसी मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद नहीं बनाई गई है। 


क्योंकि एक बार जहां मस्जिद बन जाती है वहां मस्जिद हमेशा रहती है।  उसे स्थानन्तरित नहीं किया जा सकता है। इसलिए हम 5 एकड़ जमीन लेने से इनकार करते हैं। 


और जहां तक कोर्ट द्वारा 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को देने की बात है, तो हमें लगता है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड भी हमारे डिसीजन के साथ रहेगा क्योंकि वो भी सरई नियमों के खिलाफ नहीं जाएगा।


जफरयाब जिलानी मौलाना महफूज रहमान, मोहम्मद उमर और मिसबाहुद्दीन तीन लोग रिव्यू पिटीशन फाइल करेंगे। हमारी इबादतगाह तबाह न हो   इसको लेकर रिविव पिटीशन दाखिल करेंगे। 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


 


में ये फैसला लिया गया कि अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बोर्ड संतुष्ट नही है । और बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डालेगा इस बात की जानकारी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी । वही बोर्ड के सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने बैठक के बाद जाते जाते कहा कि हमे पता है हमारी याचिका 100 फीसदी खारिज होगी लेकिन संविधान से प्राप्त अधिकार का प्रयोग करते हुए हम याचिका दाखिल करेगे ।


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