लखनऊ, 3 जनवरी: अहमद हसन वेलफेयर ट्रस्ट, लखनऊ की ओर से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री स्व अहमद हसन की 92वीं जयंती के अवसर पर परिवारजनों द्वारा मदरसों में क़ुरआन ख़्वानी और ईसाल-ए-सवाब किया गया।
ट्रस्ट की ओर से “अहमद हसन: जीवन और व्यक्तिव” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पुलिस विभाग के उनके पुराने साथी श्री शारिक़ अलवी ने की।
वेबिनार में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ट्रस्ट के संयोजक और अहमद हसन के क़रीबी सहयोगी डॉ. अब्दुल क़ुद्दूस हाशमी ने कहा कि अहमद हसन साहब अनेक गुणों के मालिक होने के बावजूद कभी अपने व्यक्तित्व-प्रचार में रुचि नहीं रखते थे। वे एक निडर, साहसी और न्यायप्रिय पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ एक ईमानदार और समर्पित राजनीतिक नेता भी थे।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शासन स्तर पर आम जनता, अल्पसंख्यकों, विशेषकर पिछड़े पसमांदा मुसलमानों के अधिकारों की बहाली के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने मुलायम सिंह हुकूमत में बुनकरों को फ़्लैट रेट पर बिजली उपलब्ध कराई, अखलेश यादव जी के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश को पोलियो जैसी घातक बीमारी से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा मंत्री के रूप में दर-दर भटक रहे हज़ारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति कराकर एक मिसाल कायम की।
मुख्य अतिथि, ईदगाह के इमाम मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली ने अहमद हसन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक कर्तव्यनिष्ठ और वफ़ादार पुलिस अधिकारी थे। जिस भी ज़िले में वे रहे, वहाँ उन्होंने ज़िले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने सांप्रदायिक विवादों को हमेशा निष्पक्ष ढंग से सुलझाया। पुलिस विभाग में उन्हें एक आदर्श पुलिस अधिकारी के रूप में याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा उन्होंने
स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री के रूप में भी उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान कीं। आज सरकारी स्कूलों में जो उर्दू शिक्षक हम देखते हैं, वह उनकी एक महान उपलब्धि है। उन्हें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव का पूरा विश्वास और भरोसा प्राप्त था।
लखनऊ के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुरेंद्र नाथ सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी चिकित्सकीय सेवा के दौरान अहमद हसन जैसा ईमानदार मंत्री नहीं देखा। वे ग़रीबों के सच्चे मसीहा थे। उन्होंने प्रदेश के सभी अस्पतालों को मानकयुक्त बनाया और हर अस्पताल में उच्च गुणवत्ता की निःशुल्क दवाइयों और ऑपरेशन की व्यवस्था की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जौनपुर से शिक्षाविद् डॉ. क़दीर ख़ान ने अहमद हसन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अहमद हसन उन सफल अधिकारियों और राजनेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके जाने के बाद यह एहसास हुआ कि हमने एक फ़रिश्ता-सिफत के इंसान को खो दिया।
जब मैं आज की राजनीतिक ज़िंदगी का मूल्यांकन करता हूँ और ऐसे नेताओं व मंत्रियों को देखता हूँ जिनके पास जनता और क्षेत्र के लोगों के दुःख-दर्द सुनने का समय नहीं होता, तो अहमद हसन जैसे राजनीतिक नेता की कमी अधिक महसूस होती है, जिनके घर के सामने ग़रीब, बेसहारा और ज़रूरतमंद लोगों की हमेशा भीड़ लगी रहती थी। ग़रीब-परवर और मानवतावादी अहमद हसन जैसा नेता आज पूरे भारत में कहीं नज़र नहीं आता।
उन्होंने यह शेर पढ़ा: हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पर रोती रहती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा।
अध्यक्ष श्री शारिक़ अलवी ने कहा कि अहमद हसन उनके उन साथियों में से थे, जब वर्ष 1959 में वे दोनों मुरादाबाद में पुलिस प्रशिक्षण एक साथ प्राप्त कर रहे थे, जो आगे चलकर घनिष्ठ संबंधों में बदल गया। उन्होंने पुलिस सेवा में अत्यंत ईमानदार और सत्यनिष्ठ अधिकारी की पहचान बनाई। अहमद हसन अपनी ईमानदारी, परिश्रम, सौम्य स्वभाव और राष्ट्रीय भावना के कारण प्रसिद्ध थे। ईश्वर उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए।
अंत में इक़रा पब्लिक स्कूल, बिजनौर (लखनऊ) में ठंड से परेशान ज़रूरतमंदों के बीच राशन और कंबलों का वितरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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