
नयी दिल्ली, 11 जनवरी 2026. देश की सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह विफल देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ख़ुद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए ख़तरा बन गए हैं. उनकी भाषा युवाओं को दंगाई बनाने वाली है. उन्हें पद से तत्काल इस्तीफ़ा दे देना चाहिए या सरकार को उन्हें पद से हटा देना चाहिए.
ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 229 वीं कड़ी में कहीं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि अजीत डोभाल ने पिछले दिनों बच्चों को मध्ययुग की काल्पनिक हिंदू उत्पीड़न की कहानियाँ सुनायीं और उन्हें ‘बदला’ लेने को उकसाया. उन्होंने यह झूठ भी परोसा कि मोदी सरकार में देश अपने इतिहास में सबसे मजबूत हुआ है. जबकि सच्चाई यह है कि ट्रम्प रोज़ मोदी जी के डरपोक होने का फ़ायदा उठाकर भारत को अपमानित कर रहे हैं. ट्रम्प से मिलने के लिए मोदी जी को बिचौलियों को पैसा देकर सिफारिश करवानी पड़ रही है. जबकि इंदिरा गांधी जी से अमरीकी राष्ट्रपति सम्मान से बात करते थे और राजीव गांधी का स्वागत करने अमरीकी राष्ट्रपति छाता लेकर आते थे. उनके प्रति यह सम्मान उनके व्यक्तित्व के साथ-साथ भारत के प्रति दिखाया गया सम्मान होता था क्योंकि उन्हें इंदिरा और राजीव जी की लोकप्रियता और साहस का भी अंदाज़ा था. वहीं दूसरी ओर ट्रम्प मोदी जी का अपमान इसलिए करते हैं कि उन्हें पता है कि मोदी चुनावी धांधली से वोट चुरा कर पीएम बने हैं. इनके पीछे जनमत की ताक़त नहीं है.
उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े बच्चों के सामने डोभाल को अपने भाषण में मजबूरी में भगत सिंह का नाम लेना पड़ा क्योंकि आरएसएस के पास एक भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं हैं. लेकिन डोभाल यह भूल गए कि भगत सिंह ने मुग़लों को भारत को सोने की चिड़िया बनाने का श्रेय दिया था.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि देश के युवाओं को अंग्रेज़ों की मुखबिरी करने वाले, उनसे पेंशन लेने वाले लोगों और संगठनों से बदला लेना है और युवा इसके लिए मन बना चुके हैं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि दिल्ली दंगे में अगर अजीत डोभाल की भूमिका की जांच हो जाती तो इनकी असलियत सामने आ गई होती.
वक़्फ़ संशोधन बिल के विरोधियों को लखनऊ पुलिस द्वारा भेजा गया नोटिस असंवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट ले एक्शन- शाहनवाज़ आलम
नयी दिल्ली, 11 अप्रैल 2025 . कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ विचार रखने वाले नागरिकों के संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आज़ादी और विरोध करने के मौलिक अधिकारों के हनन करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसलों की अवमानना पर स्वतः संज्ञान लेकर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाई की मांग की है. शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि लखनऊ के कई नागरिकों को लखनऊ पुलिस द्वारा उनकी तरफ से वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ़ होने वाले संभावित प्रदर्शनों में शामिल होने का अंदेशा जताकर उन्हें नोटिस भेजा गया है. जबकि अभी नागरिकों की तरफ से कोई विरोध प्रदर्शन आयोजित हुआ भी नहीं है. सबसे गम्भीर मुद्दा यह है कि इन नोटिसों में नागरिकों को अगले एक साल तक के लिए उनसे शांति भंग का खतरा बताते हुए 50 हज़ार रुपये भी जमा कराने के साथ इतनी धनराशि की दो ज़मानतें भी मांगी जा रही हैं. शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यूपी पुलिस यह कैसे भूल सकती है कि उसकी यह कार्यवाई संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है जो नागर...
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