नयी दिल्ली, 28 दिसंबर 2025. उन्नाव रेप कांड के दोषी पूर्व भाजपा विधायक और योगी आदित्यनाथ के क़रीबी कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा का निलंबन आरएसएस और भाजपा से जुड़े बलात्कारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए दिया गया राजनीतिक फ़ैसला है. इससे पूरे देश की महिलाओं में भय और डर का माहौल बन गया है. सुप्रीम कोर्ट को इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिल्ली हाईकोर्ट के दोनों जजों को भी न्यायपालिका से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए.
ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 227 वीं कड़ी में कहीं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे बलात्कार के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा को निलंबित करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के दोनों जजों का रिकॉर्ड आरएसएस-भाजपा के नैरेटिव को क़ानूनी वैधता देने का रहा है. जज हरीश वैद्यनाथ शंकर गोधरा दंगों के समय लोक अभियोजक रहे हैं. तो वहीं राम मंदिर मामले में भी वो आरएसएस से जुड़े संगठनों के वकील रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के जज के बतौर वे बिना सुनवाई के ही जेल में बंद छात्र नेताओं उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर चुके हैं. वहीं वो
मार्च 2025 में यह विवादास्पद बयान भी दे चुके हैं कि "ब्राह्मण समुदायों का हिंदू पुनरुद्धारवाद से ऐतिहासिक भूमिका है. यानी उनकी आस्था संविधान के बजाए मनुवादी व्यवस्था में रही है और वो मेरिट के आधार पर न्यायपालिका में कार्य करने योग्य नहीं हैं.
दूसरे जज सुब्रह्मण्यम प्रसाद वही हैं जिन्होंने मुस्लिम संपत्तियों को निशाना बनाने वाले बुलडोजर विध्वंस के खिलाफ याचिकाओं को खारिज किया था. इसके अलावा उन्होंने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन द्वारा कथित धोखाधड़ी पर आलोचनात्मक पोस्ट हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी निर्देश दिया था.
इससे स्पष्ट है कि बलात्कारी कुलदीप सिंह सेंगर को न्यायिक फैसले से नहीं बल्कि राजनीतिक फैसले से छोड़ा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा के सत्ता में आने के बाद से बलात्कारियों के हौसले बुलंद हुए हैं. इसलिए बलात्कार और महिला हिंसा मुक्त समाज बनाने के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना हर नागरिक की नैतिक ज़िम्मेदारी है.

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