21 फरवरी को होगा राज्यपाल की पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ के सिंधी संस्करण का लोकार्पणहोगा

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ के सिंधी संस्करण का लोकार्पण सिंधी काउंसिल आॅफ इण्डिया द्वारा 21 फरवरी, 2019 को शिव शांति आश्रम, आलमबाग, लखनऊ किया जायेगा। लोकार्पण समारोह में राज्यपाल श्री राम नाईक सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, पूर्व मंत्री डाॅ0 अम्मार रिज़वी मुख्य अतिथि तथा साईं चाण्ड्रू राम साहिब जी, श्री मोहन दास लधानी राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंधी कांउसिल आॅफ इण्डिया सहित अन्य पदाधिकारीगण भी उपस्थित रहेंगे। इसी क्रम में राज्यपाल श्री राम नाईक की पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ के अरबी एवं फारसी संस्करण का लोकार्पण 22 फरवरी, 2019 को इण्डिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर, नई दिल्ली में किया जायेगा तथा जर्मन अनुवाद के लोकार्पण की तिथि शीघ्र घोषित की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल के संस्मरणों पर आधारित मूल मराठी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का लोकार्पण 25 अप्रैल, 2016 को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडनवीस द्वारा किया गया था। तत्पश्चात् 9 नवम्बर, 2016 को पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ का हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू एवं गुजराती भाषा में लोकार्पण राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में किया गया जिसमें मंच पर उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, केन्द्रीय मंत्री श्री वेंकैया नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद श्री शरद पवार वक्ता के रूप में विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी क्रम में 11 नवम्बर, 2016 को राजभवन उत्तर प्रदेश में पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ के हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू संस्करण का लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह व कांग्रेस के पूर्व मंत्री डाॅ0 अम्मार रिज़वी ने किया तथा 13 नवम्बर, 2016 को मुंबई में गुजराती भाषा में लोकार्पण केन्द्रीय मंत्री पुरषोत्तम रूपाला द्वारा किया गया। 26 मार्च 2018 को संस्कृत नगरी काशी में राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के संस्कृत संस्करण का लोकार्पण किया गया। पुस्तक ‘चरैवेति!चरैवेति!!’ अब तक 6 भाषाओं, मराठी, हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती एवं संस्कृत में प्रकाशित हो चुकी है। सिंधी, अरबी, फारसी और जर्मन के प्रकाशन के बाद पुस्तक 10 भाषाओं में उपलब्ध होगी।

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